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Kushinagar News: नारायणी नदी के कटान से लोगों में दहशत, तटबंध के किनारे 50 परिवार सहमे
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अहिरौलिदान के नोनिया पट्टी के समीप कटान करती नदी।
टोला नोनिया पट्टी, खैरखूंटा टोला और कचहरी टोला, एक सप्ताह से नदी कर रही कटान
तरयासुजान। नारायणी (गंडक) नदी के एपी बांध से सटे ग्राम सभा अहिरौलीदान के टोला नोनिया पट्टी, खैरखूंटा टोला और कचहरी टोला में पिछले एक हफ्ते से कटान जारी है। बाढ़ का पानी घटने के बाद नदी की तेज धारा लगातार कटान करते हुए मुख्य एपी बंधे के काफी नजदीक पहुंच चुकी है। इससे बंधे के किनारे बसे लगभग 50 घरों के लोग सहमे हुए हैं।
करीब एक सप्ताह से जारी इस कटान से बंधे के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। सिंचाई विभाग की तरफ से बंधे को बचाने के लिए बड़े-बड़े बोल्डर डालकर बचाव कार्य तो कराया जा रहा है, लेकिन नदी के कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि ग्रामीणों में खौफ बरकरार है। ग्रामीणों का कहना है कि गंडक नदी का जलस्तर घटने के साथ ही कटान और ज्यादा आक्रामक हो गया है। दिन में तो लोग किसी तरह समय बिता लेते हैं, लेकिन रात के समय नदी के जलप्रवाह की आवाज और मिट्टी कटने की आवाज से नींद उड़ जाती है। ग्रामीण अपने बच्चों और जरूरी सामान को समेट कर पूरी रात चौकन्ने रहते हैं, ताकि तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाएं। नोनिया पट्टी टोले में कई मकान बंधे के बिल्कुल मुहाने पर हैं।
खैरखूंटा और कचहरी टोला के लोगों ने आशंका जताई है कि समय रहते बंधे की मजबूती के लिए कोई ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाया गया तो खतरा सकता है। ऐसे में फिर से दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। ग्रामीणों ने तबाही की आशंका को देखते हुए जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों से मौके पर पहुंचकर कटान स्थल का निरीक्षण करने की गुहार लगाई है। मांग है कि बंधे की सुरक्षा के लिए युद्धस्तर पर बोल्डर, बालू की बोरियों और जाल का प्रबंध कर मुहाने पर बसे 50 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की व्यवस्था कराई जाए।
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खेतों में बाढ़ का पानी लगा, किसान चिंतित
तमकुहीरोड। एपी बांध के टूटने के बाद जवही दयाल, चैन पट्टी, गौराहा, सिसवा नाहर, बेदूपार, विरवट कोन्हवलिया, बाक खास, बाघाचौर, फागु छापर, खैरटिया, ततवा टोला, खलवा चैन पट्टी, घघवा जगदीश के साथ मुसहरी टोला, शिव टोला, इमिलिया टोला, देव नारायण टोला, चौकी टोला से पानी उतर चुका है लेकिन खेतों में अब भी पानी भरा हुआ है। इससे फसलों के नुकसान होने की चिंता किसानों को सता रही है। गौराहा के दारा सिंह यादव का कहना है कि बाढ़ से सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो चुकी है। धान व गन्ने की फसल बर्बाद हो गई है। अहिरौलीदान के पप्पू सिंह, चैन पट्टी के शैलेंद्र चौहान, झावनिया टोला के राधा गौड़ ने कहा कि गन्ने की फसल क्षति होने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित करेगी। गांव के राजकुमार मुसहर, शंभू दास, बाबूराम, मोहन साहनी, विक्रम, हीरालाल, रामायण, रामप्रसाद ने कहा कि बाढ़ से गन्ने व धान की फसल बर्बाद हो गई है। किसानों को प्रशासन की तरफ से जल्द राहत दिलाया जाना चाहिए।
बाढ़ प्रभावित गांवों में फसल क्षति का सर्वे पूरा
पडरौना। जिले में गंडक नदी के बाढ़ से तमकुहीराज खड्डा तहसील के कुल 58 गांव प्रभावित हुए। इसमें से 42 ऐसे गांव शामिल हैं, जहां के किसान व लोग बाढ़ व अतिवृष्टि से सीधे प्रभावित हुए हैं। इस बात की पुष्टि सरकारी आंकड़े भी कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन विभाग में दर्ज आंकड़े के मुताबिक बाढ़ से तमकुहीराज तहसील के 25 और खड्डा तहसील के 32 ऐसे गांव सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। वहीं 32 ऐसे गांव रहे, जिनका मुख्य मार्ग से संपर्क टूटा रहा। वहीं इन दोनों तहसीलों के 42 गांवों में जलभराव के कारण आबादी के साथ-साथ फसलें जलमग्न होकर नष्ट हो चुकी हैं। बाढ़ से हुए नुकसान का बीते बुधवार से संबंधित गांवों के लेखपाल सर्वे कार्य शुरू किए थे,जो लगभग पूरा हो चुका है। खड्डा तहसील क्षेत्र के 3346,188 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्रफल में सर्वे का काम पूरा कर लिया गया। बाढ़ से तमकुहीराज में सिर्फ एक मकान क्षतिग्रस्त हुआ है।
वर्जन
कटान की सूचना मिलने के बाद से ही सिंचाई विभाग की टीम लगातार मौके पर डटी हुई है। एपी बंधे को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए बोल्डर और जियो बैग डालकर कटान रोकने का कार्य किया जा रहा है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और बंधे को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
- महेश सिंह, एक्सईएन, बाढ़ खंड कुशीनगर
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तरयासुजान। नारायणी (गंडक) नदी के एपी बांध से सटे ग्राम सभा अहिरौलीदान के टोला नोनिया पट्टी, खैरखूंटा टोला और कचहरी टोला में पिछले एक हफ्ते से कटान जारी है। बाढ़ का पानी घटने के बाद नदी की तेज धारा लगातार कटान करते हुए मुख्य एपी बंधे के काफी नजदीक पहुंच चुकी है। इससे बंधे के किनारे बसे लगभग 50 घरों के लोग सहमे हुए हैं।
करीब एक सप्ताह से जारी इस कटान से बंधे के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। सिंचाई विभाग की तरफ से बंधे को बचाने के लिए बड़े-बड़े बोल्डर डालकर बचाव कार्य तो कराया जा रहा है, लेकिन नदी के कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि ग्रामीणों में खौफ बरकरार है। ग्रामीणों का कहना है कि गंडक नदी का जलस्तर घटने के साथ ही कटान और ज्यादा आक्रामक हो गया है। दिन में तो लोग किसी तरह समय बिता लेते हैं, लेकिन रात के समय नदी के जलप्रवाह की आवाज और मिट्टी कटने की आवाज से नींद उड़ जाती है। ग्रामीण अपने बच्चों और जरूरी सामान को समेट कर पूरी रात चौकन्ने रहते हैं, ताकि तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाएं। नोनिया पट्टी टोले में कई मकान बंधे के बिल्कुल मुहाने पर हैं।
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खैरखूंटा और कचहरी टोला के लोगों ने आशंका जताई है कि समय रहते बंधे की मजबूती के लिए कोई ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाया गया तो खतरा सकता है। ऐसे में फिर से दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। ग्रामीणों ने तबाही की आशंका को देखते हुए जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों से मौके पर पहुंचकर कटान स्थल का निरीक्षण करने की गुहार लगाई है। मांग है कि बंधे की सुरक्षा के लिए युद्धस्तर पर बोल्डर, बालू की बोरियों और जाल का प्रबंध कर मुहाने पर बसे 50 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की व्यवस्था कराई जाए।
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खेतों में बाढ़ का पानी लगा, किसान चिंतित
तमकुहीरोड। एपी बांध के टूटने के बाद जवही दयाल, चैन पट्टी, गौराहा, सिसवा नाहर, बेदूपार, विरवट कोन्हवलिया, बाक खास, बाघाचौर, फागु छापर, खैरटिया, ततवा टोला, खलवा चैन पट्टी, घघवा जगदीश के साथ मुसहरी टोला, शिव टोला, इमिलिया टोला, देव नारायण टोला, चौकी टोला से पानी उतर चुका है लेकिन खेतों में अब भी पानी भरा हुआ है। इससे फसलों के नुकसान होने की चिंता किसानों को सता रही है। गौराहा के दारा सिंह यादव का कहना है कि बाढ़ से सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो चुकी है। धान व गन्ने की फसल बर्बाद हो गई है। अहिरौलीदान के पप्पू सिंह, चैन पट्टी के शैलेंद्र चौहान, झावनिया टोला के राधा गौड़ ने कहा कि गन्ने की फसल क्षति होने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित करेगी। गांव के राजकुमार मुसहर, शंभू दास, बाबूराम, मोहन साहनी, विक्रम, हीरालाल, रामायण, रामप्रसाद ने कहा कि बाढ़ से गन्ने व धान की फसल बर्बाद हो गई है। किसानों को प्रशासन की तरफ से जल्द राहत दिलाया जाना चाहिए।
बाढ़ प्रभावित गांवों में फसल क्षति का सर्वे पूरा
पडरौना। जिले में गंडक नदी के बाढ़ से तमकुहीराज खड्डा तहसील के कुल 58 गांव प्रभावित हुए। इसमें से 42 ऐसे गांव शामिल हैं, जहां के किसान व लोग बाढ़ व अतिवृष्टि से सीधे प्रभावित हुए हैं। इस बात की पुष्टि सरकारी आंकड़े भी कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन विभाग में दर्ज आंकड़े के मुताबिक बाढ़ से तमकुहीराज तहसील के 25 और खड्डा तहसील के 32 ऐसे गांव सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। वहीं 32 ऐसे गांव रहे, जिनका मुख्य मार्ग से संपर्क टूटा रहा। वहीं इन दोनों तहसीलों के 42 गांवों में जलभराव के कारण आबादी के साथ-साथ फसलें जलमग्न होकर नष्ट हो चुकी हैं। बाढ़ से हुए नुकसान का बीते बुधवार से संबंधित गांवों के लेखपाल सर्वे कार्य शुरू किए थे,जो लगभग पूरा हो चुका है। खड्डा तहसील क्षेत्र के 3346,188 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्रफल में सर्वे का काम पूरा कर लिया गया। बाढ़ से तमकुहीराज में सिर्फ एक मकान क्षतिग्रस्त हुआ है।
वर्जन
कटान की सूचना मिलने के बाद से ही सिंचाई विभाग की टीम लगातार मौके पर डटी हुई है। एपी बंधे को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए बोल्डर और जियो बैग डालकर कटान रोकने का कार्य किया जा रहा है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और बंधे को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
- महेश सिंह, एक्सईएन, बाढ़ खंड कुशीनगर