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Kushinagar News: मंच पर जीवंत होंगे लोक परंपराओं के विविध रंग
Wed, 01 Apr 2026 02:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 01 Apr 2026 02:50 AM IST
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कुशीनगर। जोगिया जनूबी पट्टी की धरती एक बार फिर लोकजीवन जीवंत होगा। फाजिलनगर क्षेत्र में 11 और 12 अप्रैल को ‘लोकरंग-2026’ का 19वां वार्षिक उत्सव आयोजित होगा। जनसंस्कृति के संवर्द्धन और फूहड़ता के विरुद्ध सशक्त सांस्कृतिक हस्तक्षेप के रूप में स्थापित यह आयोजन अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है।
दो दिवसीय उत्सव का शुभारंभ 11 अप्रैल की रात 8:30 बजे प्रारंभिक संबोधन और स्मारिका लोकार्पण के साथ होगा। पहली रात लोक परंपराओं के विविध रंग मंच पर जीवंत होंगे। ग्रामीण अंचल की महिलाओं द्वारा रोपनी-सोहनी गीतों की प्रस्तुति लोक जीवन की सादगी और संवेदना को उकेरेगी। बनारस के दुर्गेश उपाध्याय भोजपुरी गायकी के जरिए दर्शकों को लोकधुनों से जोड़ेंगे। बुंदेलखंड और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा भी मंच पर दिखाई देगी। ललितपुर के कलाकार सैरा और राई नृत्य प्रस्तुत करेंगे, जबकि रायगढ़ की कहानीबाज थिएटर सोसायटी सुआ, करमा, ददरिया और पंथी नृत्यों के माध्यम से जनजीवन की लय को अभिव्यक्त करेगी।
पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। अगरतला की खुम्पुई कल्चरल अकादमी ‘होजागिरि’ नृत्य प्रस्तुत करेगी। पहली रात का समापन पंचतंत्र की कथा ‘हंस और हंसिनी’ पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ‘उल्लू पंचायत’ से होगा, जो व्यंग्य और संदेश का प्रभावी समन्वय पेश करेगी।
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दो दिवसीय उत्सव का शुभारंभ 11 अप्रैल की रात 8:30 बजे प्रारंभिक संबोधन और स्मारिका लोकार्पण के साथ होगा। पहली रात लोक परंपराओं के विविध रंग मंच पर जीवंत होंगे। ग्रामीण अंचल की महिलाओं द्वारा रोपनी-सोहनी गीतों की प्रस्तुति लोक जीवन की सादगी और संवेदना को उकेरेगी। बनारस के दुर्गेश उपाध्याय भोजपुरी गायकी के जरिए दर्शकों को लोकधुनों से जोड़ेंगे। बुंदेलखंड और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा भी मंच पर दिखाई देगी। ललितपुर के कलाकार सैरा और राई नृत्य प्रस्तुत करेंगे, जबकि रायगढ़ की कहानीबाज थिएटर सोसायटी सुआ, करमा, ददरिया और पंथी नृत्यों के माध्यम से जनजीवन की लय को अभिव्यक्त करेगी।
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पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। अगरतला की खुम्पुई कल्चरल अकादमी ‘होजागिरि’ नृत्य प्रस्तुत करेगी। पहली रात का समापन पंचतंत्र की कथा ‘हंस और हंसिनी’ पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ‘उल्लू पंचायत’ से होगा, जो व्यंग्य और संदेश का प्रभावी समन्वय पेश करेगी।
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