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Kushinagar News: पुत्रेष्टि यज्ञ की कथा का बताया महात्म्य
Wed, 08 Apr 2026 01:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 08 Apr 2026 01:18 AM IST
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लक्ष्मीगंज। क्षेत्र के दिउलिहा मनियांछापर गांव के मनियांछापर टोला स्थित काली मंदिर परिसर में चल रहे नव दिवसीय शतचंडी महायज्ञ में मंगलवार को कथा वाचक ने पुत्रेष्टि यज्ञ की कथा सुनाई। कथा वाचक ने पुत्रेष्टि यज्ञ की महिमा विस्तार से सुनाई।
कथा वाचक मंशा पांडेय ने कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियां थीं, लेकिन कोई संतान न होने से हमेशा चिंतित रहते थे। गुरु वशिष्ठ के आदेश पर उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ किया। शृंगी ऋषि ने यज्ञ संपन्न कराया। इसके बाद राजा दशरथ के घर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। उन्होंने बताया कि बड़े होने पर विश्वामित्र ने यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से मदद मांगी। उन्होंने मदद के लिए सेना नहीं वल्कि राम लक्ष्मण को अपने साथ ले गए। इस दौरान आयोजक वशिष्ठ पांडेय, आलोक पांडेय, सुरेंद्र यादव, मनोज साहनी, बीरबल साहनी, महेंद्र पांडेय आदि मौजूद रहे। संवाद
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कथा वाचक मंशा पांडेय ने कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियां थीं, लेकिन कोई संतान न होने से हमेशा चिंतित रहते थे। गुरु वशिष्ठ के आदेश पर उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ किया। शृंगी ऋषि ने यज्ञ संपन्न कराया। इसके बाद राजा दशरथ के घर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। उन्होंने बताया कि बड़े होने पर विश्वामित्र ने यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से मदद मांगी। उन्होंने मदद के लिए सेना नहीं वल्कि राम लक्ष्मण को अपने साथ ले गए। इस दौरान आयोजक वशिष्ठ पांडेय, आलोक पांडेय, सुरेंद्र यादव, मनोज साहनी, बीरबल साहनी, महेंद्र पांडेय आदि मौजूद रहे। संवाद
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