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Kushinagar News: गोरखपुर-नरकटियागंज रूट पर सख्ती तो कप्तानगंज-थावे पर बढ़ी तस्करों की सक्रियता

Sun, 05 Jul 2026 02:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 05 Jul 2026 02:34 AM IST
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Stricter enforcement on the Gorakhpur-Narkatiaganj route has led to increased smuggler activity on the Kaptanganj-Thawe route.
पडरौना। जिले से होकर शराब की तस्करी रोकना पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। वर्तमान में गोरखपुर-नरकटियागंज रेल रूट पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने जब सख्ती बढ़ाई, तो तस्करों ने अपना रास्ता ही बदल लिया है। अब तस्करों की सक्रियता कप्तानगंज-थावे रूट पर देखी जा रही है। इस रूट पर चलने वाली पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के जरिए शराब बिहार पहुंचाई जा रही है।
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तस्कर रेलवे स्टेशनों पर बैग, अटैची और बड़े-बड़े कार्टूनों में शराब भरकर लाते हैं और ट्रेनों में भीड़ के बीच सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा दे रहे हैं। इसके बावजूद स्टेशनों पर तैनात जीआरपी और आरपीएफ की चेकिंग सिर्फ खानापूर्ति तक सिमट कर रह गई है।
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ट्रेनों से शराब तस्करी का पुराना खेल
ट्रेनों के जरिए बिहार में शराब भेजने का खेल पुराना व शातिराना है। बीते कुछ दिनों के बीच शराब तस्करी से जुड़े सामने आए मामलों में जीआरपी व आरपीएफ के तैनात जवानों के निगरानी व उनकी सक्रियता में लापरवाही सामने आई। जिसको लेकर रेल प्रशासन ने सख्ती के साथ कार्रवाई भी की है।
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केस (1)
27 जून 2026 : कुशीनगर जिले के पडरौना और आसपास के रास्तों से बिहार जाने वाली ट्रेनों में लगातार शराब मिलने से रेलवे के अधिकारियों का स्थानीय स्तर पर तैनात जीआरपी के कुछ सिपाहियों पर संदेह गहरा गया। हाल ही में जिले के विभिन्न थानों से हटाकर करीब 20 से अधिक सिपाहियों को जीआरपी में तैनात किया गया था। जांच में सामने आया है कि इनकी मौजूदगी के बावजूद स्टेशनों पर चेकिंग ढीली रहती है और बैग व अटैचियों में शराब पार हो रही है। अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
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केस (2):
12 जून 2026: गोरखपुर-नरकटियागंज रूट से होकर बिहार जाने वाली सप्तक्रांति एक्सप्रेस में तस्करी के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। जांच एजेंसियों ने बेतिया स्टेशन के पास ट्रेन में छापा मारकर भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब बरामद की। जांच में खुलासा हुआ कि तस्करी में बाहरी लोग नहीं, बल्कि रेलवे से जुड़े लोग संलिप्त थे। पुलिस ने पैंट्रीकार के मैनेजर समेत चार कर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया।
केस-3
4 अप्रैल 2026 : आनंद विहार से रक्सौल (बिहार) जाने वाली सत्याग्रह एक्सप्रेस (15274) में तस्करों ने स्लीपर कोच (एस-4) के रूफ पैनल को खोलकर उसके अंदर शराब की बोतलें छिपा दी थीं। सुबह करीब 11 बजे पिपराइच और कप्तानगंज स्टेशन के बीच ट्रेन की तेज रफ्तार के कारण कुछ बोतलें आपस में टकराकर टूट गईं और छत से शराब नीचे टपकने लगी। सूचना पर गोंडा जीआरपी एस्कॉर्ट और कप्तानगंज आरपीएफ ने कार्रवाई करते हुए छत को खुलवाया और करीब 20,000 रुपये की शराब जब्त की। इसके बाद रेलवे बोर्ड को ट्रेनों के रूफ पैनल की विशेष जांच के लिए ''ऑपरेशन सतर्क'' चलाना पड़ा।


कोट:-
कप्तानगंज-थावे रूट पर भी गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर स्थानीय पुलिस या आरपीएफ कर्मियों की तस्करों से मिलीभगत सामने आती है, तो उनके खिलाफ निलंबन और विभागीय जांच जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी संदिग्ध सामान की सघन चेकिंग के आदेश दिए गए हैं। -अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी
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