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Kushinagar News: सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल है माधोपुर मठिया का रामलीला

Tue, 24 Oct 2023 01:43 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 24 Oct 2023 01:43 AM IST
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Ramleela of Madhopur Mathiya is a unique example of communal harmony.
माधोपुर मठिया गांव में रामलीला के दौरान धनुष यज्ञ का मंचन करते कलाकार। संवाद
-मठिया माधोपुर की रामलीला में गांव के ही कलाकार करते हैं अभिनय
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-भोजपुरी भाषा में वर्ष 1840 में हुई थी रामलीला मंचन की शुरुआत




कसया। विकास खंड के माधोपुर मठिया में वर्ष 1840 से रामलीला का आयोजन होता चला आ है। इस समय भी रामलीला के प्रति युवाओं का उत्साह कम नहीं है। इसमें गांव के ही कलाकार अभिनय करते हैं। यह रामलीला सामाजिक समरसता का प्रतीक है। सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल इस रामलीला का मंचन भोजपुरी भाषा में शुरू हुआ था। इसमें हिंदू-मुस्लिम और बांसफोड़ सबकी जिम्मेदारी तय है। बृहस्पतिवार की रात को रामलीला मंचन के 183वें पड़ाव की शुरुआत हनुमत पताका के साथ शुरु हो गई। आज से रामलीला शुरू हो जाएगी। रामलीला में अभिनय करने वाले कई लोग डॉक्टर, प्रोफेसर और वैज्ञानिक बनकर गांव व जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।

रामलीला, रासलीला या रंगमंच के कर्मियों की जिंदगी इस मंच से शुरू होती है और यहीं तक सिमटकर रह जाती है, कसया क्षेत्र के मठिया माधोपुर की रामलीला के कई पात्र विदेशों तक अपनी पहचान बना चुके हैं। लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले डॉ. पुनीत द्विवेदी ने तो विभिन्न क्षेत्रों में चार बार विश्व रिकॉर्ड बनाया है। अंग्रेजी हुकूमत के दौर से लेकर अब तक इस रामलीला में कई बदलाव आए। यह रामलीला सांप्रदायिक सौहार्द की भी मिसाल कही जाती है।
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खेल मैदान से शुरू होकर मंच तक पहुंची रामलीला
डॉ. इंद्रजीत मिश्र सहित अन्य लोग बताते हैं कि कुआर पंचमी को हनुमान चबूतरा तैयार होने के बाद रामचरित मानस का पाठ शुरू हुआ। मानस पाठ करने वाले ग्रामीणों ने वर्ष 1839 में पहली बार रामलीला का मंचन भोजपुरी में किया। वर्ष 1840 में रामलीला का आयोजन शुरू हुआ। दो एकड़ क्षेत्रफल में रामलीला होती थी, जहां अब मेला लगता है। उस समय लोगों को न तो खड़ी बोली आती थी और न ही वे हिंदी जानते थे। गांव में पढ़े-लिखे लोगों की संख्या गिनी चुनी ही थी।
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धनुष यज्ञ का मंचन देखकर विभोर हुए दर्शक
कसया। क्षेत्र के माधोपुर मठिया में पंचमी से चल रहे रामलीला के तीसरे दिन सोमवार को धनुष यज्ञ का मंचन किया गया। इसमें श्रोताओं ने खूब आनंद लिया। भगवान राम, भाई लक्ष्मण द्वारा संध्या वंदन किया गया।
उसके बाद जनकपुर में आयोजित सीता स्वयंवर में रावण वाणासुर संवाद और नवरस की झांकी का कार्यक्रम हुआ। सीता स्वयंवर पर जनक द्वारा शिव धनुष तोड़ने की शर्त सुनकर देश विदेश से आए तमाम राजाओं-महाराजाओं ने शिव धनुष तोड़ने का संपूर्ण प्रयास किया, लेकिन शिव धनुष को कोई राजा हिला तक नहीं पाया। इससे राजा जनक दुखी हुए और विलाप करते हुए कहने लगे कि शायद धरती वीरों से विहीन हो गई है। अब सीता का विवाह किससे होगा। राजा जनक द्वारा भरी सभा में यह कहना कि धरती वीरों से विहीन हो गई है, लक्ष्मण को नागवार गुजरा और यह वह राजा जनक पर कुपित हो गए। लक्ष्मण जी ने कुपित होकर राजा जनक से कहा कि महाराज जनक आप चुप हो जाएं। शायद आप को यह नहीं ज्ञात है कि आपकी सभा में सूर्यवंशी, रघुवंशी श्रीराम बैठे हैं। आप ऐसा कहकर हमारे सूर्यवंश का अपमान कर रहे हैं, जो हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा। प्रभु श्रीराम के रहते आपने यह कैसे कह दिया कि धरती वीरों से विहीन हो गई है। आगे कहा कि महाराज जनक, प्रभु श्रीराम के लिए यह धनुष तोड़ना कौन सा मुश्किल काम है। अंत में प्रभु श्रीराम के समझाने पर लक्ष्मण शांत हुए और गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ने शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर झट से तोड़ दिया।

अयोध्या मिश्र ने डाली थी नींव
72 वर्षीय डॉ. इंद्रजीत मिश्र और 65 वर्षीय पंडित नंदकिशोर दूबे की मानें तो अयोध्या से रामलीला देखकर गांव लौटे पंडित अयोध्या मिश्र ने श्रीरामचरित मानस का पाठ शुरू कराया था, लेकिन खिचड़ी बाबा उर्फ सुुरजन मिश्र ने रामलीला कराना शुरू किया।



न जाति का बंधन न सांप्रदायिक भेदभाव

रामलीला के आयोजन में सबकी भागीदारी तय है। बांसफोड़ समाज के लोग रावण के पुतले के लिए बातियां बनाते हैं तो मुसलमान कलाकार उसे मूर्त रूप देते हैं। राम-सीता विवाह में मुसलमानों की भागीदारी भी है। भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाते हुए हल्दी भेजकर लोगों को न्योता देना, इसे अलग पहचान दिलाता है।






रामलीला के पात्र बना चुके हैं विश्व पटल पर पहचान

इस रामलीला में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले डॉ. पुनीत द्विवेदी की देखरेख में 12 सदस्यीय टीम ने इंदौर में जेनरिक मानव कैप्सूल बनाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा वर्ष 2014 में सबसे बड़ी पेपर चेन, 2014 में लार्जेस्ट बैकवर्ड्स वॉक और वर्ष 2014 में लार्जेस्ट ह्यूमन चेन बनाकर न केवल विश्व रिकार्ड बनाया, बल्कि गिनीज बुक में भी इन रिकॉर्ड को दर्ज कराया। रामलीला में राम की भूमिका निभाने वाले डॉ. अमित द्विवेदी भारतीय उद्यमिता संस्थान (ईडीआई) अहमदाबाद में प्रोग्राम डायरेक्टर हैं। इन्होंने बताया कि अफगानिस्तान के वित्त मंत्रालय से आए अधिकारियों को देश की अर्थव्यवस्था संभालने का गुर सिखा चुके हैं। इसके अलावा स्टार्टअप प्रोग्राम को भी इन्होंने ही तैयार किया था, जिसे भारत सरकार ने लागू किया है। डॉ. अमित द्विवेदी के जाने के बाद रामलीला में राम की भूमिका निभाने वाले शिवकुमार सिंह भौतिकी से वैज्ञानिक हैं और ब्राजील में कार्यरत हैं। इससे पहले जापान में थे।
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