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अब पता चला 1974 में पालिका में शामिल हुआ था जगदीशपुरम
कुशीनगर (ब्यूरो)
Updated Tue, 06 Mar 2018 12:30 AM IST
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अब पता चला 1974 में पालिका में शामिल हुआ था जगदीशपुरम
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। शहर में स्थित रेलवे स्टेशन व बेलवा चुंगी चौराहे के बीच बसी करीब डेढ़ हजार की आबादी पिछले दो दशक से नगर क्षेत्र की सुविधाएं पाने के लिए संघर्ष कर रही है। संभ्रांत लोगों की इस कॉलोनी में कोई मूलभूत सुविधा केवल इसलिए नहीं दी जा रही कि यह नगर क्षेत्र का हिस्सा नहीं है। यही नहीं, इस क्षेत्र के लोग न तो नगर पालिका के चुनाव में मतदान कर पा रहे थे और न ही ग्राम पंचायत चुनाव में ही मताधिकार का प्रयाग कर पा रहे थे। परंतु जब नगर के विस्तारीकरण के लिए अधिसूचित क्षेत्रों का प्रकाशन हुआ तो उसमें जगदीशपुरम इलाके का जिक्र ही नहीं था।
इसके बाद जब यहां के लोगों ने छानबीन की तो पता चला कि जगदीशपुरम तो वर्ष 1974 में ही नगर पालिका का हिस्सा बन गया था। जब यहां के लोग नगर पालिका परिषद पडरौना के अधिशासी अधिकारी और चेयरमैन से मिले तो स्पष्ट जवाब देने की बजाय पूर्व के लोगों को दोषी बताया जाने लगा। फिलहाल मामले को जांच का हिस्सा बताकर बचने का रास्ता खोजा जा रहा है। पडरौना नगर को वर्ष 1949 में ही नगर पालिका का दर्जा मिल गया था। वर्ष 1974 और 1992 में नगर के वार्डों का परिसीमन किया गया। इसके बाद नोनियापट्टी ग्राम सभा की जमीन खरीदकर बसे जगदीशपुरम कालोनी को नगर पालिका प्रशासन ने कभी नगर क्षेत्र का हिस्सा नहीं माना।
हालांकि राजस्व अभिलेख में इनकी जमीनें नोनियापट्टी आंशिक नगर क्षेत्र के रूप में दर्ज हैं। जमीन की रजिस्ट्री पर नगर क्षेत्र के हिसाब से स्टांप शुल्क भी वसूला गया। उधर, नोनियापट्टी ग्राम सभा भी इन्हें अपना हिस्सा नहीं मानती है। लिहाजा यहां के लोगों को न तो राशनकार्ड मिला और न ही वोटर कार्ड। जगदीशपुरम में रहने वाले शिक्षक, वकील, डॉक्टर आदि इसे शहरी क्षेत्र में शामिल कराने व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एसडीएम से लगायत राज्यपाल तक को पत्रक भेज चुके हैं। पचास से अधिक बार धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन दे चुके हैं। परंतु हर बार इन्हें नगर क्षेत्र के विस्तारीकरण में देरी का हवाला देकर टरकाया जाता रहा। बीते फरवरी माह में शासन के निर्देश पर जब नगर क्षेत्र के विस्तारीकरण का आदेश जारी हुआ तो इस मुहल्ले के लोग सबसे अधिक खुश थे। परंतु अखबारों में जब नगर क्षेत्र में शामिल करने के लिए अधिसूचित भूखंडों का प्रकाशन हुआ तो जगदीशपुरम की जमीनें उसमें शामिल नहीं थीं। पहले तो इसे सामान्य सरकारी त्रुटि समझा गया लेकिन धीरे-धीरे यह बात सामने आई कि जिन गाटा संख्या (राजस्व अभिलेख में जमीन के नंबर) पर यह कॉलोनी बसी है वह तो वर्ष 1974 में ही वाल्मीकिनगर कॉलोनी में शामिल थी। इसलिए उसे नए परिसीमन में शामिल करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
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इसके बाद जब यहां के लोगों ने छानबीन की तो पता चला कि जगदीशपुरम तो वर्ष 1974 में ही नगर पालिका का हिस्सा बन गया था। जब यहां के लोग नगर पालिका परिषद पडरौना के अधिशासी अधिकारी और चेयरमैन से मिले तो स्पष्ट जवाब देने की बजाय पूर्व के लोगों को दोषी बताया जाने लगा। फिलहाल मामले को जांच का हिस्सा बताकर बचने का रास्ता खोजा जा रहा है। पडरौना नगर को वर्ष 1949 में ही नगर पालिका का दर्जा मिल गया था। वर्ष 1974 और 1992 में नगर के वार्डों का परिसीमन किया गया। इसके बाद नोनियापट्टी ग्राम सभा की जमीन खरीदकर बसे जगदीशपुरम कालोनी को नगर पालिका प्रशासन ने कभी नगर क्षेत्र का हिस्सा नहीं माना।
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हालांकि राजस्व अभिलेख में इनकी जमीनें नोनियापट्टी आंशिक नगर क्षेत्र के रूप में दर्ज हैं। जमीन की रजिस्ट्री पर नगर क्षेत्र के हिसाब से स्टांप शुल्क भी वसूला गया। उधर, नोनियापट्टी ग्राम सभा भी इन्हें अपना हिस्सा नहीं मानती है। लिहाजा यहां के लोगों को न तो राशनकार्ड मिला और न ही वोटर कार्ड। जगदीशपुरम में रहने वाले शिक्षक, वकील, डॉक्टर आदि इसे शहरी क्षेत्र में शामिल कराने व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एसडीएम से लगायत राज्यपाल तक को पत्रक भेज चुके हैं। पचास से अधिक बार धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन दे चुके हैं। परंतु हर बार इन्हें नगर क्षेत्र के विस्तारीकरण में देरी का हवाला देकर टरकाया जाता रहा। बीते फरवरी माह में शासन के निर्देश पर जब नगर क्षेत्र के विस्तारीकरण का आदेश जारी हुआ तो इस मुहल्ले के लोग सबसे अधिक खुश थे। परंतु अखबारों में जब नगर क्षेत्र में शामिल करने के लिए अधिसूचित भूखंडों का प्रकाशन हुआ तो जगदीशपुरम की जमीनें उसमें शामिल नहीं थीं। पहले तो इसे सामान्य सरकारी त्रुटि समझा गया लेकिन धीरे-धीरे यह बात सामने आई कि जिन गाटा संख्या (राजस्व अभिलेख में जमीन के नंबर) पर यह कॉलोनी बसी है वह तो वर्ष 1974 में ही वाल्मीकिनगर कॉलोनी में शामिल थी। इसलिए उसे नए परिसीमन में शामिल करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
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