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पडरौना शहर में वर्ष 1957 से संचालित होता है पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय

Thu, 12 Aug 2021 10:12 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 12 Aug 2021 10:12 PM IST
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The hospital is full of bushes, not even the boundary wall
पडरौना नगर के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय की ओपीडी के बगल में उगी झाड़ियां।संवाद। - फोटो : KUSHINAGAR
झाड़ियों से पटा है अस्पताल, बाउंड्रीवाल भी नहीं
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अस्पताल के बगल से गुजर रहे नाले की सफाई नहीं होने से परेशानी
बाउंड्रीवाल नहीं होने से चोरी की रहती है आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। वर्ष 1957 से ही पडरौना शहर में संचालित पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय की हालत कई मायनों में दयनीय है। इस अस्पताल के दो तरफ से तो बाउंड्रीवाल ही नहीं है। इसकी वजह से चोरी होने और असामाजिक तत्वों के आने-जाने का अंदेशा लगा रहता है। उस तरफ झाड़ियां भी उगी हुई हैं। यही हाल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के आवास का भी है। झाड़ियों और गंदगी की वजह से सांप, बिच्छू जैसे खतरनाक कीड़े-मकौड़ों के दाखिल होने का डर बना रहता है। पडरौना शहर में 30 बेड के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय के अलावा बगल में दस बेड का राजकीय महिला अस्पताल भी है। इन दोनों अस्पतालों की स्थापना वर्ष 1957 में हुई थी। तभी से संचालित किए जा रहे हैं। पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में सृजित पदों के सापेक्ष पांच चिकित्सक उपलब्ध होने की वजह से मरीजों की संख्या ठीक-ठाक रहती है। इसी तरह राजकीय महिला अस्पताल में भी दो महिला डॉक्टर उपलब्ध हैं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक अकेले पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में औसतन हर दिन 250 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इन दोनों अस्पतालों पर शहर की लगभग 70 हजार आबादी के इलाज का जिम्मा है। तीसरा सरकारी अस्पताल शहर के गायत्रीनगर मोहल्ले में नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नाम से संचालित होता है। यहां के लिए भी एक डॉक्टर तैनात हैं। इस तरह शहर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के बावजूद पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से कई समस्याओं का सामना लोगों को करना पड़ता है। इसके अलावा अस्पताल ओपीडी और डॉक्टरों के आवास के पीछे काफी तादाद में झाड़ियां उगी हैं। अस्पताल के पीछे ही बड़ा नाला है, जिसकी समय पर सफाई नहीं हो पाती। इस वजह से दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल नहीं होने से मरीजों और उनके साथ आए लोगों को समस्या का सामना करना पड़ता है। इस बाबत पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय पडरौना के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि अस्पताल से सटे ही रेलवे की जमीन है। बाउंड्रीवाल चलवाने पर रेलवे की तरफ से आपत्ति की जाती है, इसलिए बाउंड्रीवाल नहीं बन पा रही है। यह ज्यादातर झाड़ियां भी रेलवे की जमीन में ही उगी हैं। इस वजह से उसकी सफाई नहीं हो पाती। नाले की सफाई के लिए नगरपालिका प्रशासन को समय-समय पर अवगत कराया जाता है।
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