बांसी नदी के दमकल घाट पर 125 मीटर लंबे पुल का निर्माण पूरा होने से रेता क्षेत्र के करीब 25 गांव सीधे सेवरही बाजार से जुड़ गए हैं। हलांकि पुल का अभी लोकार्पण नहीं हुई है, लेकिन पैदल व बाइक सवार लोगों का आना-जाना शुरू हो गया है। तमकुहीरोड-बरवापट्टी मार्ग पर बने इस पुल से दियारा क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियां भी बढ़ने की प्रबल संभावना है। गंडक और बांसी नदी से प्रभावित नरायनपुर, चौबेया पटखौली, बिनटोली, रामपुर पट्टी, रामपुर बरहन, खानगी, परोरही, बकुलहवा, दरोगाडीह, भवानीपुर, अमवा दीगर, लक्ष्मीपुर, अमवा खास, बिचपटवा, बरवापट्टी आदि गांवों के लोगों को सेवरही कस्बे में आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सत्तर के दशक में तत्कालीन कृषि मंत्री गेंदा सिंह के प्रयास से तमकुहीरोड से बरवापट्टी(टीबी) तक पिच सड़क का निर्माण हुआ था। तब दमकल घाट पर पीपा पुल बना था जो वर्ष 1984 की बाढ़ में बह गया था। इसके बाद से दियारा क्षेत्र में आवागमन और प्रभावित हो गया था। आवागमन कम होने से सेवरही कस्बे की व्यवसायिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा था। लंबे समय से लोग दमकल घाट पर पक्के पुल के निर्माण की मांग कर रहे थे। पिछले साल इस जगह 7.25 करोड़ की लागत से 125 मीटर लंबे पुल का निर्माण कराया गया। पुल निर्माण का कार्य पूूरा हो जाने पर अवधेश राय, त्रिभुवन जायसवाल, हाकिम अंसारी, पप्पू जायसवाल, राजेंद्र प्रसाद, संदीप गौतम आदि का कहना है कि इस पुल के निर्माण से बाढ़ प्रभावित इलाके की तस्वीर बदलनी तय है। आवागमन की सुविधा बढ़ने के साथ ही क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी।