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Kushinagar News: जिला अस्पताल में शुरू हुई मानसिक रोग ओपीडी
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लोगों का इलाज और सुझाव देते मनोरोग चिकित्सक डॉ. उज्ज्वल सिंह, साथ में मौजूद उनकी टीम। संवाद
- फोटो : KUSHINAGAR
जिला अस्पताल में शुरू हुई मानसिक रोग ओपीडी
- सिरदर्द, उदासी, घबराहट से परेशान दस-बारह मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं इलाज कराने
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिला अस्पताल में मानसिक रोग ओपीडी चालू हो गई है। मनोरोग चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, नर्स और काउंसलर की तैनाती की गई है। लगभग एक पखवारे से चल रही इस ओपीडी में सिरदर्द, बेचैनी, उदासी और घबराहट से परेशान दस से बारह मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं।
इसके अलावा लोगों में मनोरोग के प्रति जागरूकता के लिए टीम को क्षेत्र में भी भेजा जा रहा है, ताकि उन्हें गांव में ही चिकित्सीय सेवा और परामर्श मिल सके।
जिला अस्पताल की ओपीडी में जनवरी से मानसिक रोग ओपीडी भी चालू हो गई है। मरीजों के इलाज के लिए मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. उज्जवल सिंह को तैनात किया गया है। कक्ष संख्या नौ उनके लिए आरक्षित किया गया है। इसके अलावा कक्ष संख्या 13 में मानसिक रोग विभाग के अन्य स्टॉफ की तैनाती की गई है, जिसमें नैदानिक मनोवैज्ञानिक (क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट) अमृता कुमारी, मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता योगिता कुशवाहा, मनोरोग नर्स बृजकिशोर शामिल हैं।
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डॉ. उज्जवल सिंह ने बताया कि अभी सिरदर्द, उदासी, बेचैनी और घबराहट से पीड़ित मरीज आ रहे हैं। औसतन दस-बारह मरीज प्रतिदिन आते हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी के दिनों में इस तरह के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। उनका कहना था कि गर्मी के दिनों में दिमाग में कुछ रसायनों का स्राव होता है, जिससे घबराहट बढ़ जाती है। ऐसे मरीजों का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है।
मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता योगिता कुशवाहा ने बताया कि अधिकांश मानसिक रोगियों को दवा के साथ साइकोथेरेपी (काउंसलिंग) की जरूरत होती है। जो लोग लंबे समय तक उदास रहते हैं, चिंतित या नाराज महसूस करते हैं, वे इलाज कराकर इस बीमारी से निजात पा सकते हैं।
कसया और तमकुहीराज सीएचसी में भी तैनाती
जनपद के दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी मनोरोग चिकित्सक तैनात किए गए हैं। तमकुहीराज सीएचसी में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद कुमार गुप्ता और कसया सीएचसी में डॉ. संजय जायसवाल को तैनात किया गया है। ये डॉक्टर मनोरोगियों का इलाज कर रहे हैं।
कोट
मनोरोग विशेषज्ञ सहित अन्य स्टॉफ तैनात कर दिए गए हैं। टीम को दो-तीन दिन फील्ड में भी जाकर जागरूक करना होता है। अभी यह टीम 12 जनवरी को कप्तानगंज भेजी गई थी। इसके अलावा कुबेरस्थान, फाजिलनगर में भी यह टीम जन जागरूकता के लिए भेजी जा चुकी है।
- डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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- सिरदर्द, उदासी, घबराहट से परेशान दस-बारह मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं इलाज कराने
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिला अस्पताल में मानसिक रोग ओपीडी चालू हो गई है। मनोरोग चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, नर्स और काउंसलर की तैनाती की गई है। लगभग एक पखवारे से चल रही इस ओपीडी में सिरदर्द, बेचैनी, उदासी और घबराहट से परेशान दस से बारह मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं।
इसके अलावा लोगों में मनोरोग के प्रति जागरूकता के लिए टीम को क्षेत्र में भी भेजा जा रहा है, ताकि उन्हें गांव में ही चिकित्सीय सेवा और परामर्श मिल सके।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में जनवरी से मानसिक रोग ओपीडी भी चालू हो गई है। मरीजों के इलाज के लिए मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. उज्जवल सिंह को तैनात किया गया है। कक्ष संख्या नौ उनके लिए आरक्षित किया गया है। इसके अलावा कक्ष संख्या 13 में मानसिक रोग विभाग के अन्य स्टॉफ की तैनाती की गई है, जिसमें नैदानिक मनोवैज्ञानिक (क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट) अमृता कुमारी, मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता योगिता कुशवाहा, मनोरोग नर्स बृजकिशोर शामिल हैं।
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डॉ. उज्जवल सिंह ने बताया कि अभी सिरदर्द, उदासी, बेचैनी और घबराहट से पीड़ित मरीज आ रहे हैं। औसतन दस-बारह मरीज प्रतिदिन आते हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी के दिनों में इस तरह के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। उनका कहना था कि गर्मी के दिनों में दिमाग में कुछ रसायनों का स्राव होता है, जिससे घबराहट बढ़ जाती है। ऐसे मरीजों का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है।
मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता योगिता कुशवाहा ने बताया कि अधिकांश मानसिक रोगियों को दवा के साथ साइकोथेरेपी (काउंसलिंग) की जरूरत होती है। जो लोग लंबे समय तक उदास रहते हैं, चिंतित या नाराज महसूस करते हैं, वे इलाज कराकर इस बीमारी से निजात पा सकते हैं।
कसया और तमकुहीराज सीएचसी में भी तैनाती
जनपद के दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी मनोरोग चिकित्सक तैनात किए गए हैं। तमकुहीराज सीएचसी में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद कुमार गुप्ता और कसया सीएचसी में डॉ. संजय जायसवाल को तैनात किया गया है। ये डॉक्टर मनोरोगियों का इलाज कर रहे हैं।
कोट
मनोरोग विशेषज्ञ सहित अन्य स्टॉफ तैनात कर दिए गए हैं। टीम को दो-तीन दिन फील्ड में भी जाकर जागरूक करना होता है। अभी यह टीम 12 जनवरी को कप्तानगंज भेजी गई थी। इसके अलावा कुबेरस्थान, फाजिलनगर में भी यह टीम जन जागरूकता के लिए भेजी जा चुकी है।
- डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल