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Kushinagar News: नियमित व्यायाम से कम होगा हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम
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पडरौना। हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम कम करने के लिए नियमित व्यायाम जरूरी है। इस वर्ष आठ सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व फिजियोथेरेपी दिवस की थीम हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन एवं पुनर्वास में फिजियोथेरेपी और शारीरिक गतिविधि की भूमिका पर केंद्रित है। फिजियोथेरेपी केवल दर्द या चोट के उपचार तक सीमित नहीं है। नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि के माध्यम से हृदय को स्वस्थ रखने तथा कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है
फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ डॉ. बरखा गुप्ता ने कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट व्यक्ति की उम्र, शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सुरक्षित एवं व्यक्तिगत व्यायाम कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने की आदत कम करना और सक्रिय जीवनशैली अपनाना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक के बाद पुनर्वास में भी फिजियोथेरेपी बेहद महत्वपूर्ण है।
इसके माध्यम से मरीज की मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, चलने-फिरने की क्षमता और दैनिक गतिविधियों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने लोगों से स्वास्थ्य समस्या होने पर योग्य फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेने की बात कही। उन्होंने बताया कि फिजियोथेरेपी एवं रिहैबिलिटेशन सेवाओं के तहत दर्द प्रबंधन, मांसपेशियों व जोड़ों की समस्या, न्यूरोलॉजिकल बीमारी और चोट के बाद पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
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फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ डॉ. बरखा गुप्ता ने कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट व्यक्ति की उम्र, शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सुरक्षित एवं व्यक्तिगत व्यायाम कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने की आदत कम करना और सक्रिय जीवनशैली अपनाना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक के बाद पुनर्वास में भी फिजियोथेरेपी बेहद महत्वपूर्ण है।
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इसके माध्यम से मरीज की मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, चलने-फिरने की क्षमता और दैनिक गतिविधियों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने लोगों से स्वास्थ्य समस्या होने पर योग्य फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेने की बात कही। उन्होंने बताया कि फिजियोथेरेपी एवं रिहैबिलिटेशन सेवाओं के तहत दर्द प्रबंधन, मांसपेशियों व जोड़ों की समस्या, न्यूरोलॉजिकल बीमारी और चोट के बाद पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
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