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Kushinagar News: जाति प्रमाण पत्र बनाने में लापरवाही मामले की अब दोबारा होगी जांच
Sun, 23 Nov 2025 12:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 23 Nov 2025 12:56 AM IST
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कुशीनगर। कसया तहसील के तीन लेखपालों पर जाति प्रमाण पत्र बनाने में लापरवाही करने पर कोर्ट के आदेश पर कसया पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। कसया पुलिस की ओर से सुलह के लिए बढ़ते दबाव को देखते हुए पीड़ित ने तत्कालीन एसपी से शिकायत की। इसके बाद विवेचना खड्डा के तत्कालीन सीओ उमेश चंद भट्ट के पास चला गया।
15 महीने तक उमेश चंद भट्ट उच्चाधिकारियों को गुमराह करने वाली रिपोर्ट देते रहे। विवेचना में फाइनल रिपोर्ट लगाकर एसपी कार्यालय में भेजे थे। एएसपी की जांच में पता चला कि विवेचना में लीपापोती हुई है। इसके बाद एसपी कार्यालय से 22 अगस्त को एसपी ने पत्र जारी कर दोबारा विवेचना का आदेश दिया। इसके बाद तत्कालीन सीओ का स्थानांतरण हो गया और मामले की जांच अब खड्डा के सीओ वीरेंद्र सिंह ने शुरू किया है।
कुशीनगर नगर पालिका के वार्ड नंबर 21 बुद्ध नगरी निवासी प्रियेश गोड़ अपनी बहन संध्या गोड़ और प्रियंका गोड़ का जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 28 अक्तूबर 2023 को ऑनलाइन आवेदन कसया तहसील में किया था। आवेदन को लेखपालों ने गलत बताते हुए निरस्त कर दिया। तत्कालीन डीएम उमेश मिश्रा से शिकायत के बाद लेखपालों ने आनन-फानन में लेखपालों ने दोबारा खुद संध्या और प्रियंका का आवेदन कर जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिए।
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जाति प्रमाण पत्र जारी करने में नाम पते में गड़बड़ी की गई। शिकायत और लेखपालों की ओर से की गई गलतियों का साक्ष्य लेकर प्रियेश गोड़ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने लेखपाल निलेश रंजन राव, शैलेश दुबे, श्रीनिवास सिंह पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करने का आदेश दिया। कसया पुलिस ने 17 अगस्त 2024 को प्राथमिक दर्ज कर विवेचना शुरू किया। तत्कालीन एसपी संतोष मिश्रा से पीड़ित मिलकर कसया सीओ पर निष्पक्ष विवेचना नहीं करने और सुलह के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया।
इसके बाद एसपी ने खड्डा के तत्कालीन सीओ उमेश चंद भट्ट को दो सितंबर 2024 के पास विवेचना स्थानांतरण कर दिया। तभी से सीओ विवेचना कर रहे थे, वादी का बिना बयान दर्ज किए फाइनल रिपोर्ट लगाकर एसपी कार्यालय को भेजा। एएसपी की जांच में वादी का बयान नहीं लेने की पुष्टि हुई। इसके बाद एसपी कार्यालय से खड्डा सीओ को 22 अगस्त 2025 को पत्र जारी कर वादी का बयान दर्ज करने और जाति प्रमाण पत्र पर दिए गए मोबाइल नंबर को सीडीआर साक्ष्य के तौर पर दर्ज करने का निर्देश दिया गया। प्रियेश गोड़ ने एडीजी, डीआईजी से विवेचना में सुस्ती की शिकायत की थी।
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15 महीने तक उमेश चंद भट्ट उच्चाधिकारियों को गुमराह करने वाली रिपोर्ट देते रहे। विवेचना में फाइनल रिपोर्ट लगाकर एसपी कार्यालय में भेजे थे। एएसपी की जांच में पता चला कि विवेचना में लीपापोती हुई है। इसके बाद एसपी कार्यालय से 22 अगस्त को एसपी ने पत्र जारी कर दोबारा विवेचना का आदेश दिया। इसके बाद तत्कालीन सीओ का स्थानांतरण हो गया और मामले की जांच अब खड्डा के सीओ वीरेंद्र सिंह ने शुरू किया है।
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कुशीनगर नगर पालिका के वार्ड नंबर 21 बुद्ध नगरी निवासी प्रियेश गोड़ अपनी बहन संध्या गोड़ और प्रियंका गोड़ का जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 28 अक्तूबर 2023 को ऑनलाइन आवेदन कसया तहसील में किया था। आवेदन को लेखपालों ने गलत बताते हुए निरस्त कर दिया। तत्कालीन डीएम उमेश मिश्रा से शिकायत के बाद लेखपालों ने आनन-फानन में लेखपालों ने दोबारा खुद संध्या और प्रियंका का आवेदन कर जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिए।
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जाति प्रमाण पत्र जारी करने में नाम पते में गड़बड़ी की गई। शिकायत और लेखपालों की ओर से की गई गलतियों का साक्ष्य लेकर प्रियेश गोड़ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने लेखपाल निलेश रंजन राव, शैलेश दुबे, श्रीनिवास सिंह पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करने का आदेश दिया। कसया पुलिस ने 17 अगस्त 2024 को प्राथमिक दर्ज कर विवेचना शुरू किया। तत्कालीन एसपी संतोष मिश्रा से पीड़ित मिलकर कसया सीओ पर निष्पक्ष विवेचना नहीं करने और सुलह के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया।
इसके बाद एसपी ने खड्डा के तत्कालीन सीओ उमेश चंद भट्ट को दो सितंबर 2024 के पास विवेचना स्थानांतरण कर दिया। तभी से सीओ विवेचना कर रहे थे, वादी का बिना बयान दर्ज किए फाइनल रिपोर्ट लगाकर एसपी कार्यालय को भेजा। एएसपी की जांच में वादी का बयान नहीं लेने की पुष्टि हुई। इसके बाद एसपी कार्यालय से खड्डा सीओ को 22 अगस्त 2025 को पत्र जारी कर वादी का बयान दर्ज करने और जाति प्रमाण पत्र पर दिए गए मोबाइल नंबर को सीडीआर साक्ष्य के तौर पर दर्ज करने का निर्देश दिया गया। प्रियेश गोड़ ने एडीजी, डीआईजी से विवेचना में सुस्ती की शिकायत की थी।