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Kushinagar News: तीन पीढि़यों से तस्करी...लगाम के इंतजाम नाकाम

Sun, 12 Jan 2025 11:46 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jan 2025 11:46 PM IST
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Smuggling for three generations...arrangements to control failed
पडरौना। पशु तस्करी और मांस निर्यात के लिए चर्चित जिले के पडरौना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत बसहिया बनवीरपुर गांव में पीढ़ियां तो बदल गईं, लेकिन यहां के लोगों ने अवैध गतिविधियों से मुंह नहीं मोड़ा। बदलते वक्त के साथ सख्ती से मांस निर्यात के मंद होते कारोबार के बीच लोगों ने पशु तस्करी के अवैध धंधे में हाथ आजमाना शुरू कर दिया।
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इससे इनका दायरा बढ़ा और इनकी पहचान बिहार और बंगाल तक हो रही पशुओं की तस्करी के मुख्य चेहरों से हो गई। मोटी कमाई देख नई पीढ़ी के युवा भी इसमें शामिल होने लगे। इसने इन्हें मालामाल तो कर दिया, लेकिन गांव की बदनामी दूर होने के बजाय बढ़ती ही चली गई।
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टॉप टेन की अपराधी लिस्ट से लेकर इस गांव के कई चेहरे पशु तस्करी के गैंग लीडर की भूमिका अदा करते हैं। कैरियर के रूप में इस गांव के युवा कई दफा अन्य जनपदों में भी पकड़े जा चुके हैं। बृहस्पतिवार को एसपी संतोष कुमार मिश्रा दल बल के साथ गांव पहुंचे तो सत्यापन में एक भी तस्कर घर की दहलीज पर नजर नहीं आया। पडरौना कोतवाली क्षेत्र का बसहिया बनवीरपुर गांव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दो पीढ़ियों से चले आ रहे पशु तस्करी और मांस निर्यात को लेकर चर्चित यह गांव पिछले एक सप्ताह से हो रही पुलिसिया गतिविधि से फिर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
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नए साल पर पुलिस ने पहले गैंग चिह्नित कर कार्रवाई का खाका तैयार किया। बाद में तस्करों के सत्यापन के लिए एसपी ने खुद कमान संभाल ली और अपनी टीम के साथ तस्करों के घरों तक पहुंच गए। यह पहला मामला नहीं है जब यह गांव पुलिसिया जांच और गतिविधि का केंद्र बना हो।
बल्कि इसके पहले भी बूचड़खाने से मांस का कारोबार और पिकअप से डिलीवरी इस गांव से की जाती रही है। तब घर-घर में स्लाॅटर हाउस (बूचड़खाने) संचालित होते थे। जब पुलिस आती थी तो महिलाएं उग्र हो जाती थी और पूरा गांव मिलकर खाकी का विरोध करता था।
सूबे की योगी सरकार ने अवैध ढंग से चल रहे स्लाॅटर हाउसों को बंद करने का फरमान जारी किया तो हरकत में आए पुलिस-प्रशासन ने बसहिया में भी बड़ी संख्या में अवैध स्लाॅटर हाउस बंद कराए। बावजूद इसके समय-समय पर इस गांव से मांस बरामद होता रहा। मांस के निर्यात पर सख्ती बढ़ी तो यहां के लोगों ने पशुओं की तस्करी को गति दे दी।

पहले से चल रहे मांस के कारोबार के साथ धीमी गति से चल रही पशुओं की तस्करी तेज हो गई। इस गांव के कई तस्कर गैंग लीडर की भूमिका अदा करने लगे तो उसमें कैरियर के रूप में ही इस गांव के युवक शामिल होते चले गए। अलग-अलग जगहों पर पकड़े जाने के बावजूद इस गांव से आजतक दो पीढ़ियां बीत गईं, लेकिन पशु तस्करी का अवैध कारोबार समाप्त नहीं हो सका।
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