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एमडीएम के लिए चूल्हा जलाने वाली रसोइयों के घर के बुझने लगे हैं चूल्हे
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एमडीएम के लिए चूल्हा जलाने वाली रसोइयों के घर के बुझने लगे हैं चूल्हे
चार माह से मानदेय नहीं मिलने से परिवार का भरण-पोषण करने में आ रही दिक्कत
पडरौना। जिले के सरकारी विद्यालयों में एमडीएम बनाने वाले रसोइयों का मानदेय बीते चार माह से बकाया चल रहा है। इससे उनके सामने परिवार को खर्च चलाना भारी पड़ रहा है। हालत यह है कि एमडीएम का चूल्हा जलाने वाले रसोइयों का चूल्हा बुझने के कगार पर पहुंच गया है।
जनपद में 2,464 परिषदीय, 54 वित्तपोषित जूनियर, 55 माध्यमिक विद्यालय, 26 समाज कल्याण, तीन राजकीय और एक संस्कृत विद्यालय में कक्षा एक से आठवीं तक नामांकित तीन लाख 83 हजार छात्र-छात्राओं के लिए एमडीएम योजना के तहत भोजन बनता है। एमडीएम बनाने के लिए जिले में कुल 7,799 रसोइया तैनात हैं। नए शैक्षिक सत्र के शुरू होने के बाद से अब तक इन रसोइयों को मानदेय नहीं मिला है। हालांकि मई और जून में विद्यालय में ग्रीष्मावकाश होने के चलते एमडीएम का भोजन नहीं बनता है, जिसके चलते रसोइयों का इस माह का मानदेय भी नहीं मिलता है। इस तरह चार माह का मानदेय रसोइयों को नहीं मिला है। इससे उनके सामने परिवार का खर्च वहन करना मुश्किल हो गया है।
उच्च प्रामिक विद्यालय करहियां मठिया खुर्द के हजारी टोला में तैनात रसोइया संध्या देवी ने बताया कि उन्हें 2 हजार रुपये मानदेय मिलता है। इतने मानदेय में किसी तरह परिवार का खर्च चलाया जाता है, लेकिन सरकार की तरफ से यह मानदेय भी समय से नहीं मिलता है, जिससे परिवार को परेशानी उठानी पड़ती है।
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इसी विद्यालय में तैनात गीता देवी ने कहा कि स्कूल पहुंचने के बाद से बंद होने तक रसोइयों को काम करना पड़ता है। इसके बदले दो हजार रुपये मानदेय मिलता है। इतना कम मानदेय भी समय से नहीं मिलता है, जिससे परिवार का खर्च चलाने में पेरशानी उठानी पड़ती है।
प्राथमिक विद्यालय मठिया खुर्द के अहिर टोला में तैनात मीरा देवी ने कहा कि महंगाई के इस दौर में रसोइयों का दो हजार वेतन होना ऊंट के मुंह में जीरा है। इन पैसों को पाने के लिए बार-बार प्रधानाध्यापक से लेकर विभाग के अधिकारियों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।
इसी विद्यालय पर तैनात सावित्री देवी ने बताया कि इतने मानदेय पर परिवार का खर्चा चलाना काफी मुश्किल हो रहा है। सरकार से मिलने वाले मानदेय को समय से देने के लिए कई बार अधिकारियों से मांग करनी पड़ी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जिले में तैनात रसोइयों को एक माह का मानदेय देने के लिए बजट मिला है। इसे रसोइयों के खाते में भिजवाने की व्यवस्था की जा रही है। शीघ्र ही उनके खाते में मानदेय भेज दिया जाएगा।
जितेंद्र गौतम, जिला समंवयक (एमडीएम)
बीएसए डॉ. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा ने बताया कि जिले के सरकारी विद्यालयों में एमडीएम बनाने के लिए तैनात रसोइयों का अप्रैल से बकाया मानदेय भुगतान के लिए शासन को डिमांड भेजी गई थी। इसमें से अभी एक माह के मानदेय की धनराशि प्राप्त हुई है। इसके भुगतान की कार्रवाई की जा रही है। शीघ्र ही रसोइयों के खाते में धनराशि पहुंच जाएगी।
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चार माह से मानदेय नहीं मिलने से परिवार का भरण-पोषण करने में आ रही दिक्कत
पडरौना। जिले के सरकारी विद्यालयों में एमडीएम बनाने वाले रसोइयों का मानदेय बीते चार माह से बकाया चल रहा है। इससे उनके सामने परिवार को खर्च चलाना भारी पड़ रहा है। हालत यह है कि एमडीएम का चूल्हा जलाने वाले रसोइयों का चूल्हा बुझने के कगार पर पहुंच गया है।
जनपद में 2,464 परिषदीय, 54 वित्तपोषित जूनियर, 55 माध्यमिक विद्यालय, 26 समाज कल्याण, तीन राजकीय और एक संस्कृत विद्यालय में कक्षा एक से आठवीं तक नामांकित तीन लाख 83 हजार छात्र-छात्राओं के लिए एमडीएम योजना के तहत भोजन बनता है। एमडीएम बनाने के लिए जिले में कुल 7,799 रसोइया तैनात हैं। नए शैक्षिक सत्र के शुरू होने के बाद से अब तक इन रसोइयों को मानदेय नहीं मिला है। हालांकि मई और जून में विद्यालय में ग्रीष्मावकाश होने के चलते एमडीएम का भोजन नहीं बनता है, जिसके चलते रसोइयों का इस माह का मानदेय भी नहीं मिलता है। इस तरह चार माह का मानदेय रसोइयों को नहीं मिला है। इससे उनके सामने परिवार का खर्च वहन करना मुश्किल हो गया है।
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उच्च प्रामिक विद्यालय करहियां मठिया खुर्द के हजारी टोला में तैनात रसोइया संध्या देवी ने बताया कि उन्हें 2 हजार रुपये मानदेय मिलता है। इतने मानदेय में किसी तरह परिवार का खर्च चलाया जाता है, लेकिन सरकार की तरफ से यह मानदेय भी समय से नहीं मिलता है, जिससे परिवार को परेशानी उठानी पड़ती है।
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इसी विद्यालय में तैनात गीता देवी ने कहा कि स्कूल पहुंचने के बाद से बंद होने तक रसोइयों को काम करना पड़ता है। इसके बदले दो हजार रुपये मानदेय मिलता है। इतना कम मानदेय भी समय से नहीं मिलता है, जिससे परिवार का खर्च चलाने में पेरशानी उठानी पड़ती है।
प्राथमिक विद्यालय मठिया खुर्द के अहिर टोला में तैनात मीरा देवी ने कहा कि महंगाई के इस दौर में रसोइयों का दो हजार वेतन होना ऊंट के मुंह में जीरा है। इन पैसों को पाने के लिए बार-बार प्रधानाध्यापक से लेकर विभाग के अधिकारियों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।
इसी विद्यालय पर तैनात सावित्री देवी ने बताया कि इतने मानदेय पर परिवार का खर्चा चलाना काफी मुश्किल हो रहा है। सरकार से मिलने वाले मानदेय को समय से देने के लिए कई बार अधिकारियों से मांग करनी पड़ी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जिले में तैनात रसोइयों को एक माह का मानदेय देने के लिए बजट मिला है। इसे रसोइयों के खाते में भिजवाने की व्यवस्था की जा रही है। शीघ्र ही उनके खाते में मानदेय भेज दिया जाएगा।
जितेंद्र गौतम, जिला समंवयक (एमडीएम)
बीएसए डॉ. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा ने बताया कि जिले के सरकारी विद्यालयों में एमडीएम बनाने के लिए तैनात रसोइयों का अप्रैल से बकाया मानदेय भुगतान के लिए शासन को डिमांड भेजी गई थी। इसमें से अभी एक माह के मानदेय की धनराशि प्राप्त हुई है। इसके भुगतान की कार्रवाई की जा रही है। शीघ्र ही रसोइयों के खाते में धनराशि पहुंच जाएगी।