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Kushinagar News: जिस दिन दूल्हे की जानी थी बरात उसी दिन बधा घंट, माहौल गमगीन

Wed, 14 Feb 2024 03:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Wed, 14 Feb 2024 03:09 AM IST
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On the same day when the groom's wedding procession was to take place, the bell struck, the atmosphere was sad.
तमकुहीराज। काल के गाल में समाए राजकपूर की मंगलवार को बरात निकलनी थी लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस युवक को घोड़ी चढ़ना था, उसका घंट बांधा गया और दरवाजे पर बैंड बाजे के शोर की जगह गमगीन माहौल में कर्मकांड से जुड़े कार्यक्रम हुए। मंगलगीत की जगह रुक-रुक कर महिलाओं की सिसकियां सुनाई दे रही थीं। गांव के अधिकांश दरवाजे पर बैठे लोगों के बीच घटना की चर्चा रही। दूसरे दिन भी गांव का माहौल गमगीन रहा और कई घरों में चूल्हे नहीं जले।
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तमकुहीराज थाना क्षेत्र के परसौन गांव निवासी रामाश्रय गोड़ के बड़े बेटे राजकपूर का तिलक का कार्यक्रम रविवार की देर रात संपन्न हुई। तिलक संपन्न होने के बाद संगीत कार्यक्रम में डांस करने से नाराज राजकपूर के जीजा लक्ष्मीपुर बाबू गांव निवासी जटाधारी नाराज होकर पैदल ही घर के लिए चल दिए। इसकी जानकारी होने पर राजकपूर देवरिया के रहने वाले अपने दोस्त नंदलाल पटेल के साथ बाइक से जीजा को मनाने के लिए घर से निकले। रात करीब 2 बजे रास्ते में जीजा से मुलाकात हुई। उन्हें मनाने के बाद तीनों बाइक से घर के लिए चले। बाइक नंदलाल चला रहा था। तीनों अभी चखनी फाल के पास मुख्य पश्चिमी गंडक नहर पर पहुंचे थे कि बाइक अनियंत्रित होकर पुल की रेलिंग से टकराने के बाद गंडक नहर में जा गिरी। नहर में डूबने से राजकपूर (25) और उसके जीजा जटाधारी (40) की मौत हो गई, जबकि नंदलाल पटेल की जान पुलिसकर्मियों की मदद से बच गई। इसकी जानकारी होने के बाद खुशियों में डूबे वर और वधू पक्ष के लोग गम में डूब गए। सोमवार की देर रात शव का अंतिम संस्कार कर दिए।
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मंगलवार को सुबह 9 बजे गांव के बाहर छह लोग मौजूद थे, गमजदा लोगों के बीच इसी घटना की चर्चा हो रही थी। गांव में अंदर जाने के बाद सड़क किनारे तीन महिलाएं खड़ी थीं, आंखों में आंसू लिए राजकपूर के तिलक के पलों की चर्चा कर रही थीं। सुबह 11 बजे राजकपूर के दरवाजे पर करीब दस से अधिक लोग मौजूद रहे, कोई किसी से कुछ बोल नहीं रहा था। रामाश्रय आंखों में आंसू लिए अंतिम संस्कार के बाद होने वाले कर्मकांड कर रहे थे। वैदिक रीति-रिवाज से पुरोहित अवधेश मिश्र उसे पूरा कराने में जुटे रहे। उसी दौरान बाइक से तीन रिश्तेदार पहुंचे, घरों के अंदर से रुक-रुक कर महिलाओं की सिसकियां सुनाई दे रही थीं। दरवाजे से कुछ दूरी पर पीपल के वृक्ष के पास लोग पहुंचे और घंट बांधा गया। इस घटना से दुखी बीस से अधिक घरों में चूल्हे नहीं जले। राजकपूर का छोटा भाई सनकपूर दरवाजे पर किनारे बैठा था, मानो उसे काठ मार गया हो।
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शादी के लिए गांव आया था राजकपूर
गांव के एक निजी विद्यालय के प्रबंधक राजू सिंह के पास गांव के कई युवक खड़े थे। राजू सिंह ने बताया कि परिवार का एक मात्र कमाऊ सदस्य राजकपूर ही था जो, गुजरात के सूरत स्थित एल्युमिनियम प्लांट में काम करता था। 6 फरवरी को शादी के लिए गांव आया था। हंसी-खुशी के बीच उसका तिलक का कार्यक्रम संपन्न हुआ और कुछ ही घंटे बाद उसकी जीवन लीला समाप्त हो गई। घटना के पीछे जीजा की नाराजगी की भी चर्चा लोगों के बीच रही।
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