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Kushinagar News: अफसरों की शह पर अवैध वसूली करने वाले निजी चालक रडार पर
Fri, 12 Dec 2025 12:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 12 Dec 2025 12:54 AM IST
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हाटा (कुशीनगर)। सेठी ढाबा टोकन प्रकरण में कुशीनगर समेत चार जिलों के एआरटीओ कार्यालयों और सचल दल के साथ चलने वाले प्राइवेट कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। इसमें देवरिया, गोरखपुर और संतकबीरनगर जिलों के एआरटीओ कार्यालय और उनके सचल दल भी शामिल हैं। यह मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। पुलिस का कहना है कि आरटीओ और जीएसटी के सचल दल के साथ चलने वाले निजी चालकों को ट्रेस किया गया है, जल्द ही इनकी गिरफ्तारी कर ली जाएगी।
चारों जिलों में इस मामले के संबंध में बताया जा रहा है कि सचल दल में शामिल कुछ प्राइवेट कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गई हैं। यह वे लोग हैं जो जांच टीमों के साथ मौके पर मौजूद तो रहते थे, लेकिन इनका विभाग से कोई औपचारिक संबंध नहीं था। इन्हीं प्राइवेट कर्मचारियों के माध्यम से टोकन सिस्टम को मैनेज करने करने का काम किया जाता था।
जांच अधिकारी बताते हैं कि कुछ व्यक्तियों के नाम स्पष्ट रूप से सामने आए हैं, परंतु मामले को देखते हुए अभी इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। पुलिस फिलहाल इन सभी के कॉल डिटेल, बैंक खातों के लेनदेन को खंगाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जल्दबाजी से बचा जा रहा है, क्योंकि मामला कई जिलों तक फैला है। जैसे-जैसे तथ्य सामने आएंगे, कार्रवाई भी उसी अनुरूप आगे बढ़ाई जाएगी।
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इस बीच चौंकाने वाली जानकारी यह है कि कुशीनगर के सचल दल के साथ नियमित रूप से चलने वाला एक प्राइवेट व्यक्ति कुछ दिनों से दिखाई नहीं दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह वही व्यक्ति है जिसका नाम टोकन सिस्टम की मदद में संदिग्ध रूप से सामने आया था। उसके अचानक अंडरग्राउंड होने से पुलिस को आशंका है कि वह जांच से बचने की कोशिश कर रहा है।
पुलिस का मानना है कि टोकन वाले वाहनों को बिना रोकटोक जाने देने की प्रक्रिया रातों-रात नहीं बनी थी। टीम अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि जांच चौकियों पर तैनात कर्मी महीनों तक टोकन लगे वाहनों की अनदेखी कैसे करते रहे। जांच में यह भी सामने आया है कि जिन रूटों पर टोकन का प्रभाव था, वहां जांच टीमों की सक्रियता केवल उन्हीं वाहनों तक सीमित थी जो टोकन नहीं लेते थे। ऐसे में माना जा रहा है कि है कि यह मामला केवल ढाबा संचालक तक नहीं रुकेगा। जांच आगे बढ़ेगी तो संबंधित विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट होगी।
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चारों जिलों में इस मामले के संबंध में बताया जा रहा है कि सचल दल में शामिल कुछ प्राइवेट कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गई हैं। यह वे लोग हैं जो जांच टीमों के साथ मौके पर मौजूद तो रहते थे, लेकिन इनका विभाग से कोई औपचारिक संबंध नहीं था। इन्हीं प्राइवेट कर्मचारियों के माध्यम से टोकन सिस्टम को मैनेज करने करने का काम किया जाता था।
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जांच अधिकारी बताते हैं कि कुछ व्यक्तियों के नाम स्पष्ट रूप से सामने आए हैं, परंतु मामले को देखते हुए अभी इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। पुलिस फिलहाल इन सभी के कॉल डिटेल, बैंक खातों के लेनदेन को खंगाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जल्दबाजी से बचा जा रहा है, क्योंकि मामला कई जिलों तक फैला है। जैसे-जैसे तथ्य सामने आएंगे, कार्रवाई भी उसी अनुरूप आगे बढ़ाई जाएगी।
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इस बीच चौंकाने वाली जानकारी यह है कि कुशीनगर के सचल दल के साथ नियमित रूप से चलने वाला एक प्राइवेट व्यक्ति कुछ दिनों से दिखाई नहीं दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह वही व्यक्ति है जिसका नाम टोकन सिस्टम की मदद में संदिग्ध रूप से सामने आया था। उसके अचानक अंडरग्राउंड होने से पुलिस को आशंका है कि वह जांच से बचने की कोशिश कर रहा है।
पुलिस का मानना है कि टोकन वाले वाहनों को बिना रोकटोक जाने देने की प्रक्रिया रातों-रात नहीं बनी थी। टीम अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि जांच चौकियों पर तैनात कर्मी महीनों तक टोकन लगे वाहनों की अनदेखी कैसे करते रहे। जांच में यह भी सामने आया है कि जिन रूटों पर टोकन का प्रभाव था, वहां जांच टीमों की सक्रियता केवल उन्हीं वाहनों तक सीमित थी जो टोकन नहीं लेते थे। ऐसे में माना जा रहा है कि है कि यह मामला केवल ढाबा संचालक तक नहीं रुकेगा। जांच आगे बढ़ेगी तो संबंधित विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट होगी।