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नेपाल त्रासदी : अपनों के इंतजार में पथराईं आंखें, अब टूटने लगी उम्मीद

Sun, 13 Sep 2026 03:03 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2026 03:03 AM IST
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Nepal tragedy: Eyes turned stone-cold waiting for loved ones, now hope is fading
कप्तानगंज। मोबाइल की घंटी बजती है तो घर के लोग सहम जा रहे हैं। कुछ पल के लिए लोगों का लगता है शायद नेपाल से कोई खबर आई हो और अपनों के लौटने की सूचना हो लेकिन दूसरी ओर कोई और आवाज सुनाई देती है तो उम्मीद फिर टूट जाती है। 18 दिन से यही सिलसिला चल रहा है। आंखें अपनों की तलाश में पथरा गईं हैं। जिले से लापता सात युवकों के बारे में अभी तक नेपाल के जिस कंपनी में काम करते थे, वहां से भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। सभी के परिजन नेपाल में डीएनए सैंपल दे चुके हैं। उसकी भी रिपोर्ट की जानकारी साझा नहीं की गई है।
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नेपाल की त्रासदी में लापता कप्तानगंज क्षेत्र के छह और तहसील क्षेत्र के एक युवक के परिवार वालों की चिंता कम नहीं हो रही है। परिजन नेपाल के अस्पतालों और राहत केंद्रों के चक्कर लगा चुके हैं लेकिन पहचान मुश्किल होने से हर बार निराशा हाथ लग रही है। डीएनए जांच की रिपोर्ट भी अब तक नहीं आई है। 26 अगस्त को नेपाल के रसुवा जिले में अपर त्रिशूली क्षेत्र में संचालित पावर प्लांट में आई त्रासदी के दौरान कप्तानगंज क्षेत्र के 10 मजदूर लापता हो गए थे।
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इनमें सुधियानी गांव के अभिषेक तिवारी, राजकुमार तिवारी, आकाश कनौजिया और गोरखपुर के पिपराइच निवासी आशुतोष मणि उपाध्याय व प्रदीप निषाद किसी तरह जान बचाकर पहाड़ पर पहुंच गए थे। करीब 26 घंटे तक बिना खाए-पिए पहाड़ पर रहने के बाद उन्हें हेलीकॉप्टर से काठमांडू लाया गया। कई दिन वहां रहने के बाद सड़क मार्ग से रक्सौल और फिर ट्रेन से कप्तानगंज पहुंचे। 31 अगस्त को यह अपने घर लौट आए। मगर सुधियानी के अभय उर्फ धीरज तिवारी, पंकज राजभर और अमन गौड़ का कोई पता नहीं चल सका। पांच सितंबर को कंपनी के कांट्रेक्टर अशोक थापा ने अमन गौड़ के परिवार को उसके शव की पहचान होने की सूचना दी। अमन के दाहिने हाथ पर बने गोदने के निशान की पुष्टि के बाद परिजन नेपाल पहुंचे और शव की पहचान की। छह सितंबर को नेपाल में ही अमन का अंतिम संस्कार कर परिवार घर लौट आया,लेकिन बाकी लापता युवकों का अभी तक पता नहीं चल सका है।
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छह परिवारों को अब भी अपनों का इंतजार
-कप्तानगंज तहसील क्षेत्र के मलुकही गांव के 35 वर्षीय करन शर्मा, सुधियानी के 23 वर्षीय अभय उर्फ धीरज तिवारी और 22 वर्षीय पंकज राजभर, अमडीहा के 31 वर्षीय अरुण कुमार सिंह, मुंडेरा के 48 वर्षीय रविंद्र सिंह तथा अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र के भलुही सतपोखरिया निवासी 50 वर्षीय नाथू प्रसाद और हाटा तहसील क्षेत्र के 35 वर्षीय सुनील कुमार के बारे में अब तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है।

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टीवी स्क्रीन पर शवों में भाई को तलाशा, हुए निराश
-करन शर्मा के छोटे भाई शिवकरन शर्मा 10 सितंबर को नेपाल के नारायणघाट, चितवन और नवलपरासी के अस्पतालों में पहुंचे। वहां लगाए गए फोटो डिस्प्ले को उन्होंने घंटों देखा। एक-एक तस्वीर में भाई का चेहरा तलाशा लेकिन पहचान नहीं हो सकी। शिवकरन कहते हैं कि भाई की कोई जानकारी नहीं मिलने से वह मायूस होकर लौट आए। अब नेपाल से आने वाली हर मोबाइल की घंटी उम्मीद जगाती है। प्लांट से जुड़े 80 से 90 कर्मचारियों के लापता होने की बात सामने आई थी। इनमें अभी तक महज एक भारतीय और दो नेपाली नागरिकों की जानकारी मिल सकी है। भारतीय नागरिक की पहचान सुधियानी के अमन गौड़ के रूप में हुई थी। अरुण कुमार सिंह के बड़े भाई अनिल सिंह ने बताया कि 18 दिन बाद भी भाई के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। कंपनी की ओर से भी कोई जानकारी नहीं दी गई है और भारतीय दूतावास से भी अब तक परिवार को कोई सूचना नहीं मिली। वहीं, रविंद्र सिंह के बड़े बेटे अंकित सिंह का कहना है कि पिता की चिंता में पूरा परिवार सदमे में है। कोई सूचना नहीं मिलने से बेचैनी बढ़ती जा रही है। अब तो कुछ सोचने-समझने का भी मन नहीं करता। बस एक ही उम्मीद है कि किसी दिन फोन बजे और दूसरी तरफ से पिता की आवाज सुनाई दे।
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