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वॉकओवर के बाद भी कम नहीं हुईं सपा की मुश्किलें
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Wed, 30 Dec 2015 11:38 PM IST
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कसया (कुशीनगर)। बसपा की तरफ से घोषित प्रत्याशी ममता चौधरी के चुनाव मैदान से पीछे हटने और भाजपा और कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी घोषित नहीं किए जाने के बाद सपा को वॉकओवर तो मिल गया, लेकिन इसके बाद भी पार्टी प्रत्याशी की मुश्किल कम नहीं हुई है।
सपा का दूसरा खेमा अब भी भितरघात में जुटा है। सूत्रों की मानें तो अब भी विरोधी खेमे में शामिल लोग अपने प्रत्याशी के पक्ष में जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क कर रहे हैं।
इससे सपा की ओर से अधिकृत और विरोधी खेमे की ओर से मैदान में उतारे जाने वाले प्रत्याशियों के बीच मुकाबले के आसार बढ़ रहे हैं।
ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी की तरफ से पर्यवेक्षक बनाए गए कैबिनेट मंत्री सपा से जुड़े लोगों को कैसे मना पाएंगे, यह देखना बाकी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए एक जनवरी को 11 बजे से तीन बजे तक डीएम कोर्ट में पर्चा दाखिला होगा। चार जनवरी को नाम वापसी और पर्चों की जांच होगी और सात जनवरी को मतदान होगा।
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इसी दिन शाम को मतगणना के बाद परिणाम की घोषणा भी कर दी जाएगी। कुशीनगर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद जब अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ तो इसको ध्यान में ही रखकर सपा के विधायक डॉ. पूर्णमासी देहाती के बेटे हरीश राणा रामकोला मध्य और पूर्व विधायक शंभू चौधरी की पत्नी ब्लॉक प्रमुख ममता चौधरी कप्तानगंज पूर्वी से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ीं।
चुनाव का परिणाम दोनों लोगों के पक्ष में रहा और अध्यक्ष पद के लिए सपा की ओर से हरीश और बसपा की ओर से ममता को पार्टी का अधिकृत उम्मीद्वार घोषित कर दिया गया।
जबकि अब तक भाजपा और कांग्रेस की ओर से कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं किया गया। इधर सपा की ओर से हरीश को प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद विरोधी खेमे के लोग अंदरखाने में अपना प्रत्याशी खड़ा कर लिए और उसके पक्ष में संपर्क तेज कर दिए।
इस तरह तीन लोगों के समर्थक जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क करना शुरू किए तो सपा के अधिकृत उम्मीदवार की ओर से विरोधी खेमे के सक्रिय होने की बात पार्टी हाईकमान तक पहुंचाई गई। परिणाम स्वरूप दो लोगों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और पूर्व जिला पंचायत सदस्य से स्पष्टीकरण मांगा गया।
इसी बीच मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बसपा की अधिकृत प्रत्याशी ममता चुनाव मैदान से पीछे हटने की घोषणा कर दीं। उन्होंने सत्तापक्ष के लोगों पर धन बल का प्रयोग करने का आरोप लगाया।
उनके इस निर्णय के बाद सपा के लोगों को लगा कि उनके अधिकृत प्रत्याशी को वॉकओवर मिल गया। क्याेंकि अब तक भाजपा और कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं किया था। लेकिन विरोधी खेमे में शामिल लोगों की सक्रियता से उनकी मुश्किलें बढ़ने लगी हैं।
चर्चा है कि सपा के विरोधी खेमे को लोग प्रलोभन का दायरा बढ़ा दिया है। इससे सपा के अधिकृत और विरोधी खेमे के प्रत्याशी के बीच ही मुकाबला होने का आसार बढ़ते जा रहे हैं।
संगठन की ओर से पर्यवेक्षक बनाए गए कैबिनेट मंत्री अपनों को कितना समझा पाने में सफल होंगे यह नाम वापसी के बाद ही पता चलेगा।
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सपा का दूसरा खेमा अब भी भितरघात में जुटा है। सूत्रों की मानें तो अब भी विरोधी खेमे में शामिल लोग अपने प्रत्याशी के पक्ष में जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क कर रहे हैं।
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इससे सपा की ओर से अधिकृत और विरोधी खेमे की ओर से मैदान में उतारे जाने वाले प्रत्याशियों के बीच मुकाबले के आसार बढ़ रहे हैं।
ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी की तरफ से पर्यवेक्षक बनाए गए कैबिनेट मंत्री सपा से जुड़े लोगों को कैसे मना पाएंगे, यह देखना बाकी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए एक जनवरी को 11 बजे से तीन बजे तक डीएम कोर्ट में पर्चा दाखिला होगा। चार जनवरी को नाम वापसी और पर्चों की जांच होगी और सात जनवरी को मतदान होगा।
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इसी दिन शाम को मतगणना के बाद परिणाम की घोषणा भी कर दी जाएगी। कुशीनगर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद जब अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ तो इसको ध्यान में ही रखकर सपा के विधायक डॉ. पूर्णमासी देहाती के बेटे हरीश राणा रामकोला मध्य और पूर्व विधायक शंभू चौधरी की पत्नी ब्लॉक प्रमुख ममता चौधरी कप्तानगंज पूर्वी से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ीं।
चुनाव का परिणाम दोनों लोगों के पक्ष में रहा और अध्यक्ष पद के लिए सपा की ओर से हरीश और बसपा की ओर से ममता को पार्टी का अधिकृत उम्मीद्वार घोषित कर दिया गया।
जबकि अब तक भाजपा और कांग्रेस की ओर से कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं किया गया। इधर सपा की ओर से हरीश को प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद विरोधी खेमे के लोग अंदरखाने में अपना प्रत्याशी खड़ा कर लिए और उसके पक्ष में संपर्क तेज कर दिए।
इस तरह तीन लोगों के समर्थक जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क करना शुरू किए तो सपा के अधिकृत उम्मीदवार की ओर से विरोधी खेमे के सक्रिय होने की बात पार्टी हाईकमान तक पहुंचाई गई। परिणाम स्वरूप दो लोगों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और पूर्व जिला पंचायत सदस्य से स्पष्टीकरण मांगा गया।
इसी बीच मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बसपा की अधिकृत प्रत्याशी ममता चुनाव मैदान से पीछे हटने की घोषणा कर दीं। उन्होंने सत्तापक्ष के लोगों पर धन बल का प्रयोग करने का आरोप लगाया।
उनके इस निर्णय के बाद सपा के लोगों को लगा कि उनके अधिकृत प्रत्याशी को वॉकओवर मिल गया। क्याेंकि अब तक भाजपा और कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं किया था। लेकिन विरोधी खेमे में शामिल लोगों की सक्रियता से उनकी मुश्किलें बढ़ने लगी हैं।
चर्चा है कि सपा के विरोधी खेमे को लोग प्रलोभन का दायरा बढ़ा दिया है। इससे सपा के अधिकृत और विरोधी खेमे के प्रत्याशी के बीच ही मुकाबला होने का आसार बढ़ते जा रहे हैं।
संगठन की ओर से पर्यवेक्षक बनाए गए कैबिनेट मंत्री अपनों को कितना समझा पाने में सफल होंगे यह नाम वापसी के बाद ही पता चलेगा।