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बारिश ने बढ़ाई बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें
ब्यूरो/अमर उजाला कुशीनगर
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:35 PM IST
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बारिश ने बढ़ाई बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें
- फोटो : अमर उजाला
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बृहस्पतिवार को गंडक नदी के डिस्चार्ज में तो कमी आई लेकिन सुबह से ही हो रही रिमझिम बरसात ने बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ा दीं। घर में घुटने भर तक पानी जमा होने के चलते बंधे और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण लिए लोग दिन भर बारिश में भीगते रहे। चार दिन बाद भी बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रशासन की तरफ से न तो राहत शिविर खोले गए हैं और न ही बाढ़ में फंसे लोगों के लिए भोजन और दवाई आदि का ही इंतजाम कराया गया है। बृहस्पतिवार की शाम चार बजे गंडक नदी का डिस्चार्ज 2.36 लाख क्यूसेक था। नदी का जलस्तर भैंसहा गेज पर चेतावनी बिंदु से 27 सेमी ऊपर है।
खड्डा प्रतिनिधि के अनुसार अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका वश जागकर रात गुजारने वाले बाढ़ पीड़ितों को बृहस्पतिवार की सुबह से रिमझिम बारिश का सामना करना पड़ा। नीचे बाढ़ का पानी और आसमान से बरस रहे बादल ने बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बाढ़ में फंसे लोगों को भोजन व पानी के साथ-साथ बीमारी से भी जूझना पड़ रहा है। खड्डा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर आदि गांवों के लोग मंगलवार से ही नदी में अचानक कई गुना पानी छूटने की चर्चा से हलकान हैं। बुधवार की रात नदी का डिस्चार्ज 2.90 लाख क्यूसेक था, लेकिन चर्चा थी कि रात में पांच लाख क्यूसेक से ज्यादे पानी छूटेगा। इस जानकारी के बाद लोगों ने पूरी रात जागकर गुजारी। बृहस्पतिवार की सुबह वाल्मीकिनगर बैराज से नदी में 2.48 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शाम चार बजे डिस्चार्ज घटकर 2.36 लाख क्यूसेक हो गया था। सिंचाई विभाग के अनुसार बृहस्पतिवार को खड्डा क्षेत्र में 87.2 मिलीमीटर वर्षा हुई। बाढ़ प्रभावित मरचहवा के तीन टोले एवं बसन्तपुर तथा शिवपुर जंगल टोला के कुछ लोग पड़ोसी जिला महराजगंज के सोहगीबरवा में शरण लिए हुए हैं। परंतु कुछ लोग अभी भी गांव में ही फंसे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित गांव की रहने वाली शिवकुमारी, मराछी, सावित्री, जगरानी, उर्मिला, राबड़ी, सरिता, सुनिता, डोमनी, तजरुन आदि ने बताया कि घरों में पानी भरा होने के चलते लोगों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उर्मिला समेत कई लोग बुखार से पीड़ित हैं, तजरुन का पैर टूटा है लेकिन ये लोग इलाज के लिए बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। वहीं जवाहिर, ओमबाला, नरेश, नंदलाल, सुदर्शन आदि का कहना है कि लगातार पानी में रहने के चलते लोगों के पैर सडने लगे हैं। बाढ़ के पानी के साथ आए जहरीले जीव-जंतुओं से भी बचाव करना पड़ रहा है। एन एच 28 बी के बगल में महदेवा और सालिकपुर गांव में भी बाढ़ का पानी भर गया है। फसल भी बर्बाद हो रही है।
जटहां बाजार प्रतिनिधि के अनुसार गंडक नदी के बीच की खाली जमीन पर प्रशासन की तरफ से बसाए गए गांव गणेश नगर में भी पानी भर गया है। इस गांव में बसे कटाई भरपुरवा के लोग वापस अपने गांव लौट आए हैं।
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तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार गंडक नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि से पिपराघाट गांव के बाढ़ प्रभावित पुरवों की स्थिति और बिगड़ गई है। दहारी टोला और जोगनी टोला में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। गंडक नदी निर्माणाधीन बांध के पास पहुंच गई है। बाढ़ प्रभावित उपाध्याय टोला, देवनारायन टोला, हनुमान टोला, बीन टोली, चौकी टोला, मुसहरी टोला, जयपुर, गोलाघाट, नरवाजोत समेत कई पुरवों में पानी और बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को दहारी टोला के बंगाली, रामआशीष, मोती, गोरख, सुदामा, जहांतारा, जर्नादन, विश्वनाथ, सकलदेव, नथुनी सहित कई लोगों के घरों में बाढ का पानी भर गया है। जोगनी टोला के धरीक्षण, जितेंद्र, यमुना, बच्चा, नन्हक, ठाकुर आदि के घरों में भी बाढ़ का पानी भरा है। सड़कों पर पानी के तेज बहाव के चलते आवागमन ठप है। नदी ने एपी तटबंध पर कई जगह दबाव बना रखा है। बाढ़ खंड के अभियंता व राजस्व विभाग के कर्मचारी क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात किए गए हैं।
खड्डा प्रतिनिधि के अनुसार अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका वश जागकर रात गुजारने वाले बाढ़ पीड़ितों को बृहस्पतिवार की सुबह से रिमझिम बारिश का सामना करना पड़ा। नीचे बाढ़ का पानी और आसमान से बरस रहे बादल ने बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बाढ़ में फंसे लोगों को भोजन व पानी के साथ-साथ बीमारी से भी जूझना पड़ रहा है। खड्डा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर आदि गांवों के लोग मंगलवार से ही नदी में अचानक कई गुना पानी छूटने की चर्चा से हलकान हैं। बुधवार की रात नदी का डिस्चार्ज 2.90 लाख क्यूसेक था, लेकिन चर्चा थी कि रात में पांच लाख क्यूसेक से ज्यादे पानी छूटेगा। इस जानकारी के बाद लोगों ने पूरी रात जागकर गुजारी। बृहस्पतिवार की सुबह वाल्मीकिनगर बैराज से नदी में 2.48 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शाम चार बजे डिस्चार्ज घटकर 2.36 लाख क्यूसेक हो गया था। सिंचाई विभाग के अनुसार बृहस्पतिवार को खड्डा क्षेत्र में 87.2 मिलीमीटर वर्षा हुई। बाढ़ प्रभावित मरचहवा के तीन टोले एवं बसन्तपुर तथा शिवपुर जंगल टोला के कुछ लोग पड़ोसी जिला महराजगंज के सोहगीबरवा में शरण लिए हुए हैं। परंतु कुछ लोग अभी भी गांव में ही फंसे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित गांव की रहने वाली शिवकुमारी, मराछी, सावित्री, जगरानी, उर्मिला, राबड़ी, सरिता, सुनिता, डोमनी, तजरुन आदि ने बताया कि घरों में पानी भरा होने के चलते लोगों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उर्मिला समेत कई लोग बुखार से पीड़ित हैं, तजरुन का पैर टूटा है लेकिन ये लोग इलाज के लिए बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। वहीं जवाहिर, ओमबाला, नरेश, नंदलाल, सुदर्शन आदि का कहना है कि लगातार पानी में रहने के चलते लोगों के पैर सडने लगे हैं। बाढ़ के पानी के साथ आए जहरीले जीव-जंतुओं से भी बचाव करना पड़ रहा है। एन एच 28 बी के बगल में महदेवा और सालिकपुर गांव में भी बाढ़ का पानी भर गया है। फसल भी बर्बाद हो रही है।
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जटहां बाजार प्रतिनिधि के अनुसार गंडक नदी के बीच की खाली जमीन पर प्रशासन की तरफ से बसाए गए गांव गणेश नगर में भी पानी भर गया है। इस गांव में बसे कटाई भरपुरवा के लोग वापस अपने गांव लौट आए हैं।
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तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार गंडक नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि से पिपराघाट गांव के बाढ़ प्रभावित पुरवों की स्थिति और बिगड़ गई है। दहारी टोला और जोगनी टोला में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। गंडक नदी निर्माणाधीन बांध के पास पहुंच गई है। बाढ़ प्रभावित उपाध्याय टोला, देवनारायन टोला, हनुमान टोला, बीन टोली, चौकी टोला, मुसहरी टोला, जयपुर, गोलाघाट, नरवाजोत समेत कई पुरवों में पानी और बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को दहारी टोला के बंगाली, रामआशीष, मोती, गोरख, सुदामा, जहांतारा, जर्नादन, विश्वनाथ, सकलदेव, नथुनी सहित कई लोगों के घरों में बाढ का पानी भर गया है। जोगनी टोला के धरीक्षण, जितेंद्र, यमुना, बच्चा, नन्हक, ठाकुर आदि के घरों में भी बाढ़ का पानी भरा है। सड़कों पर पानी के तेज बहाव के चलते आवागमन ठप है। नदी ने एपी तटबंध पर कई जगह दबाव बना रखा है। बाढ़ खंड के अभियंता व राजस्व विभाग के कर्मचारी क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात किए गए हैं।