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100 वर्ष पुराने निबंधन कार्यालय भवन के निर्माण में पेच
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100 वर्ष पुराने निबंधन कार्यालय भवन के निर्माण में पेच
मालिकाना हक न होने से निर्माण के लिए नहीं मिल रही धनराशि
- अंग्रेजों के समय में स्थापित हुआ था हाटा का निबंधन कार्यालय
- वर्ष 2014 से किराए के जर्जर मकान में संचालित हो रहा है हाटा निबंधन कार्यालय
- सौ वर्षों से अधिक जिस भवन में चला कार्यालय, उस पर नहीं है मालिकाना हक
- दो वर्षों से एसडीएम स्तर पर लंबित है फाइल
मनोज कुमार गिरि
हाटा। करोड़ों रुपये राजस्व देने वाला हाटा निबंधन कार्यालय सात वर्षों से दो कमरों के किराए के मकान में संचालित हो रहा है। पुराना कार्यालय भवन जर्जर होने के कारण सात वर्ष पहले पुनर्निर्माण के लिए उस भवन को खाली किया गया था। जिस जगह पुराना कार्यालय भवन है, उस पर निबंधन विभाग का मालिकाना हक नहीं होने से उसके निर्माण के लिए धन अवमुक्त नहीं हो पा रहा है। कार्यालय भवन की जमीन का मालिकाना हक पाने के लिए विभाग की ओर से राजस्व विभाग में दावा दाखिल किया गया है, जो एसडीएम स्तर पर करीब दो वर्ष से लंबित है।
हाटा तहसील परिसर से सटे निबंधन कार्यालय का पुराना भवन स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 1906 में हुआ था। इस भवन में सौ वर्षों से अधिक समय तक निबंधन कार्यालय संचालित हुआ है। कार्यालय भवन के जर्जर होने के कारण वर्ष 2014 में कार्यालय को तहसील परिसर से करीब एक किलोमीटर दूर दो कमरे वाले किराए के मकान में स्थानांतरित कर दिया गया। उस समय बताया गया कि जल्द ही जर्जर भवन को तोड़कर यहां नया निबंधन कार्यालय भवन का निर्माण कराया जाएगा। जब भवन निर्माण के लिए विभाग की ओर से धन अवमुक्त कराने के लिए फाइल भेजी गई तो उस जमीन के मालिकाना हक की पड़ताल शुरू हो गई। अभिलेखों की जांच में वह जमीन तहसील कार्यालय के नाम पर दर्ज है। इस पर निबंधन विभाग कार्यालय भवन के निर्माण के लिए धन अवमुक्त करने से मना कर दिया। इसके बाद से निबंधन कार्यालय भवन निर्माण का मामला जमीन के मालिकाना हक के पेंच में फंस गया। निबंधन कार्यालय तहसील परिसर से दूर होने के कारण जमीन का बैनामा कराने आए लोगों और उनसे जुडे़ अधिवक्ताओं को काफी परेशानी हो रही है।
उप निबंधक हाटा धीरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले निबंधन विभाग की ओर से पुराने निबंधन कार्यालय की जमीन के मालिकाना हक के लिए दावा दाखिल किया गया था। वह अभी भी एसडीएम कार्यालय स्तर पर लंबित है। इस कारण कार्यालय भवन के निर्माण के लिए धन अवमुक्त नहीं हो पा रहा है। संवाद
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मालिकाना हक न होने से निर्माण के लिए नहीं मिल रही धनराशि
- अंग्रेजों के समय में स्थापित हुआ था हाटा का निबंधन कार्यालय
- वर्ष 2014 से किराए के जर्जर मकान में संचालित हो रहा है हाटा निबंधन कार्यालय
- सौ वर्षों से अधिक जिस भवन में चला कार्यालय, उस पर नहीं है मालिकाना हक
- दो वर्षों से एसडीएम स्तर पर लंबित है फाइल
मनोज कुमार गिरि
हाटा। करोड़ों रुपये राजस्व देने वाला हाटा निबंधन कार्यालय सात वर्षों से दो कमरों के किराए के मकान में संचालित हो रहा है। पुराना कार्यालय भवन जर्जर होने के कारण सात वर्ष पहले पुनर्निर्माण के लिए उस भवन को खाली किया गया था। जिस जगह पुराना कार्यालय भवन है, उस पर निबंधन विभाग का मालिकाना हक नहीं होने से उसके निर्माण के लिए धन अवमुक्त नहीं हो पा रहा है। कार्यालय भवन की जमीन का मालिकाना हक पाने के लिए विभाग की ओर से राजस्व विभाग में दावा दाखिल किया गया है, जो एसडीएम स्तर पर करीब दो वर्ष से लंबित है।
हाटा तहसील परिसर से सटे निबंधन कार्यालय का पुराना भवन स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 1906 में हुआ था। इस भवन में सौ वर्षों से अधिक समय तक निबंधन कार्यालय संचालित हुआ है। कार्यालय भवन के जर्जर होने के कारण वर्ष 2014 में कार्यालय को तहसील परिसर से करीब एक किलोमीटर दूर दो कमरे वाले किराए के मकान में स्थानांतरित कर दिया गया। उस समय बताया गया कि जल्द ही जर्जर भवन को तोड़कर यहां नया निबंधन कार्यालय भवन का निर्माण कराया जाएगा। जब भवन निर्माण के लिए विभाग की ओर से धन अवमुक्त कराने के लिए फाइल भेजी गई तो उस जमीन के मालिकाना हक की पड़ताल शुरू हो गई। अभिलेखों की जांच में वह जमीन तहसील कार्यालय के नाम पर दर्ज है। इस पर निबंधन विभाग कार्यालय भवन के निर्माण के लिए धन अवमुक्त करने से मना कर दिया। इसके बाद से निबंधन कार्यालय भवन निर्माण का मामला जमीन के मालिकाना हक के पेंच में फंस गया। निबंधन कार्यालय तहसील परिसर से दूर होने के कारण जमीन का बैनामा कराने आए लोगों और उनसे जुडे़ अधिवक्ताओं को काफी परेशानी हो रही है।
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उप निबंधक हाटा धीरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले निबंधन विभाग की ओर से पुराने निबंधन कार्यालय की जमीन के मालिकाना हक के लिए दावा दाखिल किया गया था। वह अभी भी एसडीएम कार्यालय स्तर पर लंबित है। इस कारण कार्यालय भवन के निर्माण के लिए धन अवमुक्त नहीं हो पा रहा है। संवाद
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