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एसीजेएम कोर्ट ने दिया नोटिस
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तीन सौ से अधिक लोगों का घर तोड़ने का नोटिस जारी
दुदही/बरवापट्टी (कुशीनगर)। क्षेत्र के दशहवा गांव पुष्करनगर टोला के 300 से अधिक लोगों को एसीजेएम कोर्ट से घर तोड़ने का नोटिस मिला है। वर्ष 1960 में गंडक नदी की बाढ़ से तबाह हुए इन लोगों को तत्कालीन एसडीएम ने 32 एकड़ जमीन में बसाया था। 1984 में चकबंदी के दौरान यह जमीन वन विभाग के नाम दर्ज हो गई थी। वन विभाग ने इस सिलसिले में दस साल पहले एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया था। इस पर ग्रामीणों ने स्थगन आदेेश ले रखा था। स्थगन आदेश खारिज होने के बाद जमीन खाली करने के लिए एसीजेएम कोर्ट से घर तोड़ने का नोटिस दिया गया है जिससे ग्रामीण बेचैन हो गए हैं।
दुदही विकास खंड के भगवानपुर, सेमरहवा, सिहोरवा, खुरहुरिया, केदार मिश्र टोला, बनरही, गोखुला, किसुनवा, रक्तहिया, हसुअई, कैथवलिया समेत कई गांव वर्ष 1960 में बाढ़ के कारण गंडक नदी में समा गए थे। करीब 500 घर नदी में बह गए थे। इससे यह सभी सभी परिवारवाले बेघर हो गए थे। वह बंधे पर शरण लिए थे। इसके चलते कटान स्थल पर बोल्डर ले जाने में दिक्कतें हो रही थीं। यह बात तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख गिरीश सिंह ने तत्कालीन कृषि मंत्री गेंदा सिंह को बताई थी। कृषि मंत्री ने की पहल की तो पडरौना के तत्कालीन एसडीएम पुष्पक शर्मा ने सभी बाढ़ पीड़ितों को बैकुंठपुर कोठी एवं दशहवा गांव में बसा दिए। दशहवा में 600 से अधिक लोगों को बसाया गया। वह टोला आज 32 एकड़ में बसा हुआ है। लोगों ने खुशी से एसडीएम के नाम से टोला का नाम पुष्पकनगर रखा। जहां आज पुष्पकनगर बाजार भी लगता है। यहां 150 से अधिक लोगों का आवास भी बन चुका है। सड़क, नाली, पिच, खड़ंजा भी बन गया है। 300 से अधिक लोग एक मंजिल से लेकर तीन मंजिल तक मकान बना लिए हैं। वन विभाग की जमीन में इनका घर आने के कारण अब इन लोगों को वन विभाग की ओर से घर हटवाने के लिए नोटिस मिला है। नोटिस मिलने के बाद लोगों में खलबली है। अब लोग जनप्रतिनिधियों का इंतजार कर रहे हैं।
ग्रामीण बोले-
- देवनाथ खरवार बताते हैं कि सबसे पहले भगवानपुर गांव कटा और देखते देखते ही कुछ पल में हमारा घर ही कि नहीं, बल्कि पूरा गांव कट गया था। हम बाढ़ विस्थापितों को यहां लाकर बसाया गया था।
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- नरसिंह यादव का कहना है कि पहले हमारा आशियाना नदी में विलीन हो गया। किसी तरह से मेहनत मजदूरी करके घर बनवाए। अब इसे तोड़ने के लिए नोटिस मिला है।
- उर्मिला देवी का कहना है कि उनके परिवार वाले बताते हैं कि रातो रात नदी की कटान में उनका सब कुछ छिन गया था। बेघर तो हुए ही, खाने के लिए दाने दाने के मोहताज हो गए। प्रशासन ने ही यह जमीन दी और आज उजाड़ने की नोटिस दिया जा रहा है।
- कोशिला देवी बताती हैं कि यह समस्या यहां के सभी लोगों की है। नोटिस आने के बाद से सबकी नींद गायब हो गई है।
अधिकारी बोले-
वन क्षेत्राधिकारी नृपेंद्र चतुर्वेदी का कहना है कि यह लोग किसी तरीके से घर बनवाए हैं। वन विभाग की ओर से वर्ष 2010 में एसीजेएम कसया के न्यायालय में मुकदमा किया गया था। इसमें उस गांव के लोगों ने स्थगन आदेश लिया था। अब स्थगन खारिज हो गया है। उसी मुकदमा में अतिक्रमण करने वालों को एसीजेएम कोर्ट से नोटिस जारी हुआ है।
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दुदही/बरवापट्टी (कुशीनगर)। क्षेत्र के दशहवा गांव पुष्करनगर टोला के 300 से अधिक लोगों को एसीजेएम कोर्ट से घर तोड़ने का नोटिस मिला है। वर्ष 1960 में गंडक नदी की बाढ़ से तबाह हुए इन लोगों को तत्कालीन एसडीएम ने 32 एकड़ जमीन में बसाया था। 1984 में चकबंदी के दौरान यह जमीन वन विभाग के नाम दर्ज हो गई थी। वन विभाग ने इस सिलसिले में दस साल पहले एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया था। इस पर ग्रामीणों ने स्थगन आदेेश ले रखा था। स्थगन आदेश खारिज होने के बाद जमीन खाली करने के लिए एसीजेएम कोर्ट से घर तोड़ने का नोटिस दिया गया है जिससे ग्रामीण बेचैन हो गए हैं।
दुदही विकास खंड के भगवानपुर, सेमरहवा, सिहोरवा, खुरहुरिया, केदार मिश्र टोला, बनरही, गोखुला, किसुनवा, रक्तहिया, हसुअई, कैथवलिया समेत कई गांव वर्ष 1960 में बाढ़ के कारण गंडक नदी में समा गए थे। करीब 500 घर नदी में बह गए थे। इससे यह सभी सभी परिवारवाले बेघर हो गए थे। वह बंधे पर शरण लिए थे। इसके चलते कटान स्थल पर बोल्डर ले जाने में दिक्कतें हो रही थीं। यह बात तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख गिरीश सिंह ने तत्कालीन कृषि मंत्री गेंदा सिंह को बताई थी। कृषि मंत्री ने की पहल की तो पडरौना के तत्कालीन एसडीएम पुष्पक शर्मा ने सभी बाढ़ पीड़ितों को बैकुंठपुर कोठी एवं दशहवा गांव में बसा दिए। दशहवा में 600 से अधिक लोगों को बसाया गया। वह टोला आज 32 एकड़ में बसा हुआ है। लोगों ने खुशी से एसडीएम के नाम से टोला का नाम पुष्पकनगर रखा। जहां आज पुष्पकनगर बाजार भी लगता है। यहां 150 से अधिक लोगों का आवास भी बन चुका है। सड़क, नाली, पिच, खड़ंजा भी बन गया है। 300 से अधिक लोग एक मंजिल से लेकर तीन मंजिल तक मकान बना लिए हैं। वन विभाग की जमीन में इनका घर आने के कारण अब इन लोगों को वन विभाग की ओर से घर हटवाने के लिए नोटिस मिला है। नोटिस मिलने के बाद लोगों में खलबली है। अब लोग जनप्रतिनिधियों का इंतजार कर रहे हैं।
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ग्रामीण बोले-
- देवनाथ खरवार बताते हैं कि सबसे पहले भगवानपुर गांव कटा और देखते देखते ही कुछ पल में हमारा घर ही कि नहीं, बल्कि पूरा गांव कट गया था। हम बाढ़ विस्थापितों को यहां लाकर बसाया गया था।
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- नरसिंह यादव का कहना है कि पहले हमारा आशियाना नदी में विलीन हो गया। किसी तरह से मेहनत मजदूरी करके घर बनवाए। अब इसे तोड़ने के लिए नोटिस मिला है।
- उर्मिला देवी का कहना है कि उनके परिवार वाले बताते हैं कि रातो रात नदी की कटान में उनका सब कुछ छिन गया था। बेघर तो हुए ही, खाने के लिए दाने दाने के मोहताज हो गए। प्रशासन ने ही यह जमीन दी और आज उजाड़ने की नोटिस दिया जा रहा है।
- कोशिला देवी बताती हैं कि यह समस्या यहां के सभी लोगों की है। नोटिस आने के बाद से सबकी नींद गायब हो गई है।
अधिकारी बोले-
वन क्षेत्राधिकारी नृपेंद्र चतुर्वेदी का कहना है कि यह लोग किसी तरीके से घर बनवाए हैं। वन विभाग की ओर से वर्ष 2010 में एसीजेएम कसया के न्यायालय में मुकदमा किया गया था। इसमें उस गांव के लोगों ने स्थगन आदेश लिया था। अब स्थगन खारिज हो गया है। उसी मुकदमा में अतिक्रमण करने वालों को एसीजेएम कोर्ट से नोटिस जारी हुआ है।