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Kushinagar News: देरी से पहुंचे स्वास्थ्यकर्मी तो कहीं पेयजल के लिए परेशान रहे मरीज
Mon, 16 Dec 2024 12:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 16 Dec 2024 12:07 AM IST
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पडरौना। शासन के निर्देश पर प्रत्येक रविवार ग्रामीण क्षेत्र के पीएचसी पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में 100 के करीब डॉक्टर और 200 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी लगाने का दावा भी किया जाता है।
बावजूद इसके, जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण अब स्वास्थ्य मेले में जाने से लोग कतराने लगे हैं। इसके पीछे की वजह डॉक्टरों का समय से न आना और मिलने वाली दवाओं से आराम न होना बताया जा रहा है।
रविवार को अमर उजाला की पड़ताल के दौरान बलकुड़िया पीएचसी पर दोपहर दो बजे तक एक महिला डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट अनुपस्थित रहे। अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी देरी से पहुंचे। यहां मरीजों की संख्या भी कम रही। वहीं, करमैनी पीएचसी पर आयोजित मेले के दौरान मरीज उपचार कराने पहुंचे थे, लेकिन वे पूरे दिन पेयजल के लिए परेशान रहे। उजारनाथ प्रतिनिधि के अनुसार, करमैनी के नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले के दौरान सभी डॉक्टर समय से उपस्थित मिले। दोपहर बाद तीन बजे तक 51 मरीजों का उपचार किया जा चुका था। पीएचसी प्रभारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि मेले में पेट दर्द, सर्दी-जुकाम व सांस से पीड़ित मरीज उपचार कराने आए थे। पेयजल के लिए जल्द ही यहां लगे इंडिया मार्का टू हैंडपंप को रिबोर करा दिया जाएगा। इसके लिए पत्र भेजा गया है। अन्य जो भी कमियां है, उसे सुधार किया जा रहा है। मंसाछापर प्रतिनिधि के अनुसार, नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बलकुड़िया में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में सुबह 11.30 बजे तक कई स्वास्थ्यकर्मी गैरहाजिर रहे। यहां डॉ. विकास कुमार, पैरामेडिकल स्टाफ मुकेश तिवारी, एलटी संतोष, नेत्र परीक्षक सौरभ तिवारी व राकेश कुमार मौजूद रहे। दोपहर 12:15 बजे डॉ. समीर गुप्त और वार्ड ब्वॉय अमित कुमार पहुंचे। जबकि, दोपहर दो बजे तक फार्मासिस्ट प्रभुनाथ सिंह व डॉ. शिप्रा मिश्रा नहीं पहुंच सकी थी।
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यहां आए मरीजों का कहना था कि वे समय से उपचार कराने यहां आये थे, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी ही देरी से पहुंचे। इस वजह से उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। यही नहीं, जुलाई से अब तक मरीजों की संख्या में भी कमी आई है। जून महीने में मेले के दौरान 300 से अधिक मरीजों ने उपचार कराया। जबकि जुलाई महीने में 195, अगस्त में 206, सितंबर में 199, अक्तूबर में 175, नवंबर में 188 और दिसंबर में अब तक 119 मरीज उपचार कराने पहुंचे हैं।
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बावजूद इसके, जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण अब स्वास्थ्य मेले में जाने से लोग कतराने लगे हैं। इसके पीछे की वजह डॉक्टरों का समय से न आना और मिलने वाली दवाओं से आराम न होना बताया जा रहा है।
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रविवार को अमर उजाला की पड़ताल के दौरान बलकुड़िया पीएचसी पर दोपहर दो बजे तक एक महिला डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट अनुपस्थित रहे। अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी देरी से पहुंचे। यहां मरीजों की संख्या भी कम रही। वहीं, करमैनी पीएचसी पर आयोजित मेले के दौरान मरीज उपचार कराने पहुंचे थे, लेकिन वे पूरे दिन पेयजल के लिए परेशान रहे। उजारनाथ प्रतिनिधि के अनुसार, करमैनी के नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले के दौरान सभी डॉक्टर समय से उपस्थित मिले। दोपहर बाद तीन बजे तक 51 मरीजों का उपचार किया जा चुका था। पीएचसी प्रभारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि मेले में पेट दर्द, सर्दी-जुकाम व सांस से पीड़ित मरीज उपचार कराने आए थे। पेयजल के लिए जल्द ही यहां लगे इंडिया मार्का टू हैंडपंप को रिबोर करा दिया जाएगा। इसके लिए पत्र भेजा गया है। अन्य जो भी कमियां है, उसे सुधार किया जा रहा है। मंसाछापर प्रतिनिधि के अनुसार, नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बलकुड़िया में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में सुबह 11.30 बजे तक कई स्वास्थ्यकर्मी गैरहाजिर रहे। यहां डॉ. विकास कुमार, पैरामेडिकल स्टाफ मुकेश तिवारी, एलटी संतोष, नेत्र परीक्षक सौरभ तिवारी व राकेश कुमार मौजूद रहे। दोपहर 12:15 बजे डॉ. समीर गुप्त और वार्ड ब्वॉय अमित कुमार पहुंचे। जबकि, दोपहर दो बजे तक फार्मासिस्ट प्रभुनाथ सिंह व डॉ. शिप्रा मिश्रा नहीं पहुंच सकी थी।
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यहां आए मरीजों का कहना था कि वे समय से उपचार कराने यहां आये थे, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी ही देरी से पहुंचे। इस वजह से उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। यही नहीं, जुलाई से अब तक मरीजों की संख्या में भी कमी आई है। जून महीने में मेले के दौरान 300 से अधिक मरीजों ने उपचार कराया। जबकि जुलाई महीने में 195, अगस्त में 206, सितंबर में 199, अक्तूबर में 175, नवंबर में 188 और दिसंबर में अब तक 119 मरीज उपचार कराने पहुंचे हैं।