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अस्पताल की छत गिरने से बालक की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला कुशीनगर
Updated Thu, 14 Jul 2016 11:39 PM IST
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अस्पताल की छत ।
- फोटो : अमर उजाला
मंसाछापर बाजार स्थित विशुनपुरा ब्लॉक के पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के जर्जर भवन की छत गिरने से दबकर एक बालक की मौत हो गई। बृहस्पतिवार की शाम को हुए इस हादसे से बाजार में मातम छा गया। मौके पर पहुंचे लेखपाल और कानूनगो ने अपनी रिपोर्ट तैयार की।
जटहा बाजार थाना क्षेत्र के मांसाछापर बाजार स्थित विशुनपुरा ब्लाक कार्यालय के पीछे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की पुरानी बिल्डिंग है। पांच वर्ष पूर्व सीएचसी का नया भवन बन जाने के बाद अस्पताल वहां शिफ्ट हो चुका है। बेकार पड़े भवन से लोग ईंट व अन्य सामान तोडक़र ले जाते हैं। बृहस्पतिवार की शाम करीब चार बजे मंसाछापर निवासी फेंकू वर्मा के दो लड़के पुजारी (15) और रोहित (13) समेत कई लड़के इस पुरानी बिल्डिंग के बगल में बकरी चरा रहे थे। इसी बीच जर्जर बिल्डिंग की छत का कुछ हिस्सा अचानक टूटकर गिर गया। वहां मौजूद रोहित मलबे में दब गया। पुजारी समेत अन्य बच्चों ने शोर मचाया तो लोग जुटे और रोहित को मलबे से बाहर निकाला गया लेकिन गंभीर चोट लगने की वजह से उसकी मौत हो गई थी। लोग रोहित को सीएचसी लेकर गए जहां डॉक्टर संतोष कुमार ने उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे की जानकारी मिलने पर शाम को लेखपाल व कानूनगो भी मौके पर पहुंचे थे। हादसे से गांव में मातम छा गया है।
इस संबंध में एसओ का कहना है की मामले की जानकारी हैए आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।
जर्जर भवन को गिराने के लिए भेजा जा चुका है पत्र
मंसाछापर स्थित पुराने पीएचसी भवन को जर्जर मानते हुए गिराने के लिए पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन अफसरों की गैर जिम्मेदारी की वजह से बात आगे नहीं बढ़ी। यहां तक कि पूर्व में हो चुके एक हादसा से भी सबक नहीं लिया गया। इसी का नतीजा रहा कि बृहस्पतिवार को हादसे की पुनरावृत्ति में एक बच्चे की जान चली गई।
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मंसाछापर बाजार में वर्ष 2011-12 में सीएचसी के लिए नए भवन का निर्माण हो गया। यहां की पुरानी पीएचसी को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद से ही इस बिल्डिंग की दुर्दशा शुरू हो गई। भवन में न तो कोई काम हो रहा था न ही उसकी देखभाल के लिए कोई कर्मचारी नियुक्त है। इस लावारिश बिल्डिंग को कुछ ही महीनों में लोगों ने जर्जर बना दिया। कीमती फाटक, खिड़की ऊंखाड़ने के बाद लोग ईंट भी तोड़कर ले जाने लगे। कुछ लोगों ने परिसर की खाली जमीन पर भी कब्जा करना शुरू कर दिया। परंतु स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने इसकी सुधि नहीं ली। आम लोगों ने भी सीएमओ और डीएम को पत्र भेजकर सरकारी बिल्डिंग को बचाने की मांग की। इस बीच छत का कुछ हिस्सा गिरने से एक बच्चे का पैर टूट गया। इसके बाद फिल्डिंग को जर्जर मानते हुए ध्वस्त करने के लिए सीएमओ कार्यालय को पत्र भेजा गया। परंतु वरिष्ठ अफसरों ने कभी इस पर गौर करना भी मुनासिब नहीं समझा। नतीजतन बृहस्पतिवार को फिर हादसा हो गया।
इस संबंध में सीएचसी प्रभारी डॉक्टर संतोष का कहना है कि पुरानी पीएचसी भवन व नए सीएचसी भवन के बगल में स्थित एक जर्जर भवन को गिराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया था, परंतु अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। फिर पत्र भेजकर बिल्डिंग को गिराने का अनुरोध किया जाएगा।
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जटहा बाजार थाना क्षेत्र के मांसाछापर बाजार स्थित विशुनपुरा ब्लाक कार्यालय के पीछे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की पुरानी बिल्डिंग है। पांच वर्ष पूर्व सीएचसी का नया भवन बन जाने के बाद अस्पताल वहां शिफ्ट हो चुका है। बेकार पड़े भवन से लोग ईंट व अन्य सामान तोडक़र ले जाते हैं। बृहस्पतिवार की शाम करीब चार बजे मंसाछापर निवासी फेंकू वर्मा के दो लड़के पुजारी (15) और रोहित (13) समेत कई लड़के इस पुरानी बिल्डिंग के बगल में बकरी चरा रहे थे। इसी बीच जर्जर बिल्डिंग की छत का कुछ हिस्सा अचानक टूटकर गिर गया। वहां मौजूद रोहित मलबे में दब गया। पुजारी समेत अन्य बच्चों ने शोर मचाया तो लोग जुटे और रोहित को मलबे से बाहर निकाला गया लेकिन गंभीर चोट लगने की वजह से उसकी मौत हो गई थी। लोग रोहित को सीएचसी लेकर गए जहां डॉक्टर संतोष कुमार ने उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे की जानकारी मिलने पर शाम को लेखपाल व कानूनगो भी मौके पर पहुंचे थे। हादसे से गांव में मातम छा गया है।
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इस संबंध में एसओ का कहना है की मामले की जानकारी हैए आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।
जर्जर भवन को गिराने के लिए भेजा जा चुका है पत्र
मंसाछापर स्थित पुराने पीएचसी भवन को जर्जर मानते हुए गिराने के लिए पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन अफसरों की गैर जिम्मेदारी की वजह से बात आगे नहीं बढ़ी। यहां तक कि पूर्व में हो चुके एक हादसा से भी सबक नहीं लिया गया। इसी का नतीजा रहा कि बृहस्पतिवार को हादसे की पुनरावृत्ति में एक बच्चे की जान चली गई।
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मंसाछापर बाजार में वर्ष 2011-12 में सीएचसी के लिए नए भवन का निर्माण हो गया। यहां की पुरानी पीएचसी को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद से ही इस बिल्डिंग की दुर्दशा शुरू हो गई। भवन में न तो कोई काम हो रहा था न ही उसकी देखभाल के लिए कोई कर्मचारी नियुक्त है। इस लावारिश बिल्डिंग को कुछ ही महीनों में लोगों ने जर्जर बना दिया। कीमती फाटक, खिड़की ऊंखाड़ने के बाद लोग ईंट भी तोड़कर ले जाने लगे। कुछ लोगों ने परिसर की खाली जमीन पर भी कब्जा करना शुरू कर दिया। परंतु स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने इसकी सुधि नहीं ली। आम लोगों ने भी सीएमओ और डीएम को पत्र भेजकर सरकारी बिल्डिंग को बचाने की मांग की। इस बीच छत का कुछ हिस्सा गिरने से एक बच्चे का पैर टूट गया। इसके बाद फिल्डिंग को जर्जर मानते हुए ध्वस्त करने के लिए सीएमओ कार्यालय को पत्र भेजा गया। परंतु वरिष्ठ अफसरों ने कभी इस पर गौर करना भी मुनासिब नहीं समझा। नतीजतन बृहस्पतिवार को फिर हादसा हो गया।
इस संबंध में सीएचसी प्रभारी डॉक्टर संतोष का कहना है कि पुरानी पीएचसी भवन व नए सीएचसी भवन के बगल में स्थित एक जर्जर भवन को गिराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया था, परंतु अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। फिर पत्र भेजकर बिल्डिंग को गिराने का अनुरोध किया जाएगा।