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कुशीनगर के मुजहना गांव में एक महीने में 11 लोगों की मौत से सहम गए हैं लोग, वजह पर संदेह

Wed, 02 Jun 2021 12:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 02 Jun 2021 12:07 AM IST
सार

अभी तक इस गांव में स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंची है। ग्रामीणों ने जांच व टीकाकरण की मांग की है।

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painik due to 11 deaths in a month in the mujhana village
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कप्तानगंज विकास खंड के मुजहना गांव में बीते एक महीने में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें चार पुरुष और सात महिलाएं शामिल हैं। सभी की मौत सर्दी, खांसी, बुखार और सांस लेने में दिक्कत के कारण हुई है। परंतु इनमें से किसी की कोरोना जांच नहीं होने के चलते मौत का कारण अभी भी स्पष्ट नहीं है। लगातार हो रही मौतों से ग्रामीण सहमे हुए हैं। परंतु अभी तक इस गांव में स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंची है। ग्रामीणों ने जांच व टीकाकरण की मांग की है।

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कप्तानगंज तहसील व विकासखंड के गांव मुजहना की आबादी लगभग डेढ़ हजार है। गांव में 225 परिवार निवास करते हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामप्रताप कन्नौजिया ने बताया कि गांव के कई लोग बाहर रहकर जीविको पार्जन करते हैं। मध्यम वर्ग के लोगों की संख्या गांव अधिक है। पंचायत चुनाव के दौरान ही गांव के 20 से अधिक लोग सर्दी, खांसी, बुखार और सांस लेने की तकलीफ से परेशान थे। परंतु जांच की बजाय अधिकांश लोगों ने झोला छाप या मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाई।
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कुछ लोग तो ठीक हो गए लेकिन लुजुरो देवी, कन्तराजी देवी, मलावती देवी, बेलाशी, कलमा, बिजलावती, कविता तिवारी, सोहन साहनी, श्रीनिवास प्रसाद, भल्लर साहनी और चंद्रभूषण शुक्ला की मौत एक महीने के अंदर हो गई। गांव में एक के बाद एक हो रही मौतों से लोग सहम गए हैं। बहुत जरूरी काम होने पर ही लोग अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में अभी तक कोरोना की जांच करने वाली टीम भी नहीं पहुंची है। स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम दवा देने भी नहीं आई है।
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ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामप्रताप कन्नौजिया का कहना है कि एक महीने में गांव में इतने लोगों की मौत कभी नहीं हुई। इसीलिए लोग डरे हुए हैं। विकास त्रिपाठी का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को गांव में फैली बीमारी के बारे में जानकारी ही नहीं होना बड़ा आश्चर्यजनक है। गांव में जांच व टीकाकरण जरूरी है। राकेश का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम को काफी पहले गांवों में सक्रिय होकर दवा पहुंचाना चाहिए था लेकिन सारी कवायद शायद कागजों में ही हो रही है। बाबूलाल सिंह का कहना है कि एक माह में एक छोटे से गांव से 11 लोगों की मृत्यु होना कष्टप्रद है। पूरा गांव महीने भर से दु:खी है।


इस संबंध में कप्तानगंज सीएचसी प्रभारी डॉ. एसके गुप्ता का कहना है कि इसकी जानकारी नहीं थी। आशा व एएनएम से इस गांव में हुई मौतों का विवरण मांगा जाएगा। इसके अलावा आरआर टीम को गांव भेजकर जांच व टीकाकरण कराया जाएगा।

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