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Kushinagar News: तीन सदस्यीय टीम करेगी नवजात के मौत के मामले की जांच
Thu, 21 Sep 2023 12:16 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 21 Sep 2023 12:16 PM IST
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जिलाधिकारी ने मामले को लिया संज्ञान, तीन डॉक्टरों की टीम गठित, एक सप्ताह में सौंपेगी रिपोर्ट
सेना के जवान ने चिकित्सक पर लगाया था इलाज में लापरवाही और बिना देखे रेफर करने का आरोप
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू वार्ड से रेफर हुआ था बच्चा
मौत के बाद इमरजेंसी गेट पर परिजनों के साथ अन्य लोगों ने किया था हंगामा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सेना के जवान के नवजात बेटे की मौत के बाद माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को हुए हंगामे को जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया है। आरोपी डॉक्टर की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम नामित किया गया है। साथ ही एक सप्ताह का वक्त दिया गया है। तय समय के भीतर जांच टीम मामले की जांच करके रिपोर्ट सौंपेंगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज कॉलेज में मरीज माफिया की चिकित्सकों से गठजोड़ जगजाहिर है। केबिन में बैठकर दवा और जांच लिखते हैं। इसमें मरीजों का बड़े पैमाने पर शोषण होता है। इस शोषण के विरोध में आवाज उठाने वाले मरीजों से तकरार की बात अकसर सामने आती है। मामला हंगामा और विरोध प्रदर्शन तक पहुंचने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से टीम नामित होती है और जांच करती है। फिर क्या मामले में लीपापोती हो जाती है। इसलिए गलत करने वालों के हौसले और मजबूत हो जाता है।
सोमवार रात खेसरहा थाना क्षेत्र के बनकटा गांव निवासी सेना के जवान राज सिंह का दिन में जन्म लेने वाले बेटे की रात में मौत हो गई। राज सिंह ने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक एसएल पटेल पर दो घंटे से लेट से शराब के नशे में आने और इलाज करने के बजाए रेफर कर देने से बेटे की मौत हो जाने का आरोप लगाया था। मामले का जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने संज्ञान में लिया है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच करने का आदेश दिया है। यह पहला मामला है, जिसमें प्रशासन की ओर से खुद संज्ञान लेकर जांच कराई जा रही है। इससे पहले विभागीय जांच होती थी, जिसमें लीपापोती हो जाती थी। अब परिजनों और आम जनता को कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
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यह है मामला
खेसरहा थाना क्षेत्र के बनकटा गांव निवासी राज सिंह सेना के जवान हैं और मौजूदा समय में उनकी तैनाती हिमाचल प्रदेश में है। राज सिंह पत्नी का डिलिवरी 18 सितंबर को सुबह 7:30 बजे महिला अस्पताल में हुआ। उन्हें लड़का पैदा हुआ था। रात 12:40 एकाएक लंबी-लंबी सांस लेने लगा तो नर्स ने मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में बच्चे को भर्ती करने की सलाह दी। वार्ड में लेकर पहुंचे तो पता चला कि चिकित्सक नहीं है, उधर बच्चे की हालत बिगड़ रही थी। नर्स से ऑक्सीजन लगाने के लिए कहा तो वह नहीं सुनी। लगभग 2:50 बजे चिकित्सक एसएल पटेल शराब के नशे में गुटका चबाते हुए पहुंचे। जब उनसे इलाज के बारे में कहा गया तो इलाज करने के बजाय बिना बच्चे को देखे ही बोले स्थिति खराब है और रेफर कर दिया। गोरखपुर ले जाते समय धानी के पास ही बच्चे की मौत हो गई। अगर समय से इलाज शुरू होता तो शायद बच्चे की जान नहीं जाती है। राज सिंह ने प्राचार्य को शिकायती पत्र देकर मामले की जांच की मांग की थी। चिकित्सक के विरोध में इमरजेंसी गेट पर विरोध प्रदर्शन भी हुआ था।
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टीम में ये शामिल
जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने प्राचार्य डॉक्टर एके झा को टीम गठित करके जांच रिपोर्ट देने का निर्देश मामला संज्ञान में आने के बाद दिया। जिसके क्रम में प्राचार्य की ओर से तीन सदस्यीय टीम गठित किया गया है। इसमें डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता, महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएन उपाध्याय, फिजिशियन डॉ. संजय कुमार शामिल हैं। इन्हें एक सप्ताह में जांच करके रिपोर्ट देने के लिए निर्देश दिया गया है।
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नवजात के मौत का मामला संज्ञान में आते ही इसकी निष्पक्ष जांच करके रिपोर्ट देने के लिए सीएमएस को निर्देशित किया गया है। जांच टीम के रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर
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सेना के जवान ने चिकित्सक पर लगाया था इलाज में लापरवाही और बिना देखे रेफर करने का आरोप
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू वार्ड से रेफर हुआ था बच्चा
मौत के बाद इमरजेंसी गेट पर परिजनों के साथ अन्य लोगों ने किया था हंगामा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सेना के जवान के नवजात बेटे की मौत के बाद माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को हुए हंगामे को जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया है। आरोपी डॉक्टर की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम नामित किया गया है। साथ ही एक सप्ताह का वक्त दिया गया है। तय समय के भीतर जांच टीम मामले की जांच करके रिपोर्ट सौंपेंगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज कॉलेज में मरीज माफिया की चिकित्सकों से गठजोड़ जगजाहिर है। केबिन में बैठकर दवा और जांच लिखते हैं। इसमें मरीजों का बड़े पैमाने पर शोषण होता है। इस शोषण के विरोध में आवाज उठाने वाले मरीजों से तकरार की बात अकसर सामने आती है। मामला हंगामा और विरोध प्रदर्शन तक पहुंचने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से टीम नामित होती है और जांच करती है। फिर क्या मामले में लीपापोती हो जाती है। इसलिए गलत करने वालों के हौसले और मजबूत हो जाता है।
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सोमवार रात खेसरहा थाना क्षेत्र के बनकटा गांव निवासी सेना के जवान राज सिंह का दिन में जन्म लेने वाले बेटे की रात में मौत हो गई। राज सिंह ने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक एसएल पटेल पर दो घंटे से लेट से शराब के नशे में आने और इलाज करने के बजाए रेफर कर देने से बेटे की मौत हो जाने का आरोप लगाया था। मामले का जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने संज्ञान में लिया है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच करने का आदेश दिया है। यह पहला मामला है, जिसमें प्रशासन की ओर से खुद संज्ञान लेकर जांच कराई जा रही है। इससे पहले विभागीय जांच होती थी, जिसमें लीपापोती हो जाती थी। अब परिजनों और आम जनता को कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
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यह है मामला
खेसरहा थाना क्षेत्र के बनकटा गांव निवासी राज सिंह सेना के जवान हैं और मौजूदा समय में उनकी तैनाती हिमाचल प्रदेश में है। राज सिंह पत्नी का डिलिवरी 18 सितंबर को सुबह 7:30 बजे महिला अस्पताल में हुआ। उन्हें लड़का पैदा हुआ था। रात 12:40 एकाएक लंबी-लंबी सांस लेने लगा तो नर्स ने मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में बच्चे को भर्ती करने की सलाह दी। वार्ड में लेकर पहुंचे तो पता चला कि चिकित्सक नहीं है, उधर बच्चे की हालत बिगड़ रही थी। नर्स से ऑक्सीजन लगाने के लिए कहा तो वह नहीं सुनी। लगभग 2:50 बजे चिकित्सक एसएल पटेल शराब के नशे में गुटका चबाते हुए पहुंचे। जब उनसे इलाज के बारे में कहा गया तो इलाज करने के बजाय बिना बच्चे को देखे ही बोले स्थिति खराब है और रेफर कर दिया। गोरखपुर ले जाते समय धानी के पास ही बच्चे की मौत हो गई। अगर समय से इलाज शुरू होता तो शायद बच्चे की जान नहीं जाती है। राज सिंह ने प्राचार्य को शिकायती पत्र देकर मामले की जांच की मांग की थी। चिकित्सक के विरोध में इमरजेंसी गेट पर विरोध प्रदर्शन भी हुआ था।
टीम में ये शामिल
जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने प्राचार्य डॉक्टर एके झा को टीम गठित करके जांच रिपोर्ट देने का निर्देश मामला संज्ञान में आने के बाद दिया। जिसके क्रम में प्राचार्य की ओर से तीन सदस्यीय टीम गठित किया गया है। इसमें डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता, महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएन उपाध्याय, फिजिशियन डॉ. संजय कुमार शामिल हैं। इन्हें एक सप्ताह में जांच करके रिपोर्ट देने के लिए निर्देश दिया गया है।
नवजात के मौत का मामला संज्ञान में आते ही इसकी निष्पक्ष जांच करके रिपोर्ट देने के लिए सीएमएस को निर्देशित किया गया है। जांच टीम के रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर