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करमहा मठ के महंत की गद्दी को लेकर विवाद गहराया
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Sun, 24 Dec 2017 11:37 PM IST
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दोनों पक्षों को समझाती पुलिस।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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हाटा। कुश्ाीनगर के करमहा मठ के महंत की गद्दी को लेकर चल रहा विवाद रविवार को और गरमा गया। गद्दी के दोनों दावेदार अपनेसमर्थकों के साथ आमने-सामने हो गए। एक पक्ष द्वारा कराए जा रहे यज्ञ पूर्णाहुति को दूसरे महंत ने जब रोकने की कोशिश की तो वहां प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया और किसी तरह माहौल को शांत कराया। पुलिस फोर्स की मौजूदगी में पूर्णाहुति व भंडारे का आयोजन संपन्न हुआ। मामले को अगले रविवार तक टाल दिया गया है।
वर्ष 1992 में तत्कालीन महंत की हत्या के बाद से ही यहां गद्दी को लेकर विवाद चल रहा है। करमहा मठ के एक पक्षकार विवेक नाथ की देख रेख में करीब एक सप्ताह मंदिर परिसर में यज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा था। रविवार को यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ भंडारे का आयोजन था। इसी बीच दूसरे पक्षकार राजेश नाथ भी वहां पहुंच गए। उनके साथ आसपास गांव के बड़ी संख्या में समर्थक भी थे। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय से उनके पक्ष में स्थगन आदेश है।
लिहाजा विवेक नाथ महंत के तौर पर कोई आयोजन नहीं कर सकते हैं, जबकि दूसरे पक्षकार विवेक नाथ का भी कहना है कि न्यायालय ने उनके पक्ष के स्थगन आदेश दे रखा है।
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इस मामले की जानकारी होने पर अफसरों ने हाटा समेत कई थाने की फोर्स मौके पर भेज दी। पूरा परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। इसके बाद तहसीलदार हाटा संजय राय और सीओ कसया ओमपाल सिंह ने मौके पर पहुंच कर मोर्चा संभाल लिया।
तहसीलदार ने दोनों पक्षों से बात कर अगले रविवार को सुनवाई की तिथि तय की। इसके बाद किसी तरह माहौल तो शांत हो गया लेकिन तनाव को देखते हुए पुलिस कर्मियों को अभी भी तैनात रखा गया है। पुलिस फोर्स की मौजूदगी में पूर्णाहुति व भंडारे का आयोजन संपन्न हुआ।
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करीब 200 एकड़ जमीन है इस मठ के पास
हाटा। करमहा मठ के गद्दी का विवाद केवल मंदिर में पूजा पाठ के अधिकार को लेकर नहीं है। इसके विवाद के पीछे मंदिर की संपत्ति भी अहम वजह है। मुख्य मठ करमहा के साथ बंचरा और मंगरूआ को मिलाकर करीब 200 एकड़ जमीन इस मठ के नाम है। मठ के महंथ ही इस पूरे संपत्ती के मालिक होंगे। यही कारण है कि यह मामला इतना बड़ा बना हुआ है।
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वर्ष 1992 में तत्कालीन महंत की हत्या के बाद से ही यहां गद्दी को लेकर विवाद चल रहा है। करमहा मठ के एक पक्षकार विवेक नाथ की देख रेख में करीब एक सप्ताह मंदिर परिसर में यज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा था। रविवार को यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ भंडारे का आयोजन था। इसी बीच दूसरे पक्षकार राजेश नाथ भी वहां पहुंच गए। उनके साथ आसपास गांव के बड़ी संख्या में समर्थक भी थे। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय से उनके पक्ष में स्थगन आदेश है।
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लिहाजा विवेक नाथ महंत के तौर पर कोई आयोजन नहीं कर सकते हैं, जबकि दूसरे पक्षकार विवेक नाथ का भी कहना है कि न्यायालय ने उनके पक्ष के स्थगन आदेश दे रखा है।
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इस मामले की जानकारी होने पर अफसरों ने हाटा समेत कई थाने की फोर्स मौके पर भेज दी। पूरा परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। इसके बाद तहसीलदार हाटा संजय राय और सीओ कसया ओमपाल सिंह ने मौके पर पहुंच कर मोर्चा संभाल लिया।
तहसीलदार ने दोनों पक्षों से बात कर अगले रविवार को सुनवाई की तिथि तय की। इसके बाद किसी तरह माहौल तो शांत हो गया लेकिन तनाव को देखते हुए पुलिस कर्मियों को अभी भी तैनात रखा गया है। पुलिस फोर्स की मौजूदगी में पूर्णाहुति व भंडारे का आयोजन संपन्न हुआ।
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करीब 200 एकड़ जमीन है इस मठ के पास
हाटा। करमहा मठ के गद्दी का विवाद केवल मंदिर में पूजा पाठ के अधिकार को लेकर नहीं है। इसके विवाद के पीछे मंदिर की संपत्ति भी अहम वजह है। मुख्य मठ करमहा के साथ बंचरा और मंगरूआ को मिलाकर करीब 200 एकड़ जमीन इस मठ के नाम है। मठ के महंथ ही इस पूरे संपत्ती के मालिक होंगे। यही कारण है कि यह मामला इतना बड़ा बना हुआ है।