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Kushinagar News: छह झोपड़ी और पक्का मकान नदी में समाएं
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छितौनी। महदेवा गांव में बाढ़ का पानी कम होने के बाद अब गंडक नदी का कटान लोगों के लिए नई मुसीबत बन गया है। पिछले दो दिनों से नदी तेजी से रिहायशी इलाके की ओर कटान कर रही है। इसके चलते छह रिहायशी झोपड़ियां और एक पक्का मकान नदी में समा चुके हैं। वहीं, दर्जनों घर कटान की जद में हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत है।
ग्रामीणों के अनुसार, महदेवा में हर वर्ष गंडक नदी कटान करती है। पिछले पांच वर्षों में सैकड़ों एकड़ जमीन और कई रिहायशी झोपड़ियां नदी में समा चुकी हैं। इस वर्ष भी बाढ़ का पानी कम होने के बाद कटान जारी है।
कई दिनों से धीमी गति से हो रहा कटान मंगलवार से अचानक तेज हो गया। बृहस्पतिवार को विभागीय कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर बांस और तार लगाकर बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों का आरोप है कि बचाव कार्य शुरू होने में देरी हुई। महदेवा निवासी हरिनारायण सिंह ने बताया कि बीती रात उनका मकान नदी में समा गया। आरोप लगाया कि बचाव कार्य के नाम पर पहले खानापूर्ति होती रही और मकान नदी में समाने के बाद काम शुरू किया गया।
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कलावती देवी ने बताया कि उनकी रिहायशी झोपड़ी भी नदी में समा गई। परिवार के पास रहने का ठिकाना नहीं बचा है। वह सामान लेकर पंचायत भवन में शरण लेने जा रही हैं। उन्होंने प्रशासन से जमीन का पट्टा और आवास उपलब्ध कराने की मांग की।
मालती देवी ने बताया कि बाढ़ के दौरान करीब एक सप्ताह तक घर में पानी भरा रहा। अब घर भी नदी में समा गया है। परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। उन्होंने सरकार से जमीन और आवास दिलाने की मांग की।
तहसीलदार खड्डा महेश कुमार ने बताया कि रिहायशी इलाके में नदी कटान कर रही है।
मौके पर बचाव कार्य शुरू करा दिया गया है। ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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ग्रामीणों के अनुसार, महदेवा में हर वर्ष गंडक नदी कटान करती है। पिछले पांच वर्षों में सैकड़ों एकड़ जमीन और कई रिहायशी झोपड़ियां नदी में समा चुकी हैं। इस वर्ष भी बाढ़ का पानी कम होने के बाद कटान जारी है।
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कई दिनों से धीमी गति से हो रहा कटान मंगलवार से अचानक तेज हो गया। बृहस्पतिवार को विभागीय कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर बांस और तार लगाकर बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों का आरोप है कि बचाव कार्य शुरू होने में देरी हुई। महदेवा निवासी हरिनारायण सिंह ने बताया कि बीती रात उनका मकान नदी में समा गया। आरोप लगाया कि बचाव कार्य के नाम पर पहले खानापूर्ति होती रही और मकान नदी में समाने के बाद काम शुरू किया गया।
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कलावती देवी ने बताया कि उनकी रिहायशी झोपड़ी भी नदी में समा गई। परिवार के पास रहने का ठिकाना नहीं बचा है। वह सामान लेकर पंचायत भवन में शरण लेने जा रही हैं। उन्होंने प्रशासन से जमीन का पट्टा और आवास उपलब्ध कराने की मांग की।
मालती देवी ने बताया कि बाढ़ के दौरान करीब एक सप्ताह तक घर में पानी भरा रहा। अब घर भी नदी में समा गया है। परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। उन्होंने सरकार से जमीन और आवास दिलाने की मांग की।
तहसीलदार खड्डा महेश कुमार ने बताया कि रिहायशी इलाके में नदी कटान कर रही है।
मौके पर बचाव कार्य शुरू करा दिया गया है। ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।