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Kushinagar News: केले और इसके रेशे से बने उत्पाद बढ़ा रहे जिले की पहचान, तैयार किए जा रहे उत्पाद

Sun, 24 Sep 2023 12:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 24 Sep 2023 12:59 AM IST
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Products made from banana and its fiber are increasing the identity of the district, products are being prepared
केले के रेशे से बने उत्पाद। संवाद
- केले के रेशे से बने आभूषण और बोर्ड ने ट्रेड फेयर शो में बनाई जगह
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- केले के रेशे से बनाई जा रहीं दैनिक उपयोग की वस्तुएं
- एक जिला एक उत्पाद में शामिल है केला और इसके रेशे से बने उत्पाद


कुशीनगर। जिले में बहुतायत में उत्पादन को देखते हुए एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में चयनित केला तथा इसके रेशे से बने उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का प्रशासन स्तर पर जोर-शोर से प्रयास किया जा रहा है। कुछ लोगों ने इसमें रुचि दिखाई, जिसकी वजह से इसकी पहचान बढ़ रही है। केले के रेशे से तैयार आभूषण, डोरमैट व बोर्ड को नोएडा में चल रहे ट्रेड फेयर कार्यक्रम में पसंद किया गया है। वहां शनिवार को 300 आभूषण और एक हजार डोरमैट बिक गए।
केले के रेशे से उत्पाद तैयार कर पहचान दिलाने का काम करीब तीन साल पहले तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के हरिहरपुर निवासी रवि कुमार ने किया। उन्होंने अपने घर पर इसका मिनी कारखाना लगाया और आस-पास की महिलाओं को प्रशिक्षित कर इससे जोड़ा। धीरे-धीरे इसकी पहचान ने आकार लिया और यह एक जिला एक उत्पाद में शामिल कर लिया गया। उसके बाद शासन-प्रशासन के स्तर से इसे बढ़ावा देने की कोशिश शुरू हो गई। इसके बाद दुदही के बांसगांव में बमबहादुर नाम के व्यक्ति ने इस तरह के उत्पाद बनाने शुरू किए। कुछ महिलाओं को ऋण दिलाया। उत्पाद बनने शुरू हो गए थे, लेकिन कुछ दिनों बाद बंद हो गया, लेकिन कुछ अन्य जगहों पर यह काम जारी है। तमकुहीरोड में अनिता राय नाम की महिला केले से अचार, मुरब्बा, जूस, चिप्स, पाउडर पैक कर बेचती हैं। वह बहुद्देशीय शिविरों और बड़े कार्यक्रमों में अपने उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाती हैंं। तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के ही चखनी खास में कमलेश देवी केले के रेशे से डोरमैट, चप्पल, सजावट के सामान, पर्स, मेजपोश आदि तैयार कर बेचती हैं।
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केले के रेशे से पहचान दिलाने में जुटीं निभा
तमकुहीराज। केले के रेशे से बने उत्पादों को स्थानीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास जारी है। तमकुहीराज के चखनी खास की निवासी निभा गोंड गांव में सरस्वती प्रेरणा ग्राम संगठन के माध्यम से करीब 20 महिलाओं के साथ केले के रेशे से दैनिक उपयोग की वस्तुएं बनाती हैं और बेची जाती हैं। इससे होने वाली आय को समूह की महिलाओं में वितरित कर उन्हें भी आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं।
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बकौल निशा गोंड केले के रेशे को निकालने की मशीन अभी संगठन के पास नहीं है। इसलिए केले के रेशे को जागृति उद्यम केंद्र खरीदा जाता है। उसके बाद रेशे की चोटी बनाई जाती है। रेशे की चोटी को जरूरत के रंगों के हिसाब से रंगा जाता है। फिर सुई-धागे की मदद से दैनिक उपयोग की वस्तुएं बनाई जाती हैं। इसमे पर्स, योग करने की चटाई, चप्पल, पूजा आसन, कान्हा जी का पालना, फूलदान, कैरीबैग आदि बनाया जाता है। प्रत्येक सामान को बनाने की लागत 200-250 रुपये तक आती है। उन्हें 500-600 रुपये तक बेचा जाता है। संगठन के लोगों की ओर से बनाए गए सामान नावार्ड और एनआरएलएम की मदद से विभिन्न मेले में बेचे जाते हैं। विभिन्न महोत्सवों और सरस मेलों में प्रतिभाग करने के लिए संगठन के सदस्यों को भेजा जाता है। इन सदस्यों के लिए यात्रा, निवास, दुकान और भोजन की व्यवस्था निशुल्क होती है। संगठन को बैंक से सस्ते दर पर कर्ज भी मिल जाता है, जिसके कारण पूंजी की दिक्कत नहीं होती है। संगठन के सामान गोरखपुर महोत्सव, कपिलवस्तु महोत्सव आदि में बेचे जा चुके हैं।

कुशीनगर के उत्पाद की नोएडा में चल रहे ट्रेड फेयर कार्यक्रम में तारीफ
केले के रेशे से बने आभूषण, डोरमैट और बोर्ड को नोएडा में चल रहे ट्रेड फेयर कार्यक्रम में चयनित किया गया है। इस कार्यक्रम में शामिल होने गए तुहिन श्रीवास्तव, गोरखपुर, कुशीनगर के मोतीचक, सुकरौली और तमकुही ब्लॉक में उत्पाद तैयार करते हैं। वह केले के रेशे से बने आभूषण, डोरमैट, प्लाईवुड के समान बोर्ड, सेनेटरी पेड, सजावट के सामान आदि बनाते हैं। इन कार्यों में राजकीय औद्योगिक आस्थान तमकुहीराज में उद्योग विभाग की ओर से भूखंड दिया गया है।
तुहिन श्रीवास्तव ने बताया कि शनिवार को कार्यक्रम में उनके आभूषण, डोरमैट और अन्य उत्पादों को काफी पसंद किया गया। 300 आभूषण और 1000 डोरमैट बिक गए। कुशीनगर के सुकरौली ब्लॉक में केला के रेशा से तैयार आभूषण व डोरमेट बनाते हैं। मोतीचक ब्लॉक के जमुआन में रियूजिबल सेनेटरी पैड तैयार किया जाता है। उनकी जेपीएम सोसाइटी गोरखपुर के कुसुम्ही में है, वहां इससे जुड़े उत्पाद तैयार किए जाते हैं।


उद्योग विभाग के उपायुक्त बोले
उद्योग विभाग के उपायुक्त अभय सुमन ने बताया कि केला और इसके रेशे से बने उत्पादों को ओडीओपी में शामिल किया गया है। इसे बढ़ावा देने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कुछ जगह इसके उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही इसके प्रचार प्रसार और बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास भी जारी है।
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