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Kushinagar News: नियमों काे दरकिनार कर किया था रजिस्ट्रेशन, क्राॅस चेकिंग में खुली पोल

Fri, 11 Sep 2026 02:12 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 02:12 AM IST
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Registration was done by flouting the rules; the ruse was exposed during cross-checking.
पडरौना। नियमों काे दरकिनार कर निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन के मामले में तत्कालीन नोडल अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि शिकायत के बावजूद अफसरों को भ्रामक सूचना देकर निजी अस्पतालों का संचालन हो रहा था। डीएम महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर कराई गई क्राॅस चेकिंग में इसका खुलासा हुआ है। 101 अस्पतालों की जांच में 50 अस्पतालों में डाक्टर नहीं मिले और शेष अस्पताल नियमों की अनदेखी कर संचालित पाए गए।
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सीएमओ की ओर से निजी अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। फायर ब्रिगेड की ओर से जारी एनओसी में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। ऐसे अस्पतालों को एनओसी दी गई है, जिसमें आने-जाने का एक ही रास्ता है। नियमत: ऐसे अस्पताल को फायर ब्रिगेड की ओर से एनओसी नहीं दी जा सकती है।
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अगस्त में निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान कई मरीजों की जान चली गई थी। पुलिस प्रशासन को अस्पताल से लेकर सड़क तक लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। डीएम ने स्वास्थ्य विभाग की आठ टीम बनाकर जांच का निर्देश दिया। दो दिन की छापेमारी में 101 निजी अस्पतालों की जांच की गई। 14 अस्पताल अवैध मिले है। 56 अस्पतालों में डाक्टर नहीं मिले साथ ही आने-जाने के लिए एक ही दरवाजा मिला। ओटी, ओपीडी में गंदगी के अलावा भर्ती होने वाले मरीजों का डाटा संचालक उपलब्ध नहीं करा सके।
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इन अस्पतालों संचालकों को सीएमओ की ओर से नोटिस जारी कर एक सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है। डीएम की ओर से कराई गई क्रॉस चेकिंग में पता चला कि स्वास्थ्य विभाग के जिन नोडल अफसरों पर पारदर्शीता के साथ ऑनलाइन आवेदन करने वाले अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी थी, वहीं सत्यापन के दौरान नियम को दरकिनार कर अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन कर दिया। शिकायत के बाद भी नोडल अफसर सीएमओ और उच्चाधिकारियों को गलत रिपोर्टिंग करते रहे। जांच में रजिस्टर्ड अस्पतालोंं में खामियां मिलने के बाद तत्कालीन नोडल अफसर डॉ. आरडी कुशवाहा, डॉ. आरके गुप्ता की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। 26 से अधिक ऐसे अस्पताल मिले हैं, जिसमें आने-जाने का एक ही रास्ता है। उन अस्पतालों को भी फायर ब्रिगेड की ओर से एनओसी दे दी गई है। आवेदन के लिए दिए गए एनओसी की भी स्वास्थ्य विभाग जांच कराने की तैयारी में है।

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-अस्पताल संचालकों से जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन निरस्त किया जाएगा। जहां थोड़ी-बहुत कमियां मिली हैं, उनको ठीक कराने का मौका दिया जाएगा। सत्यापन करने वाले नोडल अफसरों की भूमिका की भी जांच कराई जाएगी। रजिस्ट्रेशन के लिए लगाए गए प्रपत्रों की जांच के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखा जाएगा। -डॉ. चंद्रप्रकाश, सीएमओ कुशीनगर
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