{"_id":"63961d084e18c645190fd30b","slug":"specialist-doctor-not-available-in-district-hospital-kushinagar-news-gkp460525998","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: नाक, कान और गले का इलाज कराना हुआ मुश्किल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: नाक, कान और गले का इलाज कराना हुआ मुश्किल
विज्ञापन
नाक, कान और गले का इलाज कराना हुआ मुश्किल
जिला अस्पताल में उधार के ईएनटी के भरोसे चल रही व्यवस्था, सर्जन भी सिर्फ एक
छह माह से नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं
पुरुष व नेत्र चिकित्सालय के ईएनटी को तीन दिन मिली है जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जनपद के सबसे बड़े अस्पताल में लगभग छह माह से कोई ईएनटी नहीं है। दूरदराज से आने वाले नाक, कान व गला रोग से पीड़ित मरीजों का यहां समय से इलाज से नहीं हो पा रहा है। मरीजों की परेशानी को देखते हुए यहां तीन दिन के लिए पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय के ईएनटी को संबद्ध किया गया है। फिर भी मरीजों को या तो उनके इस अस्पताल में आने का इंतजार करना पड़ता है, या निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है। सर्जन भी सिर्फ एक ही कार्यरत हैं।
छह माह पूर्व शासन स्तर से बड़े स्तर पर हुए तबादले के बाद जिला अस्पताल से भी कई विशेषज्ञ डॉक्टरों को स्थानांतरित कर दिया गया था। उस समय यहां तैनात रहे नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. एके मल्ल का भी स्थानांतरण हो गया था। तब से जिला अस्पताल में यह पद रिक्त है। उनके समय में ओपीडी में लगभग 40 मरीज प्रतिदिन आते थे। उनके जाने के बाद से मरीजों की परेशानी को देखते हुए पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में तैनात ईएनटी डॉ. प्रेमनारायण को तीन दिन के लिए जिला अस्पताल संबद्ध कर दिया गया।
अब मंगलवार, बृहस्पतिवार और शनिवार पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में ड्यूटी करते हैं तथा सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को जिला अस्पताल में तैनाती रहती है। इस तरह उनकी ड्यूटी तीन दिन के लिए पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय तथा तीन दिन जिला अस्पताल में रहती है। इसमें से एक दिन जिला अस्पताल में ओटी भी देखनी होती है। हालांकि, वह अभी अवकाश पर हैं। जिला अस्पताल में स्थायी रूप से ईएनटी न होने की वजह से मरीजों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
इसी तरह जिला अस्पताल में एक वरिष्ठ शल्यक (सीनियर सर्जन) और एक सर्जन का पद स्वीकृत है, लेकिन इसमें वरिष्ठ शल्यक का पद भी तबादले के बाद से खाली है। इसके पूर्व डॉ. बीएन पांडेय, डॉ. विजय शंकर सिंह, डॉ. राजेश कुमार सहित तीन सर्जन तैनात थे। सर्जन कम होने से मरीजों के ऑपरेशन में दिक्कत होती है। मरीजों को समस्या इस वजह से भी होती है कि कम संख्या के कारण इन्हें ओपीडी, इमरजेंसी और ओटी की ड्यूटी भी करनी पड़ती है। ऐसे में मरीज इन्हें ढूंढते रह जाते हैं।
00000
वर्जन-
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या काफी कम हो गई है। जो डॉक्टर उपलब्ध हैं, उन्हें ओपीडी के साथ इमरजेंसी और ओटी में भी ड्यूटी करनी पड़ती है। पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय के ईएनटी यहां तीन के लिए संबद्ध किए गए हैं। उसमें से एक दिन उन्हें ओटी में ड्यूटी करनी होती है। इसके अलावा एक सीनियर सर्जन और एक सर्जन का पद स्वीकृत है, लेकिन एक ही सर्जन उपलब्ध हैं। इनकी कम संख्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
- डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस जिला अस्पताल
विज्ञापन
जिला अस्पताल में उधार के ईएनटी के भरोसे चल रही व्यवस्था, सर्जन भी सिर्फ एक
छह माह से नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं
पुरुष व नेत्र चिकित्सालय के ईएनटी को तीन दिन मिली है जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जनपद के सबसे बड़े अस्पताल में लगभग छह माह से कोई ईएनटी नहीं है। दूरदराज से आने वाले नाक, कान व गला रोग से पीड़ित मरीजों का यहां समय से इलाज से नहीं हो पा रहा है। मरीजों की परेशानी को देखते हुए यहां तीन दिन के लिए पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय के ईएनटी को संबद्ध किया गया है। फिर भी मरीजों को या तो उनके इस अस्पताल में आने का इंतजार करना पड़ता है, या निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है। सर्जन भी सिर्फ एक ही कार्यरत हैं।
छह माह पूर्व शासन स्तर से बड़े स्तर पर हुए तबादले के बाद जिला अस्पताल से भी कई विशेषज्ञ डॉक्टरों को स्थानांतरित कर दिया गया था। उस समय यहां तैनात रहे नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. एके मल्ल का भी स्थानांतरण हो गया था। तब से जिला अस्पताल में यह पद रिक्त है। उनके समय में ओपीडी में लगभग 40 मरीज प्रतिदिन आते थे। उनके जाने के बाद से मरीजों की परेशानी को देखते हुए पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में तैनात ईएनटी डॉ. प्रेमनारायण को तीन दिन के लिए जिला अस्पताल संबद्ध कर दिया गया।
विज्ञापन
अब मंगलवार, बृहस्पतिवार और शनिवार पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में ड्यूटी करते हैं तथा सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को जिला अस्पताल में तैनाती रहती है। इस तरह उनकी ड्यूटी तीन दिन के लिए पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय तथा तीन दिन जिला अस्पताल में रहती है। इसमें से एक दिन जिला अस्पताल में ओटी भी देखनी होती है। हालांकि, वह अभी अवकाश पर हैं। जिला अस्पताल में स्थायी रूप से ईएनटी न होने की वजह से मरीजों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
इसी तरह जिला अस्पताल में एक वरिष्ठ शल्यक (सीनियर सर्जन) और एक सर्जन का पद स्वीकृत है, लेकिन इसमें वरिष्ठ शल्यक का पद भी तबादले के बाद से खाली है। इसके पूर्व डॉ. बीएन पांडेय, डॉ. विजय शंकर सिंह, डॉ. राजेश कुमार सहित तीन सर्जन तैनात थे। सर्जन कम होने से मरीजों के ऑपरेशन में दिक्कत होती है। मरीजों को समस्या इस वजह से भी होती है कि कम संख्या के कारण इन्हें ओपीडी, इमरजेंसी और ओटी की ड्यूटी भी करनी पड़ती है। ऐसे में मरीज इन्हें ढूंढते रह जाते हैं।
00000
वर्जन-
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या काफी कम हो गई है। जो डॉक्टर उपलब्ध हैं, उन्हें ओपीडी के साथ इमरजेंसी और ओटी में भी ड्यूटी करनी पड़ती है। पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय के ईएनटी यहां तीन के लिए संबद्ध किए गए हैं। उसमें से एक दिन उन्हें ओटी में ड्यूटी करनी होती है। इसके अलावा एक सीनियर सर्जन और एक सर्जन का पद स्वीकृत है, लेकिन एक ही सर्जन उपलब्ध हैं। इनकी कम संख्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
- डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस जिला अस्पताल