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Kushinagar News: पति की चिता की राख ठंडी भी नहीं हुई...बेटा गया जेल, टूटी मां
Sun, 17 May 2026 02:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 17 May 2026 02:44 AM IST
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सुकरौली। अहिरौली थाना क्षेत्र के रामपुर माफी गांव में शुक्रवार को हर आंख नम थी। गांव में सबसे ज्यादा दर्द उस मां की आंखों में दिख रहा था, जिसने एक ही झटके में अपना सुहाग भी खो दिया और बेटे को जेल जाते भी देखा। पति ओमप्रकाश की हत्या के आरोप में जब पुलिस बेटे राधेश्याम को लेकर जा रही थी, तब मां इंद्रावती देवी बार-बार बिलखते हुए यही कह रही थीं, “भगवान, अब हमका जिंदा काहे रखले बाने...”
जिस घर में मार्च महीने में बेटे की शादी की खुशियां गूंज रही थीं, वहां अब मातम पसरा है। पति ओमप्रकाश की चिता को उनके नौ वर्षीय नाती ने मुखाग्नि दी। घर के बाहर बैठे ग्रामीण और रिश्तेदार इंद्रावती देवी को संभालने में जुटे रहे, लेकिन उनका दर्द किसी के लिए भी शब्दों में बांध पाना मुश्किल था। रिश्तेदारों के मुताबिक, इंद्रावती बार-बार रोते हुए कह रही थीं, “जिस बेटा खातिर बाप दिन-रात मेहनत कइलन, उहे बेटा आज उनका जान ले लिहलस... अब लोग का कहिहें, कइसे जीयब...।
गांव की महिलाओं ने बताया कि इंद्रावती देवी का सबसे बड़ा दर्द यह था कि आरोपी कोई बाहरी नहीं, बल्कि उनका अपना बेटा निकला। कानून का साथ देने के लिए उन्हें खुद ही बेटे के खिलाफ तहरीर देनी पड़ी। एक तरफ पति की अर्थी उठ रही थी, दूसरी तरफ बेटे की गिरफ्तारी हो रही थी। गांव के लोग कहते हैं कि यह पीड़ा किसी भी मां के लिए असहनीय है। ग्रामीणों के अनुसार, दो महीने पहले तक परिवार खुशहाल था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि कुछ ही समय में यह घर इस तरह उजड़ जाएगा। अब इंद्रावती देवी के सामने सबसे बड़ा सवाल अपने भविष्य और परिवार को संभालने का है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के बदलते रिश्तों और बढ़ती दूरियों का भी आईना है।
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जिस घर में मार्च महीने में बेटे की शादी की खुशियां गूंज रही थीं, वहां अब मातम पसरा है। पति ओमप्रकाश की चिता को उनके नौ वर्षीय नाती ने मुखाग्नि दी। घर के बाहर बैठे ग्रामीण और रिश्तेदार इंद्रावती देवी को संभालने में जुटे रहे, लेकिन उनका दर्द किसी के लिए भी शब्दों में बांध पाना मुश्किल था। रिश्तेदारों के मुताबिक, इंद्रावती बार-बार रोते हुए कह रही थीं, “जिस बेटा खातिर बाप दिन-रात मेहनत कइलन, उहे बेटा आज उनका जान ले लिहलस... अब लोग का कहिहें, कइसे जीयब...।
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गांव की महिलाओं ने बताया कि इंद्रावती देवी का सबसे बड़ा दर्द यह था कि आरोपी कोई बाहरी नहीं, बल्कि उनका अपना बेटा निकला। कानून का साथ देने के लिए उन्हें खुद ही बेटे के खिलाफ तहरीर देनी पड़ी। एक तरफ पति की अर्थी उठ रही थी, दूसरी तरफ बेटे की गिरफ्तारी हो रही थी। गांव के लोग कहते हैं कि यह पीड़ा किसी भी मां के लिए असहनीय है। ग्रामीणों के अनुसार, दो महीने पहले तक परिवार खुशहाल था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि कुछ ही समय में यह घर इस तरह उजड़ जाएगा। अब इंद्रावती देवी के सामने सबसे बड़ा सवाल अपने भविष्य और परिवार को संभालने का है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के बदलते रिश्तों और बढ़ती दूरियों का भी आईना है।
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