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मां और बेटे का एक ही दिन निधन
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मां और बेटे का एक ही दिन निधन
- छह माह पूर्व हुई थी सोहन के पिता की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
तुर्कपट्टी। थाना क्षेत्र के रुदवलिया गांव में बुधवार को मां व उसके बेटे की एक ही समय पर मृत्यु हो गई। इसकी जानकारी होते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों ने देेेर शाम खरदर पुल के पास घाघी नदी घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया।
रुदवलिया गांव के निवासी केशरी देवी (70) की बुधवार की सुबह करीब 11 बजे निधन हो गया। करीब छह माह पूर्व हुए पति की मौत के बाद वह बीमार चल रही थीं। केशरी देवी के तीन पुत्र हैं, जिसमें बड़े बेटे सोहन मद्धेशिया (54) गांव स्थित घर पर रहते थे। बाकी दो बेटे चंद्रदीप और जीवन रुदवलिया चौराहे पर अपनी मां के साथ रहते हैं। केशरी की मौत की खबर सुनते ही सभी परिजन घर पहुंचे। वहां सोहन दरवाजे पर कुर्सी पर बैठे थे। परिजन मौत की खबर जब सोहन को देने गए तो देखा कि वह कुर्सी पर अचेत अवस्था में पड़े हैं। उन्हें झकझोर का उठाया गया तो वे कुर्सी से गिर पड़े। परिजनों ने उनका नब्ज देखा तो पता चला कि उनका निधन हो गया है। अंतिम संस्कार के लिए एक साथ मां और बेटे की अर्थी उठी तो पूरा गांव शोक में डूब गया। परिजनों ने दोपहर बाद दोनों शवों को खरदर पुल के पास अंतिम संस्कार कर दिया।
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- छह माह पूर्व हुई थी सोहन के पिता की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
तुर्कपट्टी। थाना क्षेत्र के रुदवलिया गांव में बुधवार को मां व उसके बेटे की एक ही समय पर मृत्यु हो गई। इसकी जानकारी होते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों ने देेेर शाम खरदर पुल के पास घाघी नदी घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया।
रुदवलिया गांव के निवासी केशरी देवी (70) की बुधवार की सुबह करीब 11 बजे निधन हो गया। करीब छह माह पूर्व हुए पति की मौत के बाद वह बीमार चल रही थीं। केशरी देवी के तीन पुत्र हैं, जिसमें बड़े बेटे सोहन मद्धेशिया (54) गांव स्थित घर पर रहते थे। बाकी दो बेटे चंद्रदीप और जीवन रुदवलिया चौराहे पर अपनी मां के साथ रहते हैं। केशरी की मौत की खबर सुनते ही सभी परिजन घर पहुंचे। वहां सोहन दरवाजे पर कुर्सी पर बैठे थे। परिजन मौत की खबर जब सोहन को देने गए तो देखा कि वह कुर्सी पर अचेत अवस्था में पड़े हैं। उन्हें झकझोर का उठाया गया तो वे कुर्सी से गिर पड़े। परिजनों ने उनका नब्ज देखा तो पता चला कि उनका निधन हो गया है। अंतिम संस्कार के लिए एक साथ मां और बेटे की अर्थी उठी तो पूरा गांव शोक में डूब गया। परिजनों ने दोपहर बाद दोनों शवों को खरदर पुल के पास अंतिम संस्कार कर दिया।
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