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Kushinagar News: काव्य शास्त्र को भारतीय परंपरा और परिवेश का मिश्रण बताया
Fri, 26 Apr 2024 05:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 26 Apr 2024 05:10 AM IST
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फाजिलनगर में संगोष्ठी को सम्बोधित करते कुलपति हरेराम त्रिपाठी।
फाजिलनगर। एसबीएम पीजी काॅलेज में बृहस्पतिवार को संस्कृत और हिंदी विभाग की तरफ से संगोष्ठी हुई। इसमें काव्यशास्त्र की परंपरा विषय चर्चा की गई। काव्य शास्त्र को भारतीय परंपरा और परिवेश का मिश्रण बताया गया।
मुख्य वक्ता कवि गुरुकुल कालीदास संस्कृत विश्वविद्यालय नागपुर महाराष्ट्र के कुलपति प्रोफेसर हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि काव्य शास्त्र काव्य और साहित्य का दर्शन व विज्ञान है। प्रथम शताब्दी के पूर्व आचार्य भरत ने रस की प्रधानता पर जिस रसोत्पत्ति का विचार दिया था, उसी को समयानुसार आचार्यों ने अपने-अपने मतानुसार नए वाद, नई परंपरा और संप्रदायों में विकसित किया। उन्होंने काव्य शास्त्र को भारतीय परंपरा और परिवेश का मिश्रण बताया। विशिष्ट अतिथि शशि शर्मा ने कहा कि काव्य में चमत्कार का उदय औचित्य से ही संभव है। जो वस्तु उसके अनुकूल होती है, उसे लोग उचित कहते हैं। गोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रबंधक शक्तिप्रकाश दीक्षित और संचालन संस्कृत विभागाध्यक्ष डाॅ. कृष्णचंद चौरसिया ने किया। प्राचार्य डाॅ. आरपी शाही ने तिथियों के प्रति आभार जताया। इस दौरान डाॅ. ज्योत्सना पांडेय, डाॅ. रविंद्रनाथ त्रिपाठी, डाॅ. सुकेश, रवि प्रकाश, अमरजीत यादव, गिरिजेश गौड़, ब्रजेश वर्मा, रितेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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मुख्य वक्ता कवि गुरुकुल कालीदास संस्कृत विश्वविद्यालय नागपुर महाराष्ट्र के कुलपति प्रोफेसर हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि काव्य शास्त्र काव्य और साहित्य का दर्शन व विज्ञान है। प्रथम शताब्दी के पूर्व आचार्य भरत ने रस की प्रधानता पर जिस रसोत्पत्ति का विचार दिया था, उसी को समयानुसार आचार्यों ने अपने-अपने मतानुसार नए वाद, नई परंपरा और संप्रदायों में विकसित किया। उन्होंने काव्य शास्त्र को भारतीय परंपरा और परिवेश का मिश्रण बताया। विशिष्ट अतिथि शशि शर्मा ने कहा कि काव्य में चमत्कार का उदय औचित्य से ही संभव है। जो वस्तु उसके अनुकूल होती है, उसे लोग उचित कहते हैं। गोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रबंधक शक्तिप्रकाश दीक्षित और संचालन संस्कृत विभागाध्यक्ष डाॅ. कृष्णचंद चौरसिया ने किया। प्राचार्य डाॅ. आरपी शाही ने तिथियों के प्रति आभार जताया। इस दौरान डाॅ. ज्योत्सना पांडेय, डाॅ. रविंद्रनाथ त्रिपाठी, डाॅ. सुकेश, रवि प्रकाश, अमरजीत यादव, गिरिजेश गौड़, ब्रजेश वर्मा, रितेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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