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एसडीएम से मिलने पहुंचीं फर्जीवाड़ा की शिकार छात्राएं

Sat, 08 Jan 2022 11:18 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jan 2022 11:18 PM IST
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The victims of fraud came to meet the SDM
हाटा तहसील में एसडीएम का इंतजार करतीं छात्राएं। - फोटो : KUSHINAGAR
एसडीएम से मिलने पहुंचीं फर्जीवाड़ा की शिकार छात्राएं
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हाटा(कुशीनगर)। फर्जीवाड़े की शिकार हुईं पैरामेडिकल कॉलेज की छात्राएं न्याय के लिए भटक रही हैं। शनिवार को एक बार फिर छात्राएं हाटा तहसील में एसडीएम से मिलने पहुंचीं, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। छात्राओं का कहना था कि एसडीएम ने उन्हें बुलाया था।
हाटा क्षेत्र के पगरा में एक पैरामेडिकल कॉलेज है। उसमें विभिन्न कोर्स में करीब दो सौ छात्र-छात्राओं ने दाखिला ले रखा है। कॉलेज के संचालक की ओर से कुछ छात्राओं को नर्सिंग का प्रमाणपत्र दिया गया था। छात्राओं ने उस प्रमाणपत्र को नौकरी के लिए लगाया। जांच के दौरान उनके प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। छात्राओं का कहना है कि जब कॉलेज संचालक से इस बात की शिकायत की गई तो वह धमकाने लगे। छात्राओं ने जब सचाई जानने का प्रयास किया तो पता चला जिस यूनिवर्सिटी में प्रवेश की बात बताई गई थी, उसमें उनका नामांकन नहीं हुआ है। इस संबंध में छात्राओं और अभिभावकों ने बुधवार को एसडीएम हाटा को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की थी।
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धोखाधड़ी की शिकार हुईं प्रगति सिंह, श्वेता गुप्ता, गुंजा चौहान आदि छात्राओं ने बताया कि 85 हजार रुपयेे प्रतिवर्ष के हिसाब से तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए हाटा क्षेत्र के पगरा वार्ड नंबर-पांच में संचालित पैरामेडिकल इंस्टीच्यूट में दाखिला लिया था। वहां से उन्हें नर्सिंग का प्रमाणपत्र मिला था। जब उसे नौकरी के लिए आवेदन पत्र के साथ लगाया गया तो जांच में फर्जी निकला। जब इसकी शिकायत संचालक से की गई तो उनकी तरफ से धमकी दी जाने लगी।
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मामले की जांच कराई जाएगी: एसडीएम
एसडीएम पूर्ण बोरा ने बताया कि शनिवार को वह कोविड कैंप में चले गए थे, इसलिए नहीं मिल पाए। उन्होंने बताया कि यह प्रकरण संज्ञान में है। छात्र-छात्राओं का पूरा दस्तावेज लिया गया है। इसकी जांच कराई जाएगी। आरोप सही मिला तो वसूली कराकर सभी छात्र-छात्राओं के रुपये दिलाए जाएंगे। संचालक के विरुद्घ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

‘विद्यार्थियों को दी गई थी सही जानकारी’
हाटा क्षेत्र के पगरा वार्ड नंबर-पांच में संचालित जननी पैरामेडिकल साइंस इंस्टीच्यूट के संचालक विजय प्रताप सिंह का कहना है कि उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया था कि यहां से मिलने वाली डिग्री का किसी नौकरी में उपयोग नहीं हो पाएगा। यहां केवल जानकारी के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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