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Kushinagar News: जांच के लिए स्कूल पहुंची टीम, शिक्षकों-बच्चों का बयान दर्ज
Sat, 24 Feb 2024 02:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 24 Feb 2024 02:12 AM IST
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खड्डा/पकड़ियार बाजार। कंपोजिट विद्यालय शिवदत्त छपरा में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) खाने से बृहस्पतिवार को 30 बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में बीएसए ने बीईओ, डीसी एमडीएम और प्रधानाध्यापक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। बीएसए के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच टीम शुक्रवार को स्कूल पहुंची। टीम ने शिक्षकों और बच्चों का बयान दर्ज किया।
खड्डा ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय शिवदत्त छपरा में बृहस्पतिवार को एमडीएम में बना दाल पीट्ठा 146 बच्चों ने खाया था। 30 बच्चों के पेट में दर्द होने पर शिक्षक, अभिभावकों ने उन्हें नेबुआ नौरंगिया सीएचसी में भर्ती कराया। इसकी खबर मिलते ही डीएम, सीएमओ, सीडीओ और बीएसए भी अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हाल जाना। आधी रात तक बीएसए सीएचसी में जमे रहे। वहीं, देर रात तक गांव में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दाल पीट्ठा खाने वाले अन्य बच्चों के स्वास्थ्य का हाल जाना।बीएसए ने तीन सदस्यी टीम गठित किया। इसमें बीईओ सदर सुरेंद्र बहादुर सिंह, बीईओ रामकोला राजेश कुमार और डीसी प्रशिक्षण सत्येंद्र मौर्या शामिल हैं। स्कूल पर पहुंची टीम सभी का बयान दर्ज किया और बृहस्पतिवार को बनाए गए एमडीएम की जानकारी ली। चार घंटे तक टीम स्कूल में जमी रही। बीएसए ने खड्डा के बीईओ सत्येंद्र पांडेय डीसी एमडीएम जितेंद्र गौतम और प्रधानाध्यापक संध्या चौबे को नोटिस जारी कर 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। बीएसए रामजियावन मौर्य ने बताया कि जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है। बीईओ, प्रधानाध्यापक और एमडीएम डीसी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
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दूसरे दिन भी दहशत में दिखे बच्चे
-शिवदत्त छपरा कंपोजिट विद्यालय में शुक्रवार को 101 बच्चे ही स्कूल आए। इसमें आठ बच्चे ऐसे थे, जो बृहस्पतिवार को बीमार हुए थे। बच्चों के चेहरे पर दहशत का दिख रहा था। एमडीएम बनने के बाद जब रसोइया आवाज देती थीं तो बच्चे दौड़े जाते थे, लेकिन शुक्रवार को तहरी बनने के बाद रसोइया ने आवाज दी तो बच्चे रसोई घर के तरफ जाने से हिचक रहे थे। शिक्षकों के कहने के बाद बच्चे भोजन करने गए। कई बच्चों के अभिभावक भी स्कूल पहुंच थे। डर से कुछ अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। स्कूल आए रितांशु, संगम, सृष्टि, सुंदरी, रेशम, प्रिंस ने बताया कि दाल पीट्ठा खाने के बाद पेट में दर्द होने लगा था। इलाज के बाद आराम मिला।
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एमडीएम के मेन्यू में नहीं है दाल पीट्ठा
- एमडीएम की ओर से तय किए मेन्यू में बृहस्पतिवार को बच्चों को रोटी सब्जी और दूध देना है। लेकिन, दाल पीट्ठा बनाया गया था। प्रधानाध्यापक संध्या ने बताया कि भोजन बनाते समय रसोई गैस खत्म हो गई तो चूल्हे पर भोजन बना। किचन के बाहर अधजले टायर का उपयोग भोजन बनाने में नहीं किया गया है। कोई बच्चा लाकर फेंका होगा। शुद्धता नहीं होने के कारण बच्चों को दूध नहीं दिया जाता है।
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बच्चों के लिए बने शौचालय में बंद मिला ताला
-स्कूल कैंपस में बच्चों के लिए बने शौचालय का ताला बंद था। पूछने पर बच्चों ने बताया कि शौच या लघुशंका के लिए खुले में जाना पड़ता है। बच्चों की यह बात सुनकर प्रधानाध्यापक संध्या चौबे बोलीं कि शौचालय रोज खुलता है। इसकी चाबी किसी और के पास है। आनन-फानन में वहां मौजूद एक व्यक्ति से बंद ताले को ईंट से तोड़वाया। फाटक खुला तो शौचालय गंदगी से पटा था।
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हम लोगों के बच्चे भी भोजन किए, लेकिन बीमार नहीं हुए
-रसोइया, उमरावती, धूपा देवी, गेनिया देवी ने बताया कि बृहस्पतिवार को रोज की तरह भोजन बनाया गया था। धूपा देवी ने बताया कि भोजन बनने के बाद खुद मैंने चखा। भोजन में कोई खराबी नहीं थी। सभी बच्चे भी वही दाल पीट्ठा खाए थे। सिर्फ कुछ ही बच्चों की तबीयत बिगड़ी थी। हम लोगों के घर के बच्चे भी भोजन किए थे। लेकिन बीमार नहीं हुए।
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-खाद्य एवं रसद विभाग के सहायक आयुक्त प्रदीप कुमार राय टीम के साथ शुक्रवार को स्कूल पहुंचे। एमडीएम बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसोई घर में रखे गए खाद्य पदार्थों का नमूना लिया। रसोइया और शिक्षकों से बनाए गए दाल पीट्ठा के बारे में भी जानकारी ली। प्रदीप कुमार राय ने बताया कि नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई होगी। दाल पीट्ठा का भी नमूना भरा जाना चाहिए था, लेकिन दाल पीट्ठा खत्म हो गया था।
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बच्चे पीते हैं दूषित पानी पानी, अपने लिए आरओ का पानी मंगाते हैं शिक्षक
- शिवदत्त छपरा कंपोजिट विद्यालय में लगे दो इंडिया मार्का हैंडपंप का पानी बच्चे पीते हैं। जबकि, शिक्षक अपने लिए आरओ का पानी मंगाते हैं। स्कूल में 265 बच्चों की नामांकन है। कंपोजिट स्कूल में सिर्फ एक ही शौचालय है, जबकि दूसरे में ताला बंद रहता है। रसोइयों और बच्चों ने बताया कि हैंडपंप के पानी से दुर्गंध आती है। मजबूरी में बच्चे यही पानी पीते हैं। भोजन भी इसी पानी से बनता है। विद्यालय में लगी पानी की टोंटियां टूट गई हैं। बच्चों ने बताया कि नल का पानी बाल्टी में रखने पर कुछ देर बाद पीला हो जाता है। बच्चों के बीमार होने और स्कूल में साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं होने से अभिभावक नाराज दिखे।
कोट
-छात्रा गुड़िया के पिता अयोध्या प्रसाद ने बताया कि हम मजदूरी करने गए थे बच्चों के तबीयत खराब होने की जानकारी मिलने पर विद्यालय पहुंचे तो पता चला कि सभी शिक्षक सीएचसी पर गए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे अक्सर कहते हैं कि स्कूल में भोजन अच्छा नहीं बनता है।
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कोट
-छात्र संगम के पिता राम प्रवेश ने कहा कि जब बच्चों की तबीयत बिगड़ी तो हम विद्यालय के पास चौराहा पर थे। तत्काल स्कूल पहुंचे। वहां देखा कि प्रधानाध्यापक के कक्ष में पांच बच्चे बैठ कर रो रहे हैं। इसके बाद एंबुलेंस बुलाकर शिक्षकों के साथ बच्चों को अस्पताल लेकर पहुंचा। स्कूल पर लगे हैंडपंप का पानी दूषित आता है। बच्चे वही पानी पीते हैं।
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मुआवजा के शोर पर बच्चों को लेकर पहुंच गए अभिभावक
-एमडीएम खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ी तो गंवई राजनीति भी गरमा गई। एक शख्स ने शोर मचा दिया कि जिनके बच्चे का इलाज होगा, उन्हें सरकार की तरफ से मुआवजा मिलेगा। इसके बाद देर रात में लोग पांच लोग को लेकर सीएचसी पहुंच गए। डॉक्टर ने जब इंजेक्शन लगाने की बात कही तो बच्चे बोले कि कुछ नहीं हुआ है। इसके बाद अभिभावक बच्चों को लेकर लौट गए। इसकी चर्चा गांव और अस्पताल में रही।
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खड्डा ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय शिवदत्त छपरा में बृहस्पतिवार को एमडीएम में बना दाल पीट्ठा 146 बच्चों ने खाया था। 30 बच्चों के पेट में दर्द होने पर शिक्षक, अभिभावकों ने उन्हें नेबुआ नौरंगिया सीएचसी में भर्ती कराया। इसकी खबर मिलते ही डीएम, सीएमओ, सीडीओ और बीएसए भी अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हाल जाना। आधी रात तक बीएसए सीएचसी में जमे रहे। वहीं, देर रात तक गांव में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दाल पीट्ठा खाने वाले अन्य बच्चों के स्वास्थ्य का हाल जाना।बीएसए ने तीन सदस्यी टीम गठित किया। इसमें बीईओ सदर सुरेंद्र बहादुर सिंह, बीईओ रामकोला राजेश कुमार और डीसी प्रशिक्षण सत्येंद्र मौर्या शामिल हैं। स्कूल पर पहुंची टीम सभी का बयान दर्ज किया और बृहस्पतिवार को बनाए गए एमडीएम की जानकारी ली। चार घंटे तक टीम स्कूल में जमी रही। बीएसए ने खड्डा के बीईओ सत्येंद्र पांडेय डीसी एमडीएम जितेंद्र गौतम और प्रधानाध्यापक संध्या चौबे को नोटिस जारी कर 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। बीएसए रामजियावन मौर्य ने बताया कि जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है। बीईओ, प्रधानाध्यापक और एमडीएम डीसी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
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दूसरे दिन भी दहशत में दिखे बच्चे
-शिवदत्त छपरा कंपोजिट विद्यालय में शुक्रवार को 101 बच्चे ही स्कूल आए। इसमें आठ बच्चे ऐसे थे, जो बृहस्पतिवार को बीमार हुए थे। बच्चों के चेहरे पर दहशत का दिख रहा था। एमडीएम बनने के बाद जब रसोइया आवाज देती थीं तो बच्चे दौड़े जाते थे, लेकिन शुक्रवार को तहरी बनने के बाद रसोइया ने आवाज दी तो बच्चे रसोई घर के तरफ जाने से हिचक रहे थे। शिक्षकों के कहने के बाद बच्चे भोजन करने गए। कई बच्चों के अभिभावक भी स्कूल पहुंच थे। डर से कुछ अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। स्कूल आए रितांशु, संगम, सृष्टि, सुंदरी, रेशम, प्रिंस ने बताया कि दाल पीट्ठा खाने के बाद पेट में दर्द होने लगा था। इलाज के बाद आराम मिला।
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एमडीएम के मेन्यू में नहीं है दाल पीट्ठा
- एमडीएम की ओर से तय किए मेन्यू में बृहस्पतिवार को बच्चों को रोटी सब्जी और दूध देना है। लेकिन, दाल पीट्ठा बनाया गया था। प्रधानाध्यापक संध्या ने बताया कि भोजन बनाते समय रसोई गैस खत्म हो गई तो चूल्हे पर भोजन बना। किचन के बाहर अधजले टायर का उपयोग भोजन बनाने में नहीं किया गया है। कोई बच्चा लाकर फेंका होगा। शुद्धता नहीं होने के कारण बच्चों को दूध नहीं दिया जाता है।
बच्चों के लिए बने शौचालय में बंद मिला ताला
-स्कूल कैंपस में बच्चों के लिए बने शौचालय का ताला बंद था। पूछने पर बच्चों ने बताया कि शौच या लघुशंका के लिए खुले में जाना पड़ता है। बच्चों की यह बात सुनकर प्रधानाध्यापक संध्या चौबे बोलीं कि शौचालय रोज खुलता है। इसकी चाबी किसी और के पास है। आनन-फानन में वहां मौजूद एक व्यक्ति से बंद ताले को ईंट से तोड़वाया। फाटक खुला तो शौचालय गंदगी से पटा था।
हम लोगों के बच्चे भी भोजन किए, लेकिन बीमार नहीं हुए
-रसोइया, उमरावती, धूपा देवी, गेनिया देवी ने बताया कि बृहस्पतिवार को रोज की तरह भोजन बनाया गया था। धूपा देवी ने बताया कि भोजन बनने के बाद खुद मैंने चखा। भोजन में कोई खराबी नहीं थी। सभी बच्चे भी वही दाल पीट्ठा खाए थे। सिर्फ कुछ ही बच्चों की तबीयत बिगड़ी थी। हम लोगों के घर के बच्चे भी भोजन किए थे। लेकिन बीमार नहीं हुए।
-खाद्य एवं रसद विभाग के सहायक आयुक्त प्रदीप कुमार राय टीम के साथ शुक्रवार को स्कूल पहुंचे। एमडीएम बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसोई घर में रखे गए खाद्य पदार्थों का नमूना लिया। रसोइया और शिक्षकों से बनाए गए दाल पीट्ठा के बारे में भी जानकारी ली। प्रदीप कुमार राय ने बताया कि नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई होगी। दाल पीट्ठा का भी नमूना भरा जाना चाहिए था, लेकिन दाल पीट्ठा खत्म हो गया था।
बच्चे पीते हैं दूषित पानी पानी, अपने लिए आरओ का पानी मंगाते हैं शिक्षक
- शिवदत्त छपरा कंपोजिट विद्यालय में लगे दो इंडिया मार्का हैंडपंप का पानी बच्चे पीते हैं। जबकि, शिक्षक अपने लिए आरओ का पानी मंगाते हैं। स्कूल में 265 बच्चों की नामांकन है। कंपोजिट स्कूल में सिर्फ एक ही शौचालय है, जबकि दूसरे में ताला बंद रहता है। रसोइयों और बच्चों ने बताया कि हैंडपंप के पानी से दुर्गंध आती है। मजबूरी में बच्चे यही पानी पीते हैं। भोजन भी इसी पानी से बनता है। विद्यालय में लगी पानी की टोंटियां टूट गई हैं। बच्चों ने बताया कि नल का पानी बाल्टी में रखने पर कुछ देर बाद पीला हो जाता है। बच्चों के बीमार होने और स्कूल में साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं होने से अभिभावक नाराज दिखे।
कोट
-छात्रा गुड़िया के पिता अयोध्या प्रसाद ने बताया कि हम मजदूरी करने गए थे बच्चों के तबीयत खराब होने की जानकारी मिलने पर विद्यालय पहुंचे तो पता चला कि सभी शिक्षक सीएचसी पर गए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे अक्सर कहते हैं कि स्कूल में भोजन अच्छा नहीं बनता है।
कोट
-छात्र संगम के पिता राम प्रवेश ने कहा कि जब बच्चों की तबीयत बिगड़ी तो हम विद्यालय के पास चौराहा पर थे। तत्काल स्कूल पहुंचे। वहां देखा कि प्रधानाध्यापक के कक्ष में पांच बच्चे बैठ कर रो रहे हैं। इसके बाद एंबुलेंस बुलाकर शिक्षकों के साथ बच्चों को अस्पताल लेकर पहुंचा। स्कूल पर लगे हैंडपंप का पानी दूषित आता है। बच्चे वही पानी पीते हैं।
मुआवजा के शोर पर बच्चों को लेकर पहुंच गए अभिभावक
-एमडीएम खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ी तो गंवई राजनीति भी गरमा गई। एक शख्स ने शोर मचा दिया कि जिनके बच्चे का इलाज होगा, उन्हें सरकार की तरफ से मुआवजा मिलेगा। इसके बाद देर रात में लोग पांच लोग को लेकर सीएचसी पहुंच गए। डॉक्टर ने जब इंजेक्शन लगाने की बात कही तो बच्चे बोले कि कुछ नहीं हुआ है। इसके बाद अभिभावक बच्चों को लेकर लौट गए। इसकी चर्चा गांव और अस्पताल में रही।