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शिक्षक ने संवारी स्कूल की सूरत
ब्यूरो/अमर उजाला कुशीनगर
Updated Sat, 13 Aug 2016 11:12 PM IST
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स्कूल की सूरत बदली।
- फोटो : अमर उजाला
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परिषदीय स्कूल के एक अध्यापक ने अपने वेतन के रुपयों से स्कूल की तस्वीर बदल दी है। अब इस स्कूल के बच्चे भी कान्वेंट स्कूल की तरह अप टू डेट होकर पढ़ने आते हैं। फर्नीचर पर बैठते हैं और अंग्रेजी विषय भी पढ़ रहे हैं। अगल-बगल के प्राइवेट स्कूलों से बेहतर स्थिति में पहुंच चुके इस सरकारी स्कूल के बच्चों को न तो खाने का बर्तन ढोना पड़ता है और नहीं बैठने के लिए बोरा।
रामकोला विकास खंड के गांव रामपुर बगहा के कोईरी टोला में स्थित प्राथमिक विद्यालय पिछले वर्ष तक ब्लाक क्षेत्र के सर्वाधिक खराब स्कूलों में से एक था। पिछले वर्ष दो मई को राशिद अली इस विद्यालय पर बतौर सहायक अध्यापक तैनात किए गए। उस वक्त विद्यालय में महज 12-15 ही पढ़ने आते थे। स्कूल में न तो बच्चों के लिए बैठने का प्रबंध था और ही कोई शैक्षणिक माहौल। स्कूल आ रहे बच्चे भी पढ़ाई की बजाय केवल मध्याह्न भोजन के लिए आते थे। उन्हें भी अपने घर से बर्तन लेकर आना पड़ता था। जुलाई में नया शिक्षण सत्र शुरू होने पर नामांकन तो हुआ लेकिन बच्चे स्कूल नहीं आ रहे थे। राशिद ने घर-घर जाकर बच्चों के अभिभावकों से संपर्क करना शुरू किया। इसके बाद बच्चों की संख्या तो बढ़ी परंतु व्यवस्था न होने के चलते बच्चों की संख्या घटती-बढ़ती रही। इस वर्ष 22 अप्रैल को राशिद यहां के प्रभारी प्रधानाध्यापक बने। साथ ही दो सहायक अध्यापक संजय श्रीवास्तव और संजय पासवान की भी तैनाती हुई। प्रभारी प्रधानाध्यापक बनते ही राशिद ने अपने वेतन से बच्चों के लिए टाई-बेल्ट, स्कूल बैग और परिचय पत्र का इंतजाम किया। उत्साहजनक परिणाम मिला तो उन्होंने फर्नीचर और बर्तन का भी इंतजाम किया। साथ ही वे लगातार गांव में जाकर अभिभावकों से संपर्क करते रहे। राशिद और उनके दोनों सहायक अध्यापक संजय पासवान और संजय श्रीवास्तव ने बच्चों की पढ़ाई पर पूरा जोर लगाया। इस अच्छे प्रयास का नतीजा रहा कि नया शिक्षण सत्र शुरू होते ही इस बार बच्चों की संख्या बढ़कर 110 तक पहुुंच गई। स्कूल को सुंदर बनाने के लिए दीवारों पर चित्र बनवाने के अलावा दरवाजे पर पर्दा भी लगवाया। यहां पढने वाले बच्चों के अभिभावक पड़ोही प्रसाद, भुलई यादव, रामाश्रय, श्रीकिशुन आदि का कहन बताया कि कोईरी टोला का प्राथमिक विद्यालय क्षेत्र के कई प्राइवेट स्कूलों से बेहतर हो गया है। पढ़ाई का माहौल बदला तो लोग स्वत: ही अपने बच्चों का नामांकन इस स्कूल में कराने लगे हैं।लाला छपरा न्याय पंचायत के समन्वयक श्यामसुंदर पासवान कहते हैं अब कोईरी टोला का प्राथमिक विद्यालय इस न्याय पंचायत क्षेत्र का मॉडल स्कूल है। इस विद्यालयों के बच्चों की पढ़ाई का स्तर अगल-बगल के अन्य स्कूलों से बेहतर है। खंड शिक्षाधिकारी अखिलेश यादव भी मानते हैं कि कोईरी टोला का प्राथमिक विद्यालय अब ब्लाक क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में से एक है।
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रामकोला विकास खंड के गांव रामपुर बगहा के कोईरी टोला में स्थित प्राथमिक विद्यालय पिछले वर्ष तक ब्लाक क्षेत्र के सर्वाधिक खराब स्कूलों में से एक था। पिछले वर्ष दो मई को राशिद अली इस विद्यालय पर बतौर सहायक अध्यापक तैनात किए गए। उस वक्त विद्यालय में महज 12-15 ही पढ़ने आते थे। स्कूल में न तो बच्चों के लिए बैठने का प्रबंध था और ही कोई शैक्षणिक माहौल। स्कूल आ रहे बच्चे भी पढ़ाई की बजाय केवल मध्याह्न भोजन के लिए आते थे। उन्हें भी अपने घर से बर्तन लेकर आना पड़ता था। जुलाई में नया शिक्षण सत्र शुरू होने पर नामांकन तो हुआ लेकिन बच्चे स्कूल नहीं आ रहे थे। राशिद ने घर-घर जाकर बच्चों के अभिभावकों से संपर्क करना शुरू किया। इसके बाद बच्चों की संख्या तो बढ़ी परंतु व्यवस्था न होने के चलते बच्चों की संख्या घटती-बढ़ती रही। इस वर्ष 22 अप्रैल को राशिद यहां के प्रभारी प्रधानाध्यापक बने। साथ ही दो सहायक अध्यापक संजय श्रीवास्तव और संजय पासवान की भी तैनाती हुई। प्रभारी प्रधानाध्यापक बनते ही राशिद ने अपने वेतन से बच्चों के लिए टाई-बेल्ट, स्कूल बैग और परिचय पत्र का इंतजाम किया। उत्साहजनक परिणाम मिला तो उन्होंने फर्नीचर और बर्तन का भी इंतजाम किया। साथ ही वे लगातार गांव में जाकर अभिभावकों से संपर्क करते रहे। राशिद और उनके दोनों सहायक अध्यापक संजय पासवान और संजय श्रीवास्तव ने बच्चों की पढ़ाई पर पूरा जोर लगाया। इस अच्छे प्रयास का नतीजा रहा कि नया शिक्षण सत्र शुरू होते ही इस बार बच्चों की संख्या बढ़कर 110 तक पहुुंच गई। स्कूल को सुंदर बनाने के लिए दीवारों पर चित्र बनवाने के अलावा दरवाजे पर पर्दा भी लगवाया। यहां पढने वाले बच्चों के अभिभावक पड़ोही प्रसाद, भुलई यादव, रामाश्रय, श्रीकिशुन आदि का कहन बताया कि कोईरी टोला का प्राथमिक विद्यालय क्षेत्र के कई प्राइवेट स्कूलों से बेहतर हो गया है। पढ़ाई का माहौल बदला तो लोग स्वत: ही अपने बच्चों का नामांकन इस स्कूल में कराने लगे हैं।लाला छपरा न्याय पंचायत के समन्वयक श्यामसुंदर पासवान कहते हैं अब कोईरी टोला का प्राथमिक विद्यालय इस न्याय पंचायत क्षेत्र का मॉडल स्कूल है। इस विद्यालयों के बच्चों की पढ़ाई का स्तर अगल-बगल के अन्य स्कूलों से बेहतर है। खंड शिक्षाधिकारी अखिलेश यादव भी मानते हैं कि कोईरी टोला का प्राथमिक विद्यालय अब ब्लाक क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में से एक है।
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