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गंडक नदी के उस पार के गांवों में विद्युतीकरण की कोशिश करने गए थे
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नहीं निकला बिजली आपूर्ति का रास्ता, विधायक और एसडीएम की कोशिश नाकाम
खड्डा (कुशीनगर)। गंडक नदी उस पार की आबादी को बिजली पहुंचाने के प्रयास को शनिवार के दिन झटका लग गया। नदी की तरफ से जमीन काटे जाने और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का जंगल होने के चलते वर्तमान में पोल गाड़ना या केबिल ले जाना संभव नहीं है। क्षेत्रीय विधायक जटाशंकर त्रिपाठी और एसडीएम खड्डा के नेतृत्व में क्षेत्र से पहुंची टीम व बिहार के कर्मचारियों की टीम ने संयुक्त रूप से तीन घंटे तक हर संभव उपायों पर मंथन किया, लेकिन कोई समाधान नहीं दिखा। अब दूसरे विकल्पों से बिजली पहुंचाने पर विचार किया जाएगा।
आठ वर्ष पहले खड्डा विद्युत उपकेंद्र से लगभग 30 किलोमीटर दूर खड्डा से पनियहवा, सालिकपुर होते हुए रोहुआ नाला के रास्ते दियारा होकर शाहपुर विंध्याचलपुर गांव के रास्ते मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, शाहपुर, विंध्याचलपुर आदि एवं निचलौल तहसील क्षेत्र के सोहगीबरवा क्षेत्र की आबादी को बिजली पहुंचाई जा रही थी। पिछले वर्ष अचानक नदी के कटान करने से लगभग सत्तर पोल नदी में विलीन हो गए थे। इससे बिजली आपूर्ति बंद हो गई। वर्तमान में नदी तेजी से कटान करते हुए बिहार सीमा में घुसकर जंगल काट रही है।
विद्युत निगम ने सर्वे करके बिजली पहुंचाने के लिए लगभग 25 पोल व ढाई किलोमीटर अंडरग्राउंड केबिल डालने की कार्ययोजना तैयार की है, लेकिन वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने वाइल्ड लाइफ कानून का हवाला देते हुए तार या पोल लगाने की अनुमति नहीं दी। इसे लेकर विधायक जटाशंकर त्रिपाठी, एसडीएम अरविंद कुमार, विद्युत निगम के एसई, एक्सईएन आदि ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की एसीएफ अमिता राज के साथ 19 जुलाई को बैठक कर तार ले जाने की अनुमति मांगी थी। इस बैठक में तय हुआ था कि 31 जुलाई को दोनों तरफ के संबंधित अधिकारी कर्मचारी मौके की जांच करेंगे।
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शनिवार को भैसहां घाट से नाव पर सवार होकर विधायक जटाशंकर त्रिपाठी, एसडीएम अरविंद कुमार, सीओ शिवाजी सिंह, विद्युत निगम के एसई राजेश गुप्ता सहित संबंधित लोगों की टीम यूपी-बिहार वार्डर पर खड्डा क्षेत्र के शाहपुर व बिहार के मिश्रौलिया मौजा तथा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मदनपुर वन क्षेत्र के कक्ष संख्या-12 की सीमा पर पहुंची। यहां पर मानचित्र व राजस्व अभिलेख तथा गुगल मैप के आधार पर जायजा लिया गया। निरीक्षण में पता चला की यूपी की जमीन नदी में कट गई है। यहां नदी की तेज धारा बह रही है। वर्तमान में जंगल को नदी काट रही है। वीटीआर के तरफ से वायोलाजिस्ट सौरभ वर्मा, अमीन आजाद प्रसाद, फारेस्टर शत्रुध्न प्रसाद आदि मौजूद थे। जंगल के अंदर से पोल गाड़ने, तार व केबिल ले जाने के लिए वीटीआर प्रशासन कानून के चलते अनुमति देने को तैयार नहीं हुआ। तीन घंटे तक पूरी छानबीन के बाद वर्तमान समय में टीम के सदस्यों को इस रास्ते बिजली ले जाना असंभव दिखा। इस दौरान विद्युत निगम के एक्सईएन सुनील चंद श्रीवास्तव, एसडीओ संजय यादव, जेई अमन कुमार, एसओ रामकृष्ण यादव, एसआई उमेश सिंह, लेखपाल विपिन मणि आदि मौजूद थे।
विधायक बोले-
विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि पूर्व के रास्ते जनता को बिजली पहुंचाने में नदी व जंगल ने रूकावट पैदा कर दी है। बीटीआर प्रशासन से अनुमति के लिए बिहार के मुख्यमंत्री से वार्ता की जाएगी। इसके साथ ही नदी में टावर लगाकर भैसहां से सीधे विद्युत पहुंचाने व सोलर प्लांट जैसे विकल्प पर भी तैयारी चल रही है। बिहार से विजली सप्लाई के लिए भी प्रयास किया जाएगा। जब तक लोगों तक विजली पहुंच नहीं जाती, कोशिश जारी रहेगी।
विधायक की नाव फंस गई थी नदी में
छितौनी। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से वापस आते समय खड्डा के विधायक जटाशंकर त्रिपाठी की नाव नदी में फंस गई थी। वह लकड़ी की नाव को छोड़कर अपने गनरों के साथ एसडीआरएफ की नाव से गंडक नदी के रास्ते पनियहवा पहुंचने वाले थे कि नाव बीच नदी में बालू में फंस गई। विधायक ने बताया कि एसडीआरएफ के जवानों ने दो घंटा की कड़ी मशक्कत उन लोगों को सुरक्षित नदी से बाहर निकाला।
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खड्डा (कुशीनगर)। गंडक नदी उस पार की आबादी को बिजली पहुंचाने के प्रयास को शनिवार के दिन झटका लग गया। नदी की तरफ से जमीन काटे जाने और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का जंगल होने के चलते वर्तमान में पोल गाड़ना या केबिल ले जाना संभव नहीं है। क्षेत्रीय विधायक जटाशंकर त्रिपाठी और एसडीएम खड्डा के नेतृत्व में क्षेत्र से पहुंची टीम व बिहार के कर्मचारियों की टीम ने संयुक्त रूप से तीन घंटे तक हर संभव उपायों पर मंथन किया, लेकिन कोई समाधान नहीं दिखा। अब दूसरे विकल्पों से बिजली पहुंचाने पर विचार किया जाएगा।
आठ वर्ष पहले खड्डा विद्युत उपकेंद्र से लगभग 30 किलोमीटर दूर खड्डा से पनियहवा, सालिकपुर होते हुए रोहुआ नाला के रास्ते दियारा होकर शाहपुर विंध्याचलपुर गांव के रास्ते मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, शाहपुर, विंध्याचलपुर आदि एवं निचलौल तहसील क्षेत्र के सोहगीबरवा क्षेत्र की आबादी को बिजली पहुंचाई जा रही थी। पिछले वर्ष अचानक नदी के कटान करने से लगभग सत्तर पोल नदी में विलीन हो गए थे। इससे बिजली आपूर्ति बंद हो गई। वर्तमान में नदी तेजी से कटान करते हुए बिहार सीमा में घुसकर जंगल काट रही है।
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विद्युत निगम ने सर्वे करके बिजली पहुंचाने के लिए लगभग 25 पोल व ढाई किलोमीटर अंडरग्राउंड केबिल डालने की कार्ययोजना तैयार की है, लेकिन वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने वाइल्ड लाइफ कानून का हवाला देते हुए तार या पोल लगाने की अनुमति नहीं दी। इसे लेकर विधायक जटाशंकर त्रिपाठी, एसडीएम अरविंद कुमार, विद्युत निगम के एसई, एक्सईएन आदि ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की एसीएफ अमिता राज के साथ 19 जुलाई को बैठक कर तार ले जाने की अनुमति मांगी थी। इस बैठक में तय हुआ था कि 31 जुलाई को दोनों तरफ के संबंधित अधिकारी कर्मचारी मौके की जांच करेंगे।
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शनिवार को भैसहां घाट से नाव पर सवार होकर विधायक जटाशंकर त्रिपाठी, एसडीएम अरविंद कुमार, सीओ शिवाजी सिंह, विद्युत निगम के एसई राजेश गुप्ता सहित संबंधित लोगों की टीम यूपी-बिहार वार्डर पर खड्डा क्षेत्र के शाहपुर व बिहार के मिश्रौलिया मौजा तथा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मदनपुर वन क्षेत्र के कक्ष संख्या-12 की सीमा पर पहुंची। यहां पर मानचित्र व राजस्व अभिलेख तथा गुगल मैप के आधार पर जायजा लिया गया। निरीक्षण में पता चला की यूपी की जमीन नदी में कट गई है। यहां नदी की तेज धारा बह रही है। वर्तमान में जंगल को नदी काट रही है। वीटीआर के तरफ से वायोलाजिस्ट सौरभ वर्मा, अमीन आजाद प्रसाद, फारेस्टर शत्रुध्न प्रसाद आदि मौजूद थे। जंगल के अंदर से पोल गाड़ने, तार व केबिल ले जाने के लिए वीटीआर प्रशासन कानून के चलते अनुमति देने को तैयार नहीं हुआ। तीन घंटे तक पूरी छानबीन के बाद वर्तमान समय में टीम के सदस्यों को इस रास्ते बिजली ले जाना असंभव दिखा। इस दौरान विद्युत निगम के एक्सईएन सुनील चंद श्रीवास्तव, एसडीओ संजय यादव, जेई अमन कुमार, एसओ रामकृष्ण यादव, एसआई उमेश सिंह, लेखपाल विपिन मणि आदि मौजूद थे।
विधायक बोले-
विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि पूर्व के रास्ते जनता को बिजली पहुंचाने में नदी व जंगल ने रूकावट पैदा कर दी है। बीटीआर प्रशासन से अनुमति के लिए बिहार के मुख्यमंत्री से वार्ता की जाएगी। इसके साथ ही नदी में टावर लगाकर भैसहां से सीधे विद्युत पहुंचाने व सोलर प्लांट जैसे विकल्प पर भी तैयारी चल रही है। बिहार से विजली सप्लाई के लिए भी प्रयास किया जाएगा। जब तक लोगों तक विजली पहुंच नहीं जाती, कोशिश जारी रहेगी।
विधायक की नाव फंस गई थी नदी में
छितौनी। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से वापस आते समय खड्डा के विधायक जटाशंकर त्रिपाठी की नाव नदी में फंस गई थी। वह लकड़ी की नाव को छोड़कर अपने गनरों के साथ एसडीआरएफ की नाव से गंडक नदी के रास्ते पनियहवा पहुंचने वाले थे कि नाव बीच नदी में बालू में फंस गई। विधायक ने बताया कि एसडीआरएफ के जवानों ने दो घंटा की कड़ी मशक्कत उन लोगों को सुरक्षित नदी से बाहर निकाला।