{"_id":"572ce2cd4f1c1be53f5cd1b7","slug":"on-the-walls-with-images-of-folk-tradition-ukerin","type":"story","status":"publish","title_hn":"दीवारों पर उकेरीं लोक परंपरा की आकृतियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दीवारों पर उकेरीं लोक परंपरा की आकृतियां
कुशीनगर
Updated Sat, 07 May 2016 12:00 AM IST
विज्ञापन
दीवारों पर चित्र बनाकर आयोजन को भव्य बनाने में जुट गए।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फाजिलनगर। क्षेत्र के जोगिया जनूबीपट्टी गांव में सात और आठ मई को दो दिवसीय लोकरंग का आयोजन किया गया है। शुक्त्रस्वार को पहुंचे चित्रकला के कलाकारों ने गांव की भित्तियों और दीवारों पर चित्र बनाकर आयोजन को भव्य बनाने में जुट गए।
गाजीपुर से आए संभावना कला मंच के चित्र कलाकारों ने गांव के बखारों और दीवारों पर बिहार की मधुबनी कला, उत्तर प्रदेश की चौपुरना, महाराष्ट्र की वर्ली, गोड़ आर्ट समेत विभिन्न राज्यों के चिंत्रकलाओं से संबंधित चित्र बना रहे हैं।
कलामंच के संयोजक राजकुमार सिंह ने बताया कि हमलोग कला को आमजन तक पहुंचाने के लिये प्रयासरत हैं। अब आधुनिक कला प्रचलित है. ऐसे में पुरानी कला गैलरी तक सिमट कर रह गयी है। हम लोग भित्ती चित्र के माध्यम से लोक कलाओं से आम जनता को परिचित कराने का प्रयास कर रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि देश और प्रदेश के किसी भी हिस्से में इस तरह के आयोजनों में उनकी टीम पहुंचकर भित्ती चित्रों और पोस्टर पेंटिंग जरिए लोक परंपराओं के संवर्धन का प्रयास करती है।
इस टीम मे सपना सिंह, मीरा वर्मा, अनीता, आशीष गुप्ता, बृजेश कुमार, माला, चंदन यादव आदि लोग शामिल हैं। सांस्कृतिक भड़ैती, फूहड़पन के विरुद्ध जनसंस्कृति के संवर्द्धन के लिए लगातार नौ वर्षों से होने वाले लोक रंग का आगाज इस बार शनिवार को रात नौ बजे से होगा।
इस बार जनकवि रमाशंकर विद्रोही को समर्पित इस कार्यक्त्रस्म का शुभारम्भ लोकरंग स्मारिका 2015 के लोकापर्ण के बाद होगा। इसके बाद गांव की महिलाएं कजरी गीत, हिरावल पटना का गायन, बीन बादन, सरायकेला झारखंड के कलाकार छऊ नृत्य करेंगे।
विज्ञापन
गाजीपुर से आए संभावना कला मंच के चित्र कलाकारों ने गांव के बखारों और दीवारों पर बिहार की मधुबनी कला, उत्तर प्रदेश की चौपुरना, महाराष्ट्र की वर्ली, गोड़ आर्ट समेत विभिन्न राज्यों के चिंत्रकलाओं से संबंधित चित्र बना रहे हैं।
विज्ञापन
कलामंच के संयोजक राजकुमार सिंह ने बताया कि हमलोग कला को आमजन तक पहुंचाने के लिये प्रयासरत हैं। अब आधुनिक कला प्रचलित है. ऐसे में पुरानी कला गैलरी तक सिमट कर रह गयी है। हम लोग भित्ती चित्र के माध्यम से लोक कलाओं से आम जनता को परिचित कराने का प्रयास कर रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि देश और प्रदेश के किसी भी हिस्से में इस तरह के आयोजनों में उनकी टीम पहुंचकर भित्ती चित्रों और पोस्टर पेंटिंग जरिए लोक परंपराओं के संवर्धन का प्रयास करती है।
इस टीम मे सपना सिंह, मीरा वर्मा, अनीता, आशीष गुप्ता, बृजेश कुमार, माला, चंदन यादव आदि लोग शामिल हैं। सांस्कृतिक भड़ैती, फूहड़पन के विरुद्ध जनसंस्कृति के संवर्द्धन के लिए लगातार नौ वर्षों से होने वाले लोक रंग का आगाज इस बार शनिवार को रात नौ बजे से होगा।
इस बार जनकवि रमाशंकर विद्रोही को समर्पित इस कार्यक्त्रस्म का शुभारम्भ लोकरंग स्मारिका 2015 के लोकापर्ण के बाद होगा। इसके बाद गांव की महिलाएं कजरी गीत, हिरावल पटना का गायन, बीन बादन, सरायकेला झारखंड के कलाकार छऊ नृत्य करेंगे।