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Kushinagar News: चांद के दीदार के साथ शुरू हुआ रमजान, पहला रोजा आज
Sun, 02 Mar 2025 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 02 Mar 2025 12:04 AM IST
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जानकीनगर। चांद के दीदार के साथ माह-ए-रमजान का महीना शुरू हो गया। रात में होने वाली इशा की नमाज के बाद तरावीह का सिलसिला शुरू हो गया। रविवार से रोजे रखे जाएंगे।
पूरे महीने रोजे रखने के साथ इबादत की जाती है। पहले रोजे के लिए शनिवार को लोग तरावीह से पहले सेहरी की तैयारियों में मशगूल नजर आए। लोगों ने सेहरी के सामान लिए, इसके बाद तरावीह की नमाज अदा की।
रविवार से रमजान का पवित्र महीना शुरू हो रहा है। इस्लाम धर्म में रमजान के महीने को बहुत ही पवित्र और खास माना जाता। मुस्लिम समुदाय के लोग रमजान के पूरे महीने इबादत कर रोजा रखते हैं। बंजारा पट्टी के इमाम मौलाना फकरुद्दीन निजामी ने कहा किने बताया कि इस महीने में फर्ज का सवार 70 गुना बढ़ा दिया जाता है, जबकि नफिल इबादत का सवाब फर्ज के बराबर मिलता है।
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रोजा रखने के साथ आत्मसंयम, इबादत, जरूरतमंदों की मदद और सेवा करने का बेहतरीन मौका देता है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार साल 610 में इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नौवें माह में पैगंबर मोहम्मद साहब को पवित्र कुरान शरीफ उतारी गई। इसके बाद मुस्लिम धर्म के अनुयायियों पर रमजान के रोजे फर्ज किए गए। अंत में ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है।
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पूरे महीने रोजे रखने के साथ इबादत की जाती है। पहले रोजे के लिए शनिवार को लोग तरावीह से पहले सेहरी की तैयारियों में मशगूल नजर आए। लोगों ने सेहरी के सामान लिए, इसके बाद तरावीह की नमाज अदा की।
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रविवार से रमजान का पवित्र महीना शुरू हो रहा है। इस्लाम धर्म में रमजान के महीने को बहुत ही पवित्र और खास माना जाता। मुस्लिम समुदाय के लोग रमजान के पूरे महीने इबादत कर रोजा रखते हैं। बंजारा पट्टी के इमाम मौलाना फकरुद्दीन निजामी ने कहा किने बताया कि इस महीने में फर्ज का सवार 70 गुना बढ़ा दिया जाता है, जबकि नफिल इबादत का सवाब फर्ज के बराबर मिलता है।
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रोजा रखने के साथ आत्मसंयम, इबादत, जरूरतमंदों की मदद और सेवा करने का बेहतरीन मौका देता है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार साल 610 में इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नौवें माह में पैगंबर मोहम्मद साहब को पवित्र कुरान शरीफ उतारी गई। इसके बाद मुस्लिम धर्म के अनुयायियों पर रमजान के रोजे फर्ज किए गए। अंत में ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है।