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देश को एक सूत्र में बांधने का नाम है शंकराचार्य : प्रो. रजनीश
Sun, 24 Mar 2024 04:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 24 Mar 2024 04:01 AM IST
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हाटा। भारतीय भाषा समिति और श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को जगदगुरु शंकराचार्य व्याख्यान माला का आयोजन हुआ। महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में हुई व्याख्यान माला के मुख्य अतिथि प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि देश को एक सूत्र में बांधने का नाम शंकराचार्य है। मुख्य वक्ता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुधाकर मिश्र रहे। इनके अलावा संस्कृत के कई अन्य विद्वानों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। दो सत्रों में कार्यक्रम चला।
प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति वर्धा विश्वविद्यालय प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि शंकराचार्य भारतीय संस्कृतिक, राष्ट्रीयता के जनक है। उन्होंने चारों दिशाओं का भ्रमण किया और अनुभव किया। यही कारण रहा कि देश की रीति और नीति को समझ सके। देश के चारों दिशाओं में पीठ की स्थापना कर एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। उनका चिंतन सामान्य रूप से उपयोगी है जो राष्ट्रीय एकता अखंडता की भावना के संचार में सहायक है।
मुख्य वक्ता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुधाकर मिश्र ने आदि शंकराचार्य के जीवन दर्शन पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका दर्शन जीवन को परमात्मा सभी जीवों में व्याप्त है। वस्तु सत्य है वही सनातन है। आत्मा और परमात्मा में भेद नहीं है। यह आचार्य शंकराचार्य का विशिष्ट दर्शन है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जल के निर्बाध रूप से बहने से वह शुद्ध रहता है। वैसे ही संत के निरंतर भ्रमण करने से वह भी शुद्ध बना रहता है।
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प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने कहा कि भारतीय जीवन और संस्कृति के लिए जगदगुरु शंकराचार्य के विचार सर्वकालिक है। उनकी समन्वय वादी विचारधारा समस्त लोगों को एक सूत्र में जोड़ती है। उनकी कृति और मति राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना के संचार में सहायक है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रो. राममूर्ति चतुर्वेदी ने कहा कि शंकराचार्य सनातन धर्म के प्रबल समर्थक थे। सनातन सर्वदा सत्य है आदि शंकर के समन्वयकारी दर्शन शुद्ध सनातन धारा में समाहित है। आचार्य शंकराचार्य ने राष्ट्रीय सांस्कृतिक बोध दिया कि चारों दिशाओं में अपनी ओर से स्थापित पीठ का दर्शन करने लिए लोग श्रद्धा पूर्वक पहुंचे।
इस दौरान शिक्षक नेता जगदीश पांडेय, पं. गंगेश्वर पांडेय, प्रबंधक अग्निवेश मणि, मोहन पांडेय, डा. राजेश कुमार चतुर्वेदी, पूर्व प्राचार्य डॉ. रामसुभाष पांडेय, आचार्य रामचंद्र पांडेय, सतेंद्र उपाध्याय, डा. संदीप कुमार पांडेय, डॉ. वशिष्ट द्विवेदी, सतीश चंद्र शुक्ल, संजय कुमार पांडेय, पिंटू उपाध्याय, अभय मणि मौजूद रहे।
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प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति वर्धा विश्वविद्यालय प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि शंकराचार्य भारतीय संस्कृतिक, राष्ट्रीयता के जनक है। उन्होंने चारों दिशाओं का भ्रमण किया और अनुभव किया। यही कारण रहा कि देश की रीति और नीति को समझ सके। देश के चारों दिशाओं में पीठ की स्थापना कर एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। उनका चिंतन सामान्य रूप से उपयोगी है जो राष्ट्रीय एकता अखंडता की भावना के संचार में सहायक है।
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मुख्य वक्ता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुधाकर मिश्र ने आदि शंकराचार्य के जीवन दर्शन पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका दर्शन जीवन को परमात्मा सभी जीवों में व्याप्त है। वस्तु सत्य है वही सनातन है। आत्मा और परमात्मा में भेद नहीं है। यह आचार्य शंकराचार्य का विशिष्ट दर्शन है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जल के निर्बाध रूप से बहने से वह शुद्ध रहता है। वैसे ही संत के निरंतर भ्रमण करने से वह भी शुद्ध बना रहता है।
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प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने कहा कि भारतीय जीवन और संस्कृति के लिए जगदगुरु शंकराचार्य के विचार सर्वकालिक है। उनकी समन्वय वादी विचारधारा समस्त लोगों को एक सूत्र में जोड़ती है। उनकी कृति और मति राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना के संचार में सहायक है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रो. राममूर्ति चतुर्वेदी ने कहा कि शंकराचार्य सनातन धर्म के प्रबल समर्थक थे। सनातन सर्वदा सत्य है आदि शंकर के समन्वयकारी दर्शन शुद्ध सनातन धारा में समाहित है। आचार्य शंकराचार्य ने राष्ट्रीय सांस्कृतिक बोध दिया कि चारों दिशाओं में अपनी ओर से स्थापित पीठ का दर्शन करने लिए लोग श्रद्धा पूर्वक पहुंचे।
इस दौरान शिक्षक नेता जगदीश पांडेय, पं. गंगेश्वर पांडेय, प्रबंधक अग्निवेश मणि, मोहन पांडेय, डा. राजेश कुमार चतुर्वेदी, पूर्व प्राचार्य डॉ. रामसुभाष पांडेय, आचार्य रामचंद्र पांडेय, सतेंद्र उपाध्याय, डा. संदीप कुमार पांडेय, डॉ. वशिष्ट द्विवेदी, सतीश चंद्र शुक्ल, संजय कुमार पांडेय, पिंटू उपाध्याय, अभय मणि मौजूद रहे।