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Kushinagar News: जमीन की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़़ा रोकेगा नया साफ्टवेयर
Fri, 01 Aug 2025 12:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 01 Aug 2025 12:50 AM IST
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पडरौना रजिस्ट्री कार्यालय में क्रेता और विक्रेता का बयान लेते रजिस्ट्रार। संवाद
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पडरौना। जमीन की रजिस्ट्री में अब फर्जीवाड़ा नहीं होगा। इसके लिए शासन की तरफ से नया साफ्टवेयर लांच किया गया है। यही नहीं इस साफ्टवेयर के लांच होने से कार्यालय का कार्य भी आसान होने के साथ रजिस्ट्री कराने अब लोगों को दो दिन का समय देना होगा। इसके अलावा असंक्रमणीय भूमि (जिसे बेचा या दान नहीं दिया जा सकता) ऐसे भूमि की रजिस्ट्री अब नहीं हो पाएगी। यदि कोई फर्जी खतौनी तैयार कर आवेदन करेगा तो लांच हुआ नया साॅफ्टवेयर उसे खारिज कर क्रेता व विक्रेता के मोबाइल पर ओटीपी ही नहीं भेजेगा।
जिस सॉफटवेयर में अब तक जमीन की खरीद और बिक्री होती है उसमें फर्जीवाड़ा पकड़ने का कोई उपाय नहीं था। इसका लाभ उठाकर धंधेबाज जमीनों का फर्जी खतौनी तैयार कर असंक्रमणीय को संक्रमणीय दिखा देते थे। इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री करवा देते थे। चूंकि पुराने सॉफटवेयर में ऑनलाइन जांच की व्यवस्था नहीं होती थी, जिससे खतौनी में किया गया फर्जीवाड़ा पकड़ा नहीं जाता था। इसका लाभ उठाकर विवादित जमीनों की भी आसानी से रजिस्ट्री हो जाती थी।
वरिष्ठ अधिवक्ता मृत्युंजय सिंह ने बताया कि नया सॉफटवेयर लांच होने के बाद अब रजिस्ट्री के समय दस्तावेज अपलोड करते समय खतौनी का यूनिक कोड डालना अनिवार्य हो गया है। इसके बाद हां के ऑप्शन पर क्लिक कर कोड को अपलोड करना है। यदि आवास विकास परिषद की जमीन है तो नहीं लिखना होगा। इसके बिना प्रक्रिया आगे ही नहीं बढ़ेगी और आवेदन खारिज हो जाएगा। नया सॉफ्टवेयर लांच होने के बाद जमीन के फर्जीवाड़ा में रोक तो लगेगा, लेकिन निबंधन विभाग की ओर से अब नए सर्वर पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया का नियम बदलने की तैयारी से रजिस्ट्री कराने वालों लोगों को अब कम से कम दो दिन का समय देना होगा। बदले नियम के अनुसार पहले दिन दस्तावेज अपलोड किया जाएगा और स्टांप शुल्क जमा होगा। वहीं दूसरे दिन क्रेता-विक्रेता और गवाह को आना होगा।
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वरिष्ठ अधिवक्ता कौशल शुक्ल ने बताया कि इस प्रक्रिया से जहां दस्तावेज में गलतियां तो रुकेंगी लेकिन क्रेता और विक्रेताओं की चुनौतियां भी बढ़ेंगी। लोगों को दो दिन तक रजिस्ट्री कार्यालय का चक्कर काटना पड़ेगा। इसके अलावा अगर दूसरे दिन विक्रेता रजिस्ट्री करने नहीं आया तो रुपये देने के बाद भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी। इससे क्रेता और विक्रेता में विवाद बढ़ेगा। ऐसे में जमीन बेचने वाले को कोई धमका सकता है या मिली कीमत से अधिक रेट के चक्कर में रजिस्ट्री करने से क्रेता कतराने लगेगा। इससे स्टांप खरीद चुके क्रेता को दिक्कत होगी।
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जिस सॉफटवेयर में अब तक जमीन की खरीद और बिक्री होती है उसमें फर्जीवाड़ा पकड़ने का कोई उपाय नहीं था। इसका लाभ उठाकर धंधेबाज जमीनों का फर्जी खतौनी तैयार कर असंक्रमणीय को संक्रमणीय दिखा देते थे। इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री करवा देते थे। चूंकि पुराने सॉफटवेयर में ऑनलाइन जांच की व्यवस्था नहीं होती थी, जिससे खतौनी में किया गया फर्जीवाड़ा पकड़ा नहीं जाता था। इसका लाभ उठाकर विवादित जमीनों की भी आसानी से रजिस्ट्री हो जाती थी।
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वरिष्ठ अधिवक्ता मृत्युंजय सिंह ने बताया कि नया सॉफटवेयर लांच होने के बाद अब रजिस्ट्री के समय दस्तावेज अपलोड करते समय खतौनी का यूनिक कोड डालना अनिवार्य हो गया है। इसके बाद हां के ऑप्शन पर क्लिक कर कोड को अपलोड करना है। यदि आवास विकास परिषद की जमीन है तो नहीं लिखना होगा। इसके बिना प्रक्रिया आगे ही नहीं बढ़ेगी और आवेदन खारिज हो जाएगा। नया सॉफ्टवेयर लांच होने के बाद जमीन के फर्जीवाड़ा में रोक तो लगेगा, लेकिन निबंधन विभाग की ओर से अब नए सर्वर पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया का नियम बदलने की तैयारी से रजिस्ट्री कराने वालों लोगों को अब कम से कम दो दिन का समय देना होगा। बदले नियम के अनुसार पहले दिन दस्तावेज अपलोड किया जाएगा और स्टांप शुल्क जमा होगा। वहीं दूसरे दिन क्रेता-विक्रेता और गवाह को आना होगा।
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वरिष्ठ अधिवक्ता कौशल शुक्ल ने बताया कि इस प्रक्रिया से जहां दस्तावेज में गलतियां तो रुकेंगी लेकिन क्रेता और विक्रेताओं की चुनौतियां भी बढ़ेंगी। लोगों को दो दिन तक रजिस्ट्री कार्यालय का चक्कर काटना पड़ेगा। इसके अलावा अगर दूसरे दिन विक्रेता रजिस्ट्री करने नहीं आया तो रुपये देने के बाद भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी। इससे क्रेता और विक्रेता में विवाद बढ़ेगा। ऐसे में जमीन बेचने वाले को कोई धमका सकता है या मिली कीमत से अधिक रेट के चक्कर में रजिस्ट्री करने से क्रेता कतराने लगेगा। इससे स्टांप खरीद चुके क्रेता को दिक्कत होगी।