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Kushinagar News: गेट के बाहर से ही बहला ले जा रहे मरीज
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महराजगंज। मरीज माफियाओं के खिलाफ सख्ती बढ़ी तो उन्होंने अपने धंधे का तरीका ही बदल लिया। जिला प्रशासन की छापे के बाद से ही दलालों ने अस्पताल में नहीं बल्कि अस्पताल के बाहर अपना नेटवर्क फैला लिया है। वे मरीजों व तीमारदारों को देखते रहते हैं। गेट के बाहर आते ही उनको अपने चंगुल में फंसाकर अपने चहेते सेंटर पर ले जाकर जांच कराते हैं। इसमें दिनभर में मोटी रकम तैयार हो जाती है। वहीं मरीजों को महंगा इलाज के लिए कराने में आर्थिक दुश्वारियां झेलनी पड़ती है।
जिला अस्पताल के लैब में एक दिन में 100 से अधिक जांच होती है। वहीं दोगुनी संख्या में मरीज जांच कराने पहुंचते हैं। यही हाल अल्ट्रासाउंड व सिटी स्कैन में भी है।
औसतन 40 से 50 अल्ट्रासाउंड एक दिन में होता है। यहां भी दोगुनी संख्या में मरीज जांच कराने पहुंचते हैं। सिटी स्कैन में तो मरीजों से 100-150 मरीज जांच कराने पहुंचते हैं। 70 से 80 के बीच सीटी स्कैन होता है। मरीजों की संख्या अधिक होने से उनको अस्पताल में दूसरे दिन जांच कराने आना पड़ता है। इसका फायदा मरीज माफिया उठाते हैं। मरीज पर्चा लेकर जैसे ही बाहर आते हैं दलाल उन्हें अपनी बातों में फंसा लेते हैं।
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मंगलवार को जिला अस्पताल के सामने सर्विस लेने के पास एक युवक खड़ा था। वह फोन पर किसी से बात कर रहा था, उसकी बातचीत से समझ में आ गया था की वह मरीज की तलाश में हैं। क्योंकि फोन पर वह बता रहा था कि आज 12 बजे गए हैं, कोई मरीज नहीं मिला है।
बातचीत कर वह पांच मिनट तक वहीं रुका रहा। इतने में एक महिला को लेकर उसके घर वाले आ रहे थे। वह युवक तुरंत मदद करने चला गया। इसी बहाने उसने अपना काम कर लिया। वह युवक सामने एक सेंटर ले गया और बोला की भैया अम्मा को जांच कराना है। जल्दी कर दिजिएगा। यह कहकर वह चला गया। इसी तरह से महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर के दलाल भी मौजूद मिले। एक महिला को उसके घर वाले ई-रिक्शा में बैठा रहे थे। उन्हें अल्ट्रासाउंड करना था। युवक भी उसी ई-रिक्शा में सवार होकर आगे बढ़ गया।
अस्पताल के सामने दुकानों पर रहती भीड़ : मरीजों से जांच कराने के नाम पर ही नहीं दवा खरीदवाने में भी दलाल कमीशन लेते हैं। असल में यह खेल बेहद होशियारी से खेला जा रहा है। सादे पर्चे पर दवा लिखी होती है। इससे ही बाहर दवाएं खरीदी जाती हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन का दावा है कि सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं। बाहर की दवा डॉक्टर नहीं लिखते हैं।
डॉक्टर पकड़ में न आए, इस लिए सादे पन्ने में सिर्फ दवा का नाम लिखकर मरीज को देते हैं। इसी पर्चे को बाहर घूम रहे दलाल लेकर छूट में दवा दिलाने की बात कर अपना काम कर लेते हैं।
दुकानों पर उनकी सेटिंग होने के कारण दिन भर की बिक्री के हिसाब से शाम को रकम दे दी जाती है। एक दलाल को औसतन पांच सौ से एक हजार रुपये एक दिन में मिल जाते हैं। यह रकम कोई निश्चित नहीं है। मरीज मिलने के हिसाब से घटती बढ़ती रहती है।
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जिला अस्पताल के लैब में एक दिन में 100 से अधिक जांच होती है। वहीं दोगुनी संख्या में मरीज जांच कराने पहुंचते हैं। यही हाल अल्ट्रासाउंड व सिटी स्कैन में भी है।
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औसतन 40 से 50 अल्ट्रासाउंड एक दिन में होता है। यहां भी दोगुनी संख्या में मरीज जांच कराने पहुंचते हैं। सिटी स्कैन में तो मरीजों से 100-150 मरीज जांच कराने पहुंचते हैं। 70 से 80 के बीच सीटी स्कैन होता है। मरीजों की संख्या अधिक होने से उनको अस्पताल में दूसरे दिन जांच कराने आना पड़ता है। इसका फायदा मरीज माफिया उठाते हैं। मरीज पर्चा लेकर जैसे ही बाहर आते हैं दलाल उन्हें अपनी बातों में फंसा लेते हैं।
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मंगलवार को जिला अस्पताल के सामने सर्विस लेने के पास एक युवक खड़ा था। वह फोन पर किसी से बात कर रहा था, उसकी बातचीत से समझ में आ गया था की वह मरीज की तलाश में हैं। क्योंकि फोन पर वह बता रहा था कि आज 12 बजे गए हैं, कोई मरीज नहीं मिला है।
बातचीत कर वह पांच मिनट तक वहीं रुका रहा। इतने में एक महिला को लेकर उसके घर वाले आ रहे थे। वह युवक तुरंत मदद करने चला गया। इसी बहाने उसने अपना काम कर लिया। वह युवक सामने एक सेंटर ले गया और बोला की भैया अम्मा को जांच कराना है। जल्दी कर दिजिएगा। यह कहकर वह चला गया। इसी तरह से महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर के दलाल भी मौजूद मिले। एक महिला को उसके घर वाले ई-रिक्शा में बैठा रहे थे। उन्हें अल्ट्रासाउंड करना था। युवक भी उसी ई-रिक्शा में सवार होकर आगे बढ़ गया।
अस्पताल के सामने दुकानों पर रहती भीड़ : मरीजों से जांच कराने के नाम पर ही नहीं दवा खरीदवाने में भी दलाल कमीशन लेते हैं। असल में यह खेल बेहद होशियारी से खेला जा रहा है। सादे पर्चे पर दवा लिखी होती है। इससे ही बाहर दवाएं खरीदी जाती हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन का दावा है कि सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं। बाहर की दवा डॉक्टर नहीं लिखते हैं।
डॉक्टर पकड़ में न आए, इस लिए सादे पन्ने में सिर्फ दवा का नाम लिखकर मरीज को देते हैं। इसी पर्चे को बाहर घूम रहे दलाल लेकर छूट में दवा दिलाने की बात कर अपना काम कर लेते हैं।
दुकानों पर उनकी सेटिंग होने के कारण दिन भर की बिक्री के हिसाब से शाम को रकम दे दी जाती है। एक दलाल को औसतन पांच सौ से एक हजार रुपये एक दिन में मिल जाते हैं। यह रकम कोई निश्चित नहीं है। मरीज मिलने के हिसाब से घटती बढ़ती रहती है।