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बढ़ते प्रदूषण को हवा दे रही अव्यवस्था
कुशीनगर/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 May 2017 11:17 PM IST
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नहर पर फैला कचरा।
- फोटो : अमर उजाला
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कचरा निस्तारण को लेकर न तो जिला प्रशासन गंभीर दिख रहा है और न ही नगरपालिका प्रशासन। यही स्थिति पॉलीथिन की है। पॉलीथिन के उपयोग पर बैन लगने के बाद भी इसका उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। नतीजा यह है कि पडरौना नगर में मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की एक पटरी पूरी तरह कचरे से भरी पड़ी है। इस नहर के बगल में रहने वाले तिलकनगर मुहल्ले के वाशिंदों को धूल, दुर्गंध और कचरे के चलते अपने घरों में रहना दूभर हो गया है।
कूड़े-कचरे के प्रबंधन में लापरवाही और पॉलीथिन के अंधाधुंध प्रयोग की वजह से वातावरण दूषित होता जा रहा है। जनपद मुख्यालय होने के बावजूद पडरौना शहर में कूड़ा निस्तारण का कोई ठोस प्रबंध नहीं किया गया है। आलम यह है कि पडरौना नगर स़े होकर गुजरने वाली मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी पर ही पूरे शहर का कूड़ा-कचरा, पॉलिथीन आदि गिराया जाता है। इस वजह से न केवल नहर के सर्विस रोड से गुजरना मुश्किल होता है, बल्कि नहर से सटे मुहल्लों के लोगों का अपने घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। तेज हवा चलने पर कूड़े-कचरे और धूल उनके घरों में भर जाता है और बारिश होती है तो दुर्गंध से दम घुटने लगता है।
वर्षों से नगरपालिका प्रशासन की तरफ से हर दिन कूड़े-कचरे का ढेर नहर की पटरी पर गिराया जाता है, लेकिन इसके निस्तारण का प्रबंध किसी ने नहीं किया। जिला प्रशासन भी इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं देता है।
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दो वर्ष पूर्व पॉलीथिन के उपयोग पर लगी रोक का भी इस जिले में कोई असर नहीं है। फुटपाथ की दुकानें हों या शोरूम, सभी प्रतिष्ठानों में पॉलीथिन का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है, लेकिन उस आदेश का पालन कराने में किसी जिम्मेदार की रुचि नहीं दिखती। न ही प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कहीं भी होर्डिंग, बैनर अथवा पोस्टर ही चस्पा किया गया है।
इस संबंध में नगर पालिका परिषद की चेयरमैन शिवकुमारी देवी का कहना है कि कचरा निस्तारण के लिए गैरउपयोगी, सीलिंग या बंजर जमीन की जरूरत है, जहां इसका निस्तारण किया जा सके। इसके लिए डीएम को दो-तीन बार पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। पॉलीथिन का उपयोग बंद करने के लिए पूर्व में नगरपालिका प्रशासन की ओर से बैठक और अन्य माध्यमों से लोगों से गुजारिश की गई थी, जिसमें थोड़ी सफलता मिली। इन दोनों बिंदुुओं पर प्रयास अब भी जारी है। फिलहाल खाली पड़ी गड्ढायुक्त जमीन और शहर के बाहरी इलाके में कूड़ा-कचरा गिराया जा रहा है।
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कूड़े-कचरे के प्रबंधन में लापरवाही और पॉलीथिन के अंधाधुंध प्रयोग की वजह से वातावरण दूषित होता जा रहा है। जनपद मुख्यालय होने के बावजूद पडरौना शहर में कूड़ा निस्तारण का कोई ठोस प्रबंध नहीं किया गया है। आलम यह है कि पडरौना नगर स़े होकर गुजरने वाली मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी पर ही पूरे शहर का कूड़ा-कचरा, पॉलिथीन आदि गिराया जाता है। इस वजह से न केवल नहर के सर्विस रोड से गुजरना मुश्किल होता है, बल्कि नहर से सटे मुहल्लों के लोगों का अपने घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। तेज हवा चलने पर कूड़े-कचरे और धूल उनके घरों में भर जाता है और बारिश होती है तो दुर्गंध से दम घुटने लगता है।
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वर्षों से नगरपालिका प्रशासन की तरफ से हर दिन कूड़े-कचरे का ढेर नहर की पटरी पर गिराया जाता है, लेकिन इसके निस्तारण का प्रबंध किसी ने नहीं किया। जिला प्रशासन भी इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं देता है।
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दो वर्ष पूर्व पॉलीथिन के उपयोग पर लगी रोक का भी इस जिले में कोई असर नहीं है। फुटपाथ की दुकानें हों या शोरूम, सभी प्रतिष्ठानों में पॉलीथिन का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है, लेकिन उस आदेश का पालन कराने में किसी जिम्मेदार की रुचि नहीं दिखती। न ही प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कहीं भी होर्डिंग, बैनर अथवा पोस्टर ही चस्पा किया गया है।
इस संबंध में नगर पालिका परिषद की चेयरमैन शिवकुमारी देवी का कहना है कि कचरा निस्तारण के लिए गैरउपयोगी, सीलिंग या बंजर जमीन की जरूरत है, जहां इसका निस्तारण किया जा सके। इसके लिए डीएम को दो-तीन बार पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। पॉलीथिन का उपयोग बंद करने के लिए पूर्व में नगरपालिका प्रशासन की ओर से बैठक और अन्य माध्यमों से लोगों से गुजारिश की गई थी, जिसमें थोड़ी सफलता मिली। इन दोनों बिंदुुओं पर प्रयास अब भी जारी है। फिलहाल खाली पड़ी गड्ढायुक्त जमीन और शहर के बाहरी इलाके में कूड़ा-कचरा गिराया जा रहा है।