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जमाकर्ताओं की पूंजी लेकर कंपनी के अफसर गायब
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Wed, 14 Feb 2018 12:21 AM IST
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ख्ााली अाफिस
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना। अलग-अलग नाम व पते के साथ माइक्रो फाइनेंस कंपनी खेलकर कुछ लोग हजारों जमाकर्ताओं की पूंजी लेकर गायब हो गए हैं। कप्तानगंज में इन लोगों ने गुडविल नाम से तो दुदही में गुडलक नाम से दफ्तर खोला था। कप्तानगंज में इनके बोर्ड पर क्षेत्रीय कार्यालय निचलौल महराजगंज का पता दिया गया है। कंपनी के अफसरों के गायब होने के बाद अब जमाकर्ता परेशान हैं तो वहीं एजेंट इन्हें जल्दी ही भुगतान दे देने का आश्वासन भी दे रहे हैं।
कप्तानगंज में किसान चौक के पास नहर की पटरी के किनारे अरविंद पांडेय की मकान में गुडविल इंडिया निधि नाम से एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी का दफ्तर खुला था। आसपास के लोगों के अनुसार इस ब्रांच पर कुछ दिन पहले तक अगल-बगल के गांवों की गरीब महिलाओं का जमावड़ा लगा रहता था। समूह के नाम पर इन महिलाओं से रुपये जमा कराए जा रहे थे। करीब एक सप्ताह से ब्रांच पर ताला लगा हुआ है। हर दिन लोग आते हैं और ताला बंद कर वापस चले जाते हैं। इसके कर्मचारियों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। जमाकर्ताओं का कहना है कि अब इससे संबंधित अफसरों के मोबाइल भी बंद हैं।
दुदही बाजार में भी ब्लाक से गांधी चौक की तरफ जाने वाली सड़क के किनारे एक ब्रांच खुला था। वहां की ब्रांच गुडलक म्युचुअल बेनिफिट लिमिटेड के नाम से खोली गई थी। करीब दो वर्ष पहले खुली इस ब्रांच में आसपास की तमाम महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाकर जोड़ा गया। इनसे दैनिक, साप्ताहिक व मासिक किस्तों में रुपया जमा कराया जा रहा था। एक सप्ताह पहले अचानक यहां के सभी कर्ताधर्ता गायब हो गए। तब से ऑफिस का ताला नहीं खुला और न ही इनके आने-जाने की कोई जानकारी दी जा रही है।
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इस संबंध में कप्तानगंज श्यामलाल यादव का कहना है कि इस माइक्रो फाइनेंस कंपनी के गायब होने के संबंध में उनके यहां अभी तक कोई तहरीर नहीं पड़ी है। परंतु ऐसी चर्चा है कि महराजगंज जिले में इनके खिलाफ केस दर्ज हुआ है। यहां भी शिकायत होती है तो केस दर्ज कर मामले की छानबीन कराई जाएगी।
निजी और समूह के खाते खुलवाने और रुपये जमा करने पर मिलने वाली कमीशन के लालच में कई लोग इस ब्रांच के एजेंट के तौर पर क्षेत्र में सक्रिय हो गए थे। परंतु अचानक कंपनी के दफ्तर में ताला लग जाने से एजेंट बेचैन हैं। वजह यह कि रुपये जमा करने वाले लोग कंपनी के अफसरों की बजाय इन एजेंटों पर भरोसा करके ही यहां तक आए थे। अब अचानक अफसर तो गायब हो गए लेकिन एजेंट उन्हीं जमा कर्ताओं के बीच के हैं।
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कप्तानगंज में किसान चौक के पास नहर की पटरी के किनारे अरविंद पांडेय की मकान में गुडविल इंडिया निधि नाम से एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी का दफ्तर खुला था। आसपास के लोगों के अनुसार इस ब्रांच पर कुछ दिन पहले तक अगल-बगल के गांवों की गरीब महिलाओं का जमावड़ा लगा रहता था। समूह के नाम पर इन महिलाओं से रुपये जमा कराए जा रहे थे। करीब एक सप्ताह से ब्रांच पर ताला लगा हुआ है। हर दिन लोग आते हैं और ताला बंद कर वापस चले जाते हैं। इसके कर्मचारियों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। जमाकर्ताओं का कहना है कि अब इससे संबंधित अफसरों के मोबाइल भी बंद हैं।
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दुदही बाजार में भी ब्लाक से गांधी चौक की तरफ जाने वाली सड़क के किनारे एक ब्रांच खुला था। वहां की ब्रांच गुडलक म्युचुअल बेनिफिट लिमिटेड के नाम से खोली गई थी। करीब दो वर्ष पहले खुली इस ब्रांच में आसपास की तमाम महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाकर जोड़ा गया। इनसे दैनिक, साप्ताहिक व मासिक किस्तों में रुपया जमा कराया जा रहा था। एक सप्ताह पहले अचानक यहां के सभी कर्ताधर्ता गायब हो गए। तब से ऑफिस का ताला नहीं खुला और न ही इनके आने-जाने की कोई जानकारी दी जा रही है।
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इस संबंध में कप्तानगंज श्यामलाल यादव का कहना है कि इस माइक्रो फाइनेंस कंपनी के गायब होने के संबंध में उनके यहां अभी तक कोई तहरीर नहीं पड़ी है। परंतु ऐसी चर्चा है कि महराजगंज जिले में इनके खिलाफ केस दर्ज हुआ है। यहां भी शिकायत होती है तो केस दर्ज कर मामले की छानबीन कराई जाएगी।
निजी और समूह के खाते खुलवाने और रुपये जमा करने पर मिलने वाली कमीशन के लालच में कई लोग इस ब्रांच के एजेंट के तौर पर क्षेत्र में सक्रिय हो गए थे। परंतु अचानक कंपनी के दफ्तर में ताला लग जाने से एजेंट बेचैन हैं। वजह यह कि रुपये जमा करने वाले लोग कंपनी के अफसरों की बजाय इन एजेंटों पर भरोसा करके ही यहां तक आए थे। अब अचानक अफसर तो गायब हो गए लेकिन एजेंट उन्हीं जमा कर्ताओं के बीच के हैं।