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यूक्रेन में फंसे छात्रों की हुई घर वापसी
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यूक्रेन से वापस घर आने पर आरती उतारती शिवकांत कुशवाहा की मां।संवाद।
- फोटो : KUSHINAGAR
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यूक्रेन में फंसे मेडिकल के तीन छात्रों की हुई घर वापसी
परिवार में उत्सव का माहौल
पडरौना के शेखपुरा, फाजिलनगर और चाफ राय पट्टी के निवासी हैं ये विद्यार्थी
पडरौना। यूक्रेन में फंसे जिले के तीन छात्र बुधवार को घर लौट आए। इससे परिजन खुशी से झूम उठे। जिगर के कलेजे को पास पाकर परिवार में उत्सवा का माहौल दिखा। यूक्रेन से घर लौटने वाले छात्रों की संख्या अब चार हो गई है। अब भी मेडिकल 13 विद्यार्थी रोमानिया व हंगरी में इंडियन एंबेसी की देखरेख में हैं।
सात विद्यार्थी पोलैंड बॉर्डर पर पहुंच गए हैं। स्वदेश लौटे विद्यार्थियों ने कहा कि यूक्रेन में चल रही गोली और बारूद देख घर पहुंचने उम्मीद नहीं थी। घर पहुंच कर सुकून महसूस हो रहा है। यूक्रेन से घर पहुंचे पडरौना क्षेत्र के शेखपुरा निवासी शिवाकांत कुशवाहा से युद्ध के दर्दनाक बातें सुनकर लोग सिहर उठे। उन्होंने बताया कि घर वापसी के लिए घंटों बिना भोजन व पानी के लाइन में खड़े रहकर संघर्ष करना पड़ा। घर आने पर नई जिंदगी मिलने की अनुभूति हो रही है। उन्होंने बताया कि रोमानिया के लोगों ने काफी मदद की। जरूरत के सारे सामान उपलब्ध कराए।
पडरौना कोतवाली क्षेत्र के शेखपुरा निवासी शिवशंकर कुशवाहा ने बताया कि बेटा शिवाकांत दो माह पहले आठ दिसंबर 2021 को यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया था। शिवाकांत इवानो फ्रैंकविष नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में प्रथम वर्ष का छात्र है।
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सुमित के घर पहुंचने पर झूमे परिवारीजन
फाजिलनगर। मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गया फाजिलनगर के उस्मानपुर निवासी सुमित के घर पहुंचने पर परिवार के लोग खुशी से झूम उठे।
अजय सिंह का बेटा सुमित यूक्रेन में एमबीबीएस के तीसरे वर्ष का छात्र है। युद्ध के चलते वह वहां फंस गया था। सुमित ने बताया कि युद्ध शुरू होने के दो दिन तक सबकुछ सामान्य रहा, लेकिन जब कीव पर बमबारी शुरू हुई, तो विस्फोट की आवाज सुनकर सभी लोग दहशत में आ गए थे। ऐसा लग रहा था कि स्वदेश लौटना मुश्किल होगा। बार-बार लड़ाकू विमानों की आवाज सुनकर बंकरों में घुसना पड़ता था। इस बीच कई दिनों तक भोजन भी नसीब नहीं हुआ।
27 फरवरी को छात्रों ने बस से जान की बाजी पर लगाकर रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचे, तो रास्ते में बमबारी हो रही थी। यूक्रेन छोड़ने के बाद जान बच सकी। यूक्रेन पुलिस से काफी जद्दोजहद के बाद बॉर्डर क्रास कर सके। रोमानिया में प्रवेश करते ही एंबेसी के लोग सभी छात्रों को एयरपोर्ट के पास बने एक गेस्ट हाउस में रखा था। पिता अजय सिंह ने कहा कि बेटा सकुशल घर पहुंचने सभी लोगों ने राहत की सांस ली है।
रिश्तेदार घर ठहरा तुषार
दुदही। विशुनपुरा थानाक्षेत्र के ग्राम पंचायत चाफ निवासी संतोष कुशवाहा का बेटा तुषार कुशवाहा यूक्रेन से पडरौना आ गया है। यहां एक रिश्तेदार के घर ठहरा है। तुषार दिसंबर में एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन गया था। चाफ गांव में न्यू पीएचसी पर स्वास्थ्य विभाग में एनएमए (कुष्ठ रोग) के पद पर तैनात संतोष कुशवाहा ने दूसरे बेटे तुषार को डॉक्टर बनाने के लिए यूक्रेन भेजा था। पिता ने बताया कि वहां का तनावपूर्ण माहौल होने के बाद एक सप्ताह तक खाना ठीक से नहीं खाया हूं। मां सीमा की चिंता बेटा के दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद दूर हो सकी। सुबह वह पैतृक आवास पर पहुंचेंगे।
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परिवार में उत्सव का माहौल
पडरौना के शेखपुरा, फाजिलनगर और चाफ राय पट्टी के निवासी हैं ये विद्यार्थी
पडरौना। यूक्रेन में फंसे जिले के तीन छात्र बुधवार को घर लौट आए। इससे परिजन खुशी से झूम उठे। जिगर के कलेजे को पास पाकर परिवार में उत्सवा का माहौल दिखा। यूक्रेन से घर लौटने वाले छात्रों की संख्या अब चार हो गई है। अब भी मेडिकल 13 विद्यार्थी रोमानिया व हंगरी में इंडियन एंबेसी की देखरेख में हैं।
सात विद्यार्थी पोलैंड बॉर्डर पर पहुंच गए हैं। स्वदेश लौटे विद्यार्थियों ने कहा कि यूक्रेन में चल रही गोली और बारूद देख घर पहुंचने उम्मीद नहीं थी। घर पहुंच कर सुकून महसूस हो रहा है। यूक्रेन से घर पहुंचे पडरौना क्षेत्र के शेखपुरा निवासी शिवाकांत कुशवाहा से युद्ध के दर्दनाक बातें सुनकर लोग सिहर उठे। उन्होंने बताया कि घर वापसी के लिए घंटों बिना भोजन व पानी के लाइन में खड़े रहकर संघर्ष करना पड़ा। घर आने पर नई जिंदगी मिलने की अनुभूति हो रही है। उन्होंने बताया कि रोमानिया के लोगों ने काफी मदद की। जरूरत के सारे सामान उपलब्ध कराए।
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पडरौना कोतवाली क्षेत्र के शेखपुरा निवासी शिवशंकर कुशवाहा ने बताया कि बेटा शिवाकांत दो माह पहले आठ दिसंबर 2021 को यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया था। शिवाकांत इवानो फ्रैंकविष नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में प्रथम वर्ष का छात्र है।
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सुमित के घर पहुंचने पर झूमे परिवारीजन
फाजिलनगर। मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गया फाजिलनगर के उस्मानपुर निवासी सुमित के घर पहुंचने पर परिवार के लोग खुशी से झूम उठे।
अजय सिंह का बेटा सुमित यूक्रेन में एमबीबीएस के तीसरे वर्ष का छात्र है। युद्ध के चलते वह वहां फंस गया था। सुमित ने बताया कि युद्ध शुरू होने के दो दिन तक सबकुछ सामान्य रहा, लेकिन जब कीव पर बमबारी शुरू हुई, तो विस्फोट की आवाज सुनकर सभी लोग दहशत में आ गए थे। ऐसा लग रहा था कि स्वदेश लौटना मुश्किल होगा। बार-बार लड़ाकू विमानों की आवाज सुनकर बंकरों में घुसना पड़ता था। इस बीच कई दिनों तक भोजन भी नसीब नहीं हुआ।
27 फरवरी को छात्रों ने बस से जान की बाजी पर लगाकर रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचे, तो रास्ते में बमबारी हो रही थी। यूक्रेन छोड़ने के बाद जान बच सकी। यूक्रेन पुलिस से काफी जद्दोजहद के बाद बॉर्डर क्रास कर सके। रोमानिया में प्रवेश करते ही एंबेसी के लोग सभी छात्रों को एयरपोर्ट के पास बने एक गेस्ट हाउस में रखा था। पिता अजय सिंह ने कहा कि बेटा सकुशल घर पहुंचने सभी लोगों ने राहत की सांस ली है।
रिश्तेदार घर ठहरा तुषार
दुदही। विशुनपुरा थानाक्षेत्र के ग्राम पंचायत चाफ निवासी संतोष कुशवाहा का बेटा तुषार कुशवाहा यूक्रेन से पडरौना आ गया है। यहां एक रिश्तेदार के घर ठहरा है। तुषार दिसंबर में एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन गया था। चाफ गांव में न्यू पीएचसी पर स्वास्थ्य विभाग में एनएमए (कुष्ठ रोग) के पद पर तैनात संतोष कुशवाहा ने दूसरे बेटे तुषार को डॉक्टर बनाने के लिए यूक्रेन भेजा था। पिता ने बताया कि वहां का तनावपूर्ण माहौल होने के बाद एक सप्ताह तक खाना ठीक से नहीं खाया हूं। मां सीमा की चिंता बेटा के दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद दूर हो सकी। सुबह वह पैतृक आवास पर पहुंचेंगे।