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Kushinagar News: अस्पताल संचालक पर प्राथमिकी के बाद हुआ अंतिम संस्कार
Thu, 12 Mar 2026 03:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 12 Mar 2026 03:03 AM IST
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खड्डा (कुशीनगर)। प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की मौत के मामले में संचालक के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज हो जाने के बाद बुधवार सुबह पनियहवा घाट पर नीतू का अंतिम संस्कार कर दिया गया। नारायणी नदी के पनियहवा घाट पर कांपते हाथों से पति दीनदयाल ने अंतिम संस्कार किया। घर में बेटी की शादी के दिन हुई इस हृदय विदारक घटना के बाद घर पर सन्नाटा है। पूरे परिवार को साथ लेकर चलने वाली नीतू की मौत ने पूरे परिवार को अंदर से तोड़ दिया है। दीनदयाल का कहना है कि अस्पताल संचालक के खिलाफ हत्या का मुकदमा चले और हमेशा के लिए मौत का धंधा बंद किया जाए, ताकि किसी और को असमय मरना न पड़े।
ग्राम मठिया बुजुर्ग निवासी दीनदयाल यादव की शादी लगभग दो वर्ष पूर्व कौआसार गांव की नीतू से हुई थी। अपने माता पिता के इकलौते पुत्र दीनदयाल की दो बहनें हैं। खेती किसानी व मवेशी पालन करके जीवन यापन करने वाले दीनदयाल की बहन की जटहा थाना क्षेत्र से बरात आई थी।
घर पर मौजूद छोटी बहन सुनयना बताती हैं कि भाभी का पहला बच्चा होने वाला था। दीदी की बरात दरवाजे पर आई थी। भाभी काफी खुश थीं। अचानक उनके पेट में दर्द हुआ और खड्डा ले जाया गया। वहां से मेडिकल कॉलेज जाने की सलाह दी गई। इसी बीच किसी रिश्तेदार ने कोटवा ले जाने की सलाह दी और उन्हें कोटवा ले जाया गया। मां की तरह ख्याल करने वाली भाभी की अस्पताल संचालक की गलती से मौत हो गई। घर पर मौजूद रिश्तेदारों के सहयोग से दीदी की शादी संपन्न हुई और उसे रिश्तेदार के यहां भेज दिया गया। वहां से विदाई कर दी गई।
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इनसर्ट
चार साल पहले ऑपरेशन के बाद सास की हुई थी मौत
लगभग चार वर्ष पहले दीनदयाल की मां यानी नीतू की सास शुभावती देवी का भी कोटवा के किसी अस्पताल में ऑपरेशन हुआ था। बाद में उनकी मौत हो गई थी। घर वाले बताते हैं कि शुभावती देवी की तबीयत खराब होने पर कोटवा ले जाया गया था। वहां बच्चेदानी का ऑपरेशन हुआ था। गलत तरीके से ऑपरेशन होने से अंदर घाव बन गया और कुछ माह बाद शुभावती की मृत्यु हो गई थी। अब पुनः कोटवा के ही एक अस्पताल में बहू नीतू की मौत से वह मंजर फिर आंखों के सामने घूम रहा है।
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ग्राम मठिया बुजुर्ग निवासी दीनदयाल यादव की शादी लगभग दो वर्ष पूर्व कौआसार गांव की नीतू से हुई थी। अपने माता पिता के इकलौते पुत्र दीनदयाल की दो बहनें हैं। खेती किसानी व मवेशी पालन करके जीवन यापन करने वाले दीनदयाल की बहन की जटहा थाना क्षेत्र से बरात आई थी।
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घर पर मौजूद छोटी बहन सुनयना बताती हैं कि भाभी का पहला बच्चा होने वाला था। दीदी की बरात दरवाजे पर आई थी। भाभी काफी खुश थीं। अचानक उनके पेट में दर्द हुआ और खड्डा ले जाया गया। वहां से मेडिकल कॉलेज जाने की सलाह दी गई। इसी बीच किसी रिश्तेदार ने कोटवा ले जाने की सलाह दी और उन्हें कोटवा ले जाया गया। मां की तरह ख्याल करने वाली भाभी की अस्पताल संचालक की गलती से मौत हो गई। घर पर मौजूद रिश्तेदारों के सहयोग से दीदी की शादी संपन्न हुई और उसे रिश्तेदार के यहां भेज दिया गया। वहां से विदाई कर दी गई।
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चार साल पहले ऑपरेशन के बाद सास की हुई थी मौत
लगभग चार वर्ष पहले दीनदयाल की मां यानी नीतू की सास शुभावती देवी का भी कोटवा के किसी अस्पताल में ऑपरेशन हुआ था। बाद में उनकी मौत हो गई थी। घर वाले बताते हैं कि शुभावती देवी की तबीयत खराब होने पर कोटवा ले जाया गया था। वहां बच्चेदानी का ऑपरेशन हुआ था। गलत तरीके से ऑपरेशन होने से अंदर घाव बन गया और कुछ माह बाद शुभावती की मृत्यु हो गई थी। अब पुनः कोटवा के ही एक अस्पताल में बहू नीतू की मौत से वह मंजर फिर आंखों के सामने घूम रहा है।