{"_id":"68fe87ed2ffb0b9efa02b12c","slug":"raphtaar-aur-ovaraloding-ban-rahee-haadason-kee-vajah-kushinagar-news-c-205-1-deo1003-147850-2025-10-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: रफ्तार और ओवरलोडिंग बन रही हादसों की वजह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: रफ्तार और ओवरलोडिंग बन रही हादसों की वजह
Mon, 27 Oct 2025 02:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 27 Oct 2025 02:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाटा। छठ पूजा के चलते दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से बिहार की ओर जाने वाली लंबी दूरी की बसों की संख्या बढ़ गई है। इन बसों की रफ्तार, ओवरलोडिंग और नियमों की अनदेखी अब मौत का सबब बनती जा रही है। जिले में एक सप्ताह के अंदर ऐसी कई घटनाएं घट चुकी हैं जिनमें लोगों की जान पर बन आई। हाईवे पर दौड़ती डबल डेकर बसें यात्रियों से खचाखच भरी रहती हैं।
चालक बिना नींद पूरी किए, बिना आराम के 12 घंटे तक स्टीयरिंग थामे हैं। इन हालातों में बस पर नियंत्रण खोना अब आम बात हो गई है। पिछले एक सप्ताह में हाटा, कसया और तमकुहीराज क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर तीन से अधिक बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें दो लोगों की जान जा चुकी है जबकि आधा दर्जन से ज्यादा घायल हुए हैं। यह सब तब हो रहा है जब परिवहन विभाग और पुलिस चौकियां हाइवे के किनारे सक्रिय बताई जाती हैं, लेकिन ओवरलोड बसें बिना रोक-टोक गुजर जा रही हैं।
छठ पूजा पर घर लौटने की आस में लोग जोखिम भरा सफर कर रहे हैं। उनकी उम्मीदें इन तेज रफ्तार और ओवरलोड बसों पर टिकी हैं जो कभी भी हादसे का कारण बन सकती हैं। प्रशासन की चुप्पी और बस संचालकों की लापरवाही मिलकर सड़कों को खतरनाक बना रही है।
विज्ञापन
क्षमता से तीन गुना सवारी ढाे रहे चालक
छठ पर्व को लेकर बिहार लोगों का घर लौटने का सिलसिला जोरों पर है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों से बसें रोजाना बिहार की ओर जा रही हैं, लेकिन सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से ज्यादातर बसें ओवरलोड हैं। बसों की क्षमता जहां 50 से 55 सवारियों की होती है, वहीं इनमें 100 से 120 लोग ठूसे जा रहे हैं। कई बसों की छत पर भी लोग बैठकर सफर कर रहे हैं। रात के अंधेरे में बसें हाईवे पर सरपट दौड़ती हैं। ओवरलोड होने के कारण उनका संतुलन बिगड़ता है, और जरा सी गलती हादसे में बदल जाती है। हाटा से लेकर कसया, तमकुहीराज तक हर दिन ऐसी बसें गुजरती देखी जा सकती हैं।
जिम्मेदारों की मिलीभगत से चल रहीं बसें
स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि इन बसों के संचालक विभिन्न विभागों को हर महीने टोकन के नाम पर रकम देते हैं, ताकि उन पर कोई कार्रवाई न हो। यही वजह है कि न तो परिवहन विभाग चेकिंग करता है और न ही पुलिस इन बसों को रोकती है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली और हरियाणा के कई निजी बस संचालक बिहार तक चलने वाली बसों को परमिट दिखाकर यूपी में चलाते हैं, जबकि उनका वैध रूट केवल लुधियाना या अम्बाला तक होता है। एक चालक ने बताया कि रोजाना का खर्च बहुत है। परमिट लेना, टैक्स देना सब मुश्किल है। ऊपर तक पैसा जाता है, तभी बसें चल पाती हैं।
विज्ञापन
चालक बिना नींद पूरी किए, बिना आराम के 12 घंटे तक स्टीयरिंग थामे हैं। इन हालातों में बस पर नियंत्रण खोना अब आम बात हो गई है। पिछले एक सप्ताह में हाटा, कसया और तमकुहीराज क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर तीन से अधिक बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें दो लोगों की जान जा चुकी है जबकि आधा दर्जन से ज्यादा घायल हुए हैं। यह सब तब हो रहा है जब परिवहन विभाग और पुलिस चौकियां हाइवे के किनारे सक्रिय बताई जाती हैं, लेकिन ओवरलोड बसें बिना रोक-टोक गुजर जा रही हैं।
विज्ञापन
छठ पूजा पर घर लौटने की आस में लोग जोखिम भरा सफर कर रहे हैं। उनकी उम्मीदें इन तेज रफ्तार और ओवरलोड बसों पर टिकी हैं जो कभी भी हादसे का कारण बन सकती हैं। प्रशासन की चुप्पी और बस संचालकों की लापरवाही मिलकर सड़कों को खतरनाक बना रही है।
विज्ञापन
क्षमता से तीन गुना सवारी ढाे रहे चालक
छठ पर्व को लेकर बिहार लोगों का घर लौटने का सिलसिला जोरों पर है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों से बसें रोजाना बिहार की ओर जा रही हैं, लेकिन सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से ज्यादातर बसें ओवरलोड हैं। बसों की क्षमता जहां 50 से 55 सवारियों की होती है, वहीं इनमें 100 से 120 लोग ठूसे जा रहे हैं। कई बसों की छत पर भी लोग बैठकर सफर कर रहे हैं। रात के अंधेरे में बसें हाईवे पर सरपट दौड़ती हैं। ओवरलोड होने के कारण उनका संतुलन बिगड़ता है, और जरा सी गलती हादसे में बदल जाती है। हाटा से लेकर कसया, तमकुहीराज तक हर दिन ऐसी बसें गुजरती देखी जा सकती हैं।
जिम्मेदारों की मिलीभगत से चल रहीं बसें
स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि इन बसों के संचालक विभिन्न विभागों को हर महीने टोकन के नाम पर रकम देते हैं, ताकि उन पर कोई कार्रवाई न हो। यही वजह है कि न तो परिवहन विभाग चेकिंग करता है और न ही पुलिस इन बसों को रोकती है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली और हरियाणा के कई निजी बस संचालक बिहार तक चलने वाली बसों को परमिट दिखाकर यूपी में चलाते हैं, जबकि उनका वैध रूट केवल लुधियाना या अम्बाला तक होता है। एक चालक ने बताया कि रोजाना का खर्च बहुत है। परमिट लेना, टैक्स देना सब मुश्किल है। ऊपर तक पैसा जाता है, तभी बसें चल पाती हैं।