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Kushinagar News: बुखार संग बच्चों के शरीर पर उभर रहे दाने
Thu, 30 Oct 2025 12:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 30 Oct 2025 12:48 AM IST
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नेबुआ नौरंगिया अस्पताल में बच्चों काे इलाज करतीं डॉक्टर स्मृति कुमारी।संवाद
- फोटो : भेंटुआ सीएचसी में टीकाकरण की जानकारी करती जेनेवा और न्यूयार्क से आई टीम।
कुशीनगर। इन दिनों बच्चों में बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते (दाने) उभरने की समस्या सामने आ रही है। अचानक बुखार आने के बाद बच्चों की त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल रहे हैं।
जिले के मेडिकल कॉलेज में ऐसे बीमार बच्चों की संख्या बढ़ रही है। ओपीडी में 171 बच्चों का इलाज डॉक्टरों ने बुधवार को किया।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि बच्चों में यह पित्त, रक्त की दिक्कत से होने वाला रोग है। इसमें बुखार काफी तेज होता है। लाल-लाल दाने जैसे चकत्ते शुरू होते हैं जो कि पैरों में सबसे पहले दिखाई देते हैं। दो से तीन दिन में पैरों के बाद हाथों में फैल जाते हैं और मुंह में छाले हो जाते हैं।
बुखार, शरीर में दर्द, कभी-कभी दस्त जैसे लक्षणों के साथ-साथ बच्चा खाना खाने में असहज अनुभव करता है। चकत्तों व मुंह के छालों से निकलने वाला विष छूने, साथ खाने, कपड़े और तौलिया साझा करने से तेजी से दूसरे बच्चों को संक्रमित करता है। इससे बचाव के लिए हाथ धोने के तरीकों का प्रयोग करें, बच्चों को स्कूल से आने के बाद कपड़े बदलने, हाथ और मुंह धोने के बाद ही घर में कुछ छूने दें।
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बच्चों के टूथब्रश को कैप लगाकर रखें। यदि किसी बच्चे को इस रोग के लक्षण हंै तो उसे स्कूल ट्यूशन आदि न भेजें। बच्चे को खट्टा, तीखा, बाजार का भोजन से दूर रखें।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वरूणेश राय का कहना है कि इस रोग के बच्चे चिड़चिड़े हो रहे हैं। बुखार भी परेशान कर रहा है। समय से उपचार मिलने पर बीमारी आसानी से ठीक हो जाती है।
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जिले के मेडिकल कॉलेज में ऐसे बीमार बच्चों की संख्या बढ़ रही है। ओपीडी में 171 बच्चों का इलाज डॉक्टरों ने बुधवार को किया।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि बच्चों में यह पित्त, रक्त की दिक्कत से होने वाला रोग है। इसमें बुखार काफी तेज होता है। लाल-लाल दाने जैसे चकत्ते शुरू होते हैं जो कि पैरों में सबसे पहले दिखाई देते हैं। दो से तीन दिन में पैरों के बाद हाथों में फैल जाते हैं और मुंह में छाले हो जाते हैं।
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बुखार, शरीर में दर्द, कभी-कभी दस्त जैसे लक्षणों के साथ-साथ बच्चा खाना खाने में असहज अनुभव करता है। चकत्तों व मुंह के छालों से निकलने वाला विष छूने, साथ खाने, कपड़े और तौलिया साझा करने से तेजी से दूसरे बच्चों को संक्रमित करता है। इससे बचाव के लिए हाथ धोने के तरीकों का प्रयोग करें, बच्चों को स्कूल से आने के बाद कपड़े बदलने, हाथ और मुंह धोने के बाद ही घर में कुछ छूने दें।
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बच्चों के टूथब्रश को कैप लगाकर रखें। यदि किसी बच्चे को इस रोग के लक्षण हंै तो उसे स्कूल ट्यूशन आदि न भेजें। बच्चे को खट्टा, तीखा, बाजार का भोजन से दूर रखें।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वरूणेश राय का कहना है कि इस रोग के बच्चे चिड़चिड़े हो रहे हैं। बुखार भी परेशान कर रहा है। समय से उपचार मिलने पर बीमारी आसानी से ठीक हो जाती है।