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Kushinagar News: जन्म-मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाती है श्रीमद्भागवत कथा
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संतकबीरनगर। शहर के नेदुला में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास मानस जी महाराज ने शुकदेव जी का आगमन, राजा परीक्षित के श्राप का वृत्तांत और भागवत महात्म्य, कपिल चरित्र, देवहूति संवाद की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जन्म मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाती है।
कथा व्यास ने कहा कि भागवत कथा भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। यह कथा जन्म-मृत्यु के भय का नाश कर मोक्ष प्रदान करती है। यह कलियुग में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति को जगाने का सबसे उत्तम साधन है। भागवत कथा मानसिक शांति, सांसारिक दुखों से मुक्ति और भगवान के प्रति दृढ़ प्रेम उत्पन्न करती है।
कथा प्रसंग में उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने गलती से शमीक ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया था, जिसके बाद ऋषि पुत्र श्रृंगी ने उन्हें तक्षक नाग द्वारा काटे जाने का श्राप दिया था। राजा परीक्षित ने संसार से विरक्त होकर गंगा के किनारे शरण ली और आत्मज्ञान की जिज्ञासा की। वेदव्यास के पुत्र शुकदेव जी जो परम ज्ञानी और वैरागी थे, वे परीक्षित को भागवत ज्ञान देने आए।
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शुकदेव ने भागवत कथा के माध्यम से परीक्षित को समझाया कि आत्मा अमर है और परमात्मा हर कण में है, जिससे उनके मन से मृत्यु का डर दूर हो गया।
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कथा व्यास ने कहा कि भागवत कथा भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। यह कथा जन्म-मृत्यु के भय का नाश कर मोक्ष प्रदान करती है। यह कलियुग में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति को जगाने का सबसे उत्तम साधन है। भागवत कथा मानसिक शांति, सांसारिक दुखों से मुक्ति और भगवान के प्रति दृढ़ प्रेम उत्पन्न करती है।
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कथा प्रसंग में उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने गलती से शमीक ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया था, जिसके बाद ऋषि पुत्र श्रृंगी ने उन्हें तक्षक नाग द्वारा काटे जाने का श्राप दिया था। राजा परीक्षित ने संसार से विरक्त होकर गंगा के किनारे शरण ली और आत्मज्ञान की जिज्ञासा की। वेदव्यास के पुत्र शुकदेव जी जो परम ज्ञानी और वैरागी थे, वे परीक्षित को भागवत ज्ञान देने आए।
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शुकदेव ने भागवत कथा के माध्यम से परीक्षित को समझाया कि आत्मा अमर है और परमात्मा हर कण में है, जिससे उनके मन से मृत्यु का डर दूर हो गया।