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Kushinagar News: बुखार से नौ घंटे के भीतर दो सगी बहनों और चचेरे भाई की मौत, हड़कंप
Sat, 29 Nov 2025 01:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 29 Nov 2025 01:21 AM IST
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मंजू की मौत के बाद रोते-बिलखते परिजन। संवाद
नेबुआ नौरंगिया (कुशीनगर)। स्थानीय थाना क्षेत्र के ढोलहा ग्राम पंचायत के गुलहरिया गांव में बृहस्पतिवार आधी रात से शुक्रवार सुबह नौ बजे के बीच दो सगी बहनों और एक चचेरे भाई की उल्टी-दस्त और बुखार से मौत हो गई। गांव में अब भी करीब दस बच्चे बीमार हैं। तीन बच्चों की मौत से जहां गांव में मातम है वहीं अन्य बीमार बच्चों की सेहत को लेकर भी लोग चिंतित हैं। बच्चों की मौत की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सीएमओ टीम के साथ गांव पहुंच गए और बीमार बच्चों के बारे में जानकारी ली और उन्हें दवा दी गई।
गुलहरिया निवासी दशरथ गोंड का पांच वर्षीय बेटा कृष, उनके छोटे भाई रविन्द्र उर्फ पिंटू गोंड की तीन वर्षीय बेटी खुशी और सात वर्षीय मंजू पिछले एक सप्ताह से तेज बुखार से पीड़ित थे। परिजनों ने शुरुआत में गांव के ही एक झोलाछाप से इलाज कराया पर बच्चों की हालत में सुधार नहीं हुआ। बृहस्पतिवार रात को बीआरडी मेडिकल गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में दोनों बहनों की मौत हो गई। शुक्रवार को सुबह कृष की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उसे लेकर कुशीनगर मेडिकल कॉलेज गए, जहां से डॉक्टरों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया। बीआरडी ले जाते समय रास्ते में सुबह नौ बजे उसकी भी मौत हो गई।
परिजनों ने शुक्रवार तड़के करीब पांच बजे ही खुशी और मंजू का अंतिम संस्कार कर दिया। दो बच्चों की मौत से परिवार और गांव का माहौल गमगीन था। वे इससे उबर पाते इससे पहले ही कुछ घंटे बाद ही चचेरे भाई कृष की भी मौत हो गई। कुछ घंटे के अंतराल पर तीन मासूमों की मौतों से गांव में दहशत है। करीब 10 बच्चे अब भी गांव में बुखार से पीड़ित हैं। यहां शाम को नेबुआ नौरंगिया सीएचसी, मलेरिया विभाग की टीम पहुंची। दवा छिड़काव के साथ बच्चों के खून का सैंपल लिया गया। इसके अलावा सफाई और गर्म पानी पीने के लिए निर्देश दिए गए।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 30 की जांची सेहत
गुलहरिया में बुखार से मौतों की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंच गई। शुक्रवार को टीम ने प्रभावित बच्चों सहित लगभग 30 ग्रामीणों के खून के नमूने लिए। जांच में किसी में मलेरिया या टायफाइड के लक्षण नहीं मिले। सभी की रिपोर्ट सामान्य आने पर ग्रामीणों में चर्चा है कि जब रिपोर्ट सामान्य है तो बच्चों की मौत आखिर किस बीमारी से हुई। शनिवार को भी बाल रोग विशेषज्ञों की टीम गांव आएगी और पीड़ित बच्चों का इलाज करेगी।
रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी का होगा खुलासा
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कैंप कर रही है। बेहतर इलाज के लिए बच्चों को मेडिकल कॉलेज भेजा गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मेडिकल रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा। -डॉ. चंद्रप्रकाश, सीएमओ
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गुलहरिया निवासी दशरथ गोंड का पांच वर्षीय बेटा कृष, उनके छोटे भाई रविन्द्र उर्फ पिंटू गोंड की तीन वर्षीय बेटी खुशी और सात वर्षीय मंजू पिछले एक सप्ताह से तेज बुखार से पीड़ित थे। परिजनों ने शुरुआत में गांव के ही एक झोलाछाप से इलाज कराया पर बच्चों की हालत में सुधार नहीं हुआ। बृहस्पतिवार रात को बीआरडी मेडिकल गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में दोनों बहनों की मौत हो गई। शुक्रवार को सुबह कृष की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उसे लेकर कुशीनगर मेडिकल कॉलेज गए, जहां से डॉक्टरों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया। बीआरडी ले जाते समय रास्ते में सुबह नौ बजे उसकी भी मौत हो गई।
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परिजनों ने शुक्रवार तड़के करीब पांच बजे ही खुशी और मंजू का अंतिम संस्कार कर दिया। दो बच्चों की मौत से परिवार और गांव का माहौल गमगीन था। वे इससे उबर पाते इससे पहले ही कुछ घंटे बाद ही चचेरे भाई कृष की भी मौत हो गई। कुछ घंटे के अंतराल पर तीन मासूमों की मौतों से गांव में दहशत है। करीब 10 बच्चे अब भी गांव में बुखार से पीड़ित हैं। यहां शाम को नेबुआ नौरंगिया सीएचसी, मलेरिया विभाग की टीम पहुंची। दवा छिड़काव के साथ बच्चों के खून का सैंपल लिया गया। इसके अलावा सफाई और गर्म पानी पीने के लिए निर्देश दिए गए।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 30 की जांची सेहत
गुलहरिया में बुखार से मौतों की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंच गई। शुक्रवार को टीम ने प्रभावित बच्चों सहित लगभग 30 ग्रामीणों के खून के नमूने लिए। जांच में किसी में मलेरिया या टायफाइड के लक्षण नहीं मिले। सभी की रिपोर्ट सामान्य आने पर ग्रामीणों में चर्चा है कि जब रिपोर्ट सामान्य है तो बच्चों की मौत आखिर किस बीमारी से हुई। शनिवार को भी बाल रोग विशेषज्ञों की टीम गांव आएगी और पीड़ित बच्चों का इलाज करेगी।
रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी का होगा खुलासा
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कैंप कर रही है। बेहतर इलाज के लिए बच्चों को मेडिकल कॉलेज भेजा गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मेडिकल रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा। -डॉ. चंद्रप्रकाश, सीएमओ