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Kushinagar News: फ्रीज बैंक खातों से साइबर अपराध की कड़ियां जोड़ रही पुलिस
Mon, 09 Jun 2025 12:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 09 Jun 2025 12:34 AM IST
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पडरौना। साइबर ठगी के मास्टरमाइंड राकेश ने 50 से अधिक लोगों के बैंक खाते में जालसाजी की रकम भेजा है। इससे उनका खाता फ्रीज हो गया है। इसमें खड्डा के अलावा पडरौना और गोरखपुर के भी बैंक खाते शामिल हैं। साइबर अपराध में रंजीत समेत चार को जेल भेजने के बाद पुलिस की जांच में कई मामले सामने आए हैं। जालसाज राकेश समेत इस गैंग में शामिल अन्य सदस्य फरार हैं। जालसाजों की ओर से जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई है, उसकी मदद से साइबर अपराध की कड़ी जोड़ने में पुलिस जुटी है। चाइनीज गेम के अलावा विदेशों से भी पैसा ऑनलाइन भेजा गया है। जालसाजों तक पहुंचने के लिए पुलिस दूसरे प्रदेशोें की पुलिस से संपर्क में है। खड्डा थाना क्षेत्र के सिसवा मनिराज गांव निवासी राकेश पाल कम उम्र में ही साइबर अपराध से जुड़ गया था। पहले उसने घर की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए पीसीओ खोला था। इसके बाद सिम कार्ड बेचने के दौरान साइबर अपराध से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क में आया।
सूत्रों की मानें तो वह स्थानीय के लोगों के नाम पर सिम कार्ड लेकर साइबर अपराधियों के हाथों बेचता था। दिल्ली जाने के बाद साइबर अपराधियों के मुख्य गैंग में शामिल हो गया। खड्डा क्षेत्र के 20 से अधिक लोगों को साइबर अपराध का तरीका साथ रखकर सिखाया। रंजित यादव समेत चार लोगों के जेल जाने के बाद कई लोगों के बैंक खाता फ्रीज होने की शिकायत पुलिस तक पहुंची।
पुलिस इसकी जांच की तो पता चला कि राकेश और इसके गैंग के सदस्य काम कराने के बाद लोगों को भुगतान ऑनलाइन करते थे। जालसाजी की रकम जिसके बैंक खाता में गया वह खाता फ्रीज हो गया। इस तरह के 50 से अधिक लोगों के खाते फ्रीज हुए हैं। यह मामले दूसरे जिलों में भी हैं। इसके अलावा यह गैंग लोगों को रुपये देकर बैंक खाता खरीदने या उसमें जालसाजी की रकम मंगाने का भी काम करता है। कुछ वर्षों में ही साइबर अपराध से जुड़े जालसाजों की आर्थिक स्थिति इस तरह बदली कि लोग भी चौंक गए। जिसके पास बिना काम किए पेट भरने का इंतजाम नहीं था। वे गांव में लोगों की जमीन रेहन लेने लगे। पुलिस ऐसे कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। अभी तक जो भी बैंक खाते फ्रीज हुए हैं, उस खाते के माध्यम से पुलिस साइबर अपराध की कड़ी जोड़ने के अलावा इसमें शामिल सरगना तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। सूत्रों की मानें तो राकेश पाल पुलिस के हाथ लग जाए तो साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।
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सूत्रों की मानें तो वह स्थानीय के लोगों के नाम पर सिम कार्ड लेकर साइबर अपराधियों के हाथों बेचता था। दिल्ली जाने के बाद साइबर अपराधियों के मुख्य गैंग में शामिल हो गया। खड्डा क्षेत्र के 20 से अधिक लोगों को साइबर अपराध का तरीका साथ रखकर सिखाया। रंजित यादव समेत चार लोगों के जेल जाने के बाद कई लोगों के बैंक खाता फ्रीज होने की शिकायत पुलिस तक पहुंची।
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पुलिस इसकी जांच की तो पता चला कि राकेश और इसके गैंग के सदस्य काम कराने के बाद लोगों को भुगतान ऑनलाइन करते थे। जालसाजी की रकम जिसके बैंक खाता में गया वह खाता फ्रीज हो गया। इस तरह के 50 से अधिक लोगों के खाते फ्रीज हुए हैं। यह मामले दूसरे जिलों में भी हैं। इसके अलावा यह गैंग लोगों को रुपये देकर बैंक खाता खरीदने या उसमें जालसाजी की रकम मंगाने का भी काम करता है। कुछ वर्षों में ही साइबर अपराध से जुड़े जालसाजों की आर्थिक स्थिति इस तरह बदली कि लोग भी चौंक गए। जिसके पास बिना काम किए पेट भरने का इंतजाम नहीं था। वे गांव में लोगों की जमीन रेहन लेने लगे। पुलिस ऐसे कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। अभी तक जो भी बैंक खाते फ्रीज हुए हैं, उस खाते के माध्यम से पुलिस साइबर अपराध की कड़ी जोड़ने के अलावा इसमें शामिल सरगना तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। सूत्रों की मानें तो राकेश पाल पुलिस के हाथ लग जाए तो साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।

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